ढूंढता रहा शहर..शहर, दिल मे तेरी तसवीर बसाऐ.. writer....songs,story n script

🚩🚩 आपको और आपके परिवार वालों को मेरी तरफ से कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें। भगवान श्री कृष्णा आपकी हर मनोकामनाए पूर्ण करें।

🚩🚩जय श्री कृष्णा। राधे राधे🚩🚩

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चीते की चाल...
बाज़ की नज़र...
और #बाजीराव की तलवार पर संदेह नहीं करते...
जिस योद्धा ने 43 युद्ध किए और एकभी नहीं हारे,
अफगानिस्तान तक राज्य का विस्तार किया!
पराक्रमी,मराठा सम्राट,वीर शिरोमणि,राष्ट्रगौरव, महान सेनानी, सेनानायक,क्रांतिवीर
#बाजीरावपेशवा की जयंती पर सादर नमन!

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मातृभारती पर इस कहानी 'एक साथी ओर भी था....' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19861381/ek-sathi-or-bhi-tha

*जो जाति अपना इतिहास नहीं जानती वो समय के थपेड़ो में नष्ट हो जाती है,*
*और जो राष्ट्र अपने शत्रु और मित्र में अंतर नहीं कर पाता वो राष्ट्र जल्दी ही नष्ट हो जाता है, - वीर सावरकर,*

🚩🚩🚩🙏
*आज इन्हीं प्रेरणा पंथी*
*वीर सावरकर जी का जन्म दिन है*

*वो प्रखर हिंदुत्व के नेता थे*
*वो हमेशा समझोता न करने वाला राष्ट्रवाद के विचार रखते थे*

માતૃભારતી પર આ વાર્તા 'देश के बहादुर..वीर सावरकर - 1' વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19868137/desh-ke-bahaeur-veer-savarkar-1

-- Mewada Hasmukh

मातृभारती के माध्यम से साझा किया.. https://www.matrubharti.com/bites/111181980

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एक बार राजा भोज के दरबार में एक सवाल उठा कि ' ऐसा कौन सा कुआं है जिसमें गिरने के बाद आदमी बाहर नहीं निकल पाता?' इस प्रश्न का उत्तर कोई नहीं दे पाया।
आखिर में राजा भोज ने राज पंडित से कहा कि इस प्रश्न का उत्तर सात दिनों के अंदर लेकर आओ, वरना आपको अभी तक जो इनाम धन आदि दिया गया है,वापस ले लिए जायेंगे तथा इस नगरी को छोड़कर दूसरी जगह जाना होगा।
छः दिन बीत चुके थे।राज पंडित को जबाव नहीं मिला था।निराश होकर वह जंगल की तरफ गया। वहां उसकी भेंट एक गड़रिए से हुई। गड़रिए ने पूछा -" आप तो राजपंडित हैं, राजा के दुलारे हो फिर चेहरे पर इतनी उदासी क्यों?
यह गड़रिया मेरा क्या मार्गदर्शन करेगा?सोचकर पंडित ने कुछ नहीं कहा।इसपर गडरिए ने पुनः उदासी का कारण पूछते हुए कहा -" पंडित जी हम भी सत्संगी हैं,हो सकता है आपके प्रश्न का जवाब मेरे पास हो, अतः नि:संकोच कहिए।" राज पंडित ने प्रश्न बता दिया और कहा कि अगर कलतक प्रश्न का जवाब नहीं मिला तो राजा नगर से निकाल देगा।
गड़रिया बोला -" मेरे पास पारस है उससे खूब सोना बनाओ। एक भोज क्या लाखों भोज तेरे पीछे घूमेंगे।बस,पारस देने से पहले मेरी एक शर्त माननी होगी कि तुझे मेरा चेला बनना पड़ेगा।"
राज पंडित के अंदर पहले तो अहंकार जागा कि दो कौड़ी के गड़रिए का चेला बनूं? लेकिन स्वार्थ पूर्ति हेतु चेला बनने के लिए तैयार हो गया।
गड़रिया बोला -" *पहले भेड़ का दूध पीओ फिर चेले बनो। राजपंडित ने कहा कि यदि ब्राह्मण भेड़ का दूध पीयेगा तो उसकी बुद्धि मारी जायेगी। मैं दूध नहीं पीऊंगा। तो जाओ, मैं पारस नहीं दूंगा - गड़रिया बोला।
राज पंडित बोला -" ठीक है,दूध पीने को तैयार हूं,आगे क्या करना है?"
गड़रिया बोला-" अब तो पहले मैं दूध को झूठा करूंगा फिर तुम्हें पीना पड़ेगा।"
राजपंडित ने कहा -" तू तो हद करता है! ब्राह्मण को झूठा पिलायेगा?" तो जाओ, गड़रिया बोला।
राज पंडित बोला -" मैं तैयार हूं झूठा दूध पीने को ।"
गड़रिया बोला-" वह बात गयी।अब तो सामने जो मरे हुए इंसान की खोपड़ी का कंकाल पड़ा है, उसमें मैं दूध दोहूंगा,उसको झूठा करूंगा, कुत्ते को चटवाऊंगा फिर तुम्हें पिलाऊंगा।तब मिलेगा पारस। नहीं तो अपना रास्ता लीजिए।"
राजपंडित ने खूब विचार कर कहा-" है तो बड़ा कठिन लेकिन मैं तैयार हूं।
गड़रिया बोला-" मिल गया जवाब। यही तो कुआं है!लोभ का, तृष्णा का जिसमें आदमी गिरता जाता है और फिर कभी नहीं निकलता। जैसे कि तुम पारस को पाने के लिए इस लोभ रूपी कुएं में गिरते चले गए।

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II श्रीराम II

मंगल-मूरति मारुत-नंदन I सकल-अमंगल-मूल-निकंदन II
पवनताने संतन-हितकारी I हृदय बिराजत अवध-बिहारी II
मातु-पिता, गुरु, गनपति, सारद । सिवा-समेत संभु, सुक, नारद II
चरन बंदि बिनवौं सब काहू I देहु राम पद-नेह-निबाहू II
बंदौं राम-लखन-बैदेही I जे तुलसीके परम सनेही II
(विनत-पत्रिका ८७)
(गीताप्रेस, गोरखपुर)

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