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की टूटके भी चाँद पर निशान छोड़ आए।

जहाँ के पार तिरंगे की शान छोड़ आए।

महबुब सोनालिया
#chandrayan -2
proud for isro

Aap gulashan ko na yun pyaar se dekha kijey,

Aapko dekhta hai pyaar se sara gulshan !!

Author Mahebub Sonaliya

अप्रशस्तानि कार्याणि यो मोहादनुतिष्ठति। स तेषां विपरिभ्रंशाद् भ्रंश्यते जीवितादपि॥

भावार्थ :
जो मोह -माया में पड़कर अन्याय का साथ देता है, वह अपने जीवन को नरक-तुल्य बना लेता है।
–विदुर नीति से
???????मंगलमय सुप्रभात नमस्ते???????

?? योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई????

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बने रौशन जहाँ सारा दिए ऐसे जलाएंगे
मनाओ ईद को अब तुम,दीवाली हम मनाएंगे।

हम अपनी एकता से इक नई दुनिया बसायेंगे
महोब्बत का तराना हर जुबाँ पर छोड़ जायेंगे।

दिलो को साफ पहले करलो तुम अपने महोब्बतसे
यकीनन एक दिन इस मे ही बस श्री राम आएंगे।

बचाना आपका जिम्मा जहाँ की बदनिगाही से
सुलगती रेत में हम प्यार का चश्मा बहायेंगे।

रखेंगे वेद की कोई रुचा हम अपने सीने में
तुम्हारे दिल में रबकी रहेमातोको छोड़ जायेंगे।

मेरे महेबुब मजहब सिखले कोई महोब्बत का
चलो फिर देखले कोई हमे कैसे लड़ाएँगे।

दिए की ज्योत में 'महेबुब' सबके गम भी जल जाएँ
चलो अबके दिवाली इस तरह से हम मनाएंगे।

महबूब सोनालिया

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उदास रहने से तो मुस्कुराना अच्छा है।

मैं मुस्कुराने लगूँ तो भी आंख भर आए !

-#MahebubSonaliya #urdupoetry #hindiPoetry #ghazal #sher #rekhta #sheriyat

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दोनों खामोश

रह कर भी

बातें करें।

कितनी दिलचस्प

हैं प्यारकी

बोलियाँ

-महबूब सोनालिया

मेरे हाथों में लकीरे ही नहीं अब साहिब
वक़्त से हाथ मिलाने की सजा पाई है।

महबूब सोनालिया

<div>इस से पहले की मैं खुद से भी हार जाऊँगा</div><div>ज़िन्दगी तेरे भी एहसाँ उतार जाऊँगा</div><div><br></div><div>मार दूं कैसे भला अपने ही बातिन में जमीर</div><div>इस तरह जीत के ऐ दोस्त, हार जाऊंगा</div><div><br></div><div>कुछ मेरे शेर, मेरी सोच, मेरे अफ़साने।</div><div>दे के दुनिया को यही यादगार जाऊँगा</div><div><br></div><div>मेरे मलबूस* पे रोती ही जायेगी दुनिया</div><div>और मैं जिस्म को हंस कर उतार जाऊँगा</div><div>*कपडे</div><div><br></div><div>हक़ बयानी* के तराने ही गा रहा हूँ मगर।</div><div>जल्द इस शहर से भी संगसार^ जाऊँगा</div><div>* सत्यनिष्ठ ^ लहूलुहान</div><div><br></div><div>ज़िन्दगी गम की हिफाजत में काट दी मैंने</div><div>मैं तो महबूब यूँ ही बेकरार जाऊँगा</div><div><br></div><div dir='ltr'>महबूब सोनालिया</div>

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