Hey, I am reading on Matrubharti!

परे हो जाइए जिंदगी-ए-तकलीफो से,
और मज़ा लिजिए हर मोड़ के!

ए मानव,
छूट जा जातिवाद, धर्मवाद की जंजीरों से,
और अपना ले धर्म मानवता का!!

जैसे ही हम उसको भुलाने की कोशिश करते हैं, वह हमें ख्वाबो में आकर उसकी याद दिला जाता है

बेशक हमारे शौख लोगों से अलग है,
इसलिए हममे हौसला है अकेले चलने का,
वरना हम भी लोगों के साथ भीड़ में चलते होते!!

और पढ़े

एसा तो नहीं कि हम किसी के लिए महत्वपूर्ण नहीं,
किसी की खुशी में भी हमारी दुआएं शामिल होंगी!!

जिंदगी अपने-आप में एक लड़त है,
लड़ोगे नहीं तो मरोगे ज़रूर!!

रविवार की शुकून की नींद के लिए ये जिंदगी शनिवार तक कितना दौड़ाती है!!

हर परिस्थिति में अपने-आप को ढालना सीख रही हूं, मानो जैसे में जिंदगी जीने का सलीका जानने लगी हूं!!

कल रात तक जिस शहर में शांति थी, सुबह होते ही फिर चहल-पहल मच गई!!

जिंदगी को कुछ इस तरह से सफल बनाया जाए कि लोग हमारे मरने के बाद नहीं,बल्कि हमारे जीते-जी याद करें हमको!!