Hey, I am reading on Matrubharti!

हर परिस्थिति में अपने-आप को ढालना सीख रही हूं, मानो जैसे में जिंदगी जीने का सलीका जानने लगी हूं!!

कल रात तक जिस शहर में शांति थी, सुबह होते ही फिर चहल-पहल मच गई!!

जिंदगी को कुछ इस तरह से सफल बनाया जाए कि लोग हमारे मरने के बाद नहीं,बल्कि हमारे जीते-जी याद करें हमको!!

ये खुशनुमा-सा मौसम,चाय, कुछ दोस्त और चंद पलों के लिए खिलखिलाना,वर्षाऋतु मनाने के लिए काफी है!!