Like to write But took a long pause from it Now wanna resume my writtings and would Like to publish them If found situable

दस्तक और आवाज तो
कानों के लिए है ।
जो दिल को सुनाई दे ,
उसे खामोशी कहते हैं ।।

टूट जाए तो यह दिल सभलता नही ।
यह वो शीशा है जो पिघलता नही ।।
नमिता "प्रकाश"

आज हो रही है
घनघोर बरसात ,
दिल मिले न मिले है
मुकद्दर की बात ।
जमाने पर चढ गया
है कौन सा रंग ,
जमाने से न पूछो
पानी की जात ।।

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प्यार की दास्तां कहते कहते ,
दिल के जख्म और गहरे हो गए।
जब सुनाने लगे मुकद्दर की बात,
ना जाने कैसे वह बहरे हो गए ।।
नमिता "प्रकाश"

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जिंदगी उम्मीदों पर ही जिंदा है ।
तभी तो मन उड़ता हुआ परिंदा है।।
नमिता "प्रकाश"

नजरों का करम नजरों का सितम ।
इन नजरों के दीवाने हैं हम ।।

दर्द है अपना किसी गैर का नही ।
हो जाओं तुम अपने किसी औंर के नहीं ।।
नमिता "प्रकाश"

मैंने कहा बीमार हूं दवा दीजिए !
उसने मुस्कुरा कर कहा
मुझे देख लीजिए !!

कपड़े और चेहरे अकसर
झूठ बोला करते हैं !!
इंसान की असलियत
तो वक्त बताता है!!!!

"हमवतन", को मातृभारती पर पढ़ें :
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