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विश्व के सबसे बड़े ग्रन्थ 'महाभारत' को अपने हाथों से लिखने वाले 'गणेश' को 'गणेश चतुर्थी' पर नमन

लाइफ भी फिल्मों जैसी ही है
जब बन रही होती है तब सब बिखरा हुआ लगता है
पर बनने के बाद पीछे मुड़कर देखो तो लगता है
क्या मस्त लाइफ थी, एकदम फ़िल्म जैसी।

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मातृभारती और आपकी शब्दों भरी दोस्ती बनी रहे

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अर्ज़ किया है...
मुलाइज़ा फरमाइएगा...

स्मार्ट फोन ने समाज सुधार कर दिया....

सांस को यूट्यूब पर और
बहू को नेटफ्लिक्स पे फिक्स कर दिया...
- कवि बरसाती

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जब ख्वाब धुंधले होने लगें
तो सच्चाई साफ दिखाई देती है।

ये इश्क है हमसे
या इल्म कोई
आज़माया है

ऐ मेरी ज़मीं, अफ़सोस नही जो तेरे लिये १०० दर्द सहे
महफ़ूज़ रहे तेरी आन सदा, चाहे जान मेरी ये रहे ना रहे।
-मनोज मुंतसिर (केसरी)

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बंसी सब सुर त्यागे है
बस एक ही सुर में बाजे है
हाल न पूछो मोहन का
सब कुश राधे राधे है
-ज़ुबैर अली ताबिश

हर रोज़ नहीं होतीं ये बातें ज़रा गौर फरमाइएगा।
ये दिल है बंदे का कोई नुमाइश नहीं की
टिकट लेकर हरकोई आज़माएगा ।।

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