Reading , writing , Painting and reciting poem was my passion since childhood. I am postgraduate in Industrial chemistry from University of Lucknow. After college it was not easy to keep my creativities as it is , due to bad economic conditions. I am very thankful to Matrubharti for giving platform to come back for writing. At present , I am posted NTPC at Rihand . Now I am active at Matrubharti , pratilipi , facebook , Rihand Sahitya manch and my YouTube channel "Panna Voice of Lucknow".

छोड़ दो नफ़रतें आओ दिल-ए-मेहमान बन जाओ ।
मैं भी इन्शान बन जाऊं तुम भी इन्शान बन जाओ ।।
-Panna

उन्हें मालूम है कि हम भी उनसे कम नही यारों ।
तभी तो साज़िशें करते हैं हमको दूर रखने की ।।
-Panna

बहुत कुछ देखने को है जमीं पर रंग कितने हैं ।
वक़्ते रुख़सत ही देखोगे तुम्हारे संग कितने हैं ।।
-Panna

यदि कोई व्यक्ति समय के प्रति ईमानदार नही है , तो निश्चित तौर पर वह अपने काम के प्रति ईमानदार नही हो सकता ।
-Panna

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सब कहते हैं बेवफ़ा तो कहने दो ।
अगर ज़िद में हैं अश्क़ तो बहने दो ।।
-Panna

तुम्हारे आजमाने के लिए बस मैं नही बाकी ।
ये इश्क़ का दरिया कई डूबे कई तैयार बैठे हैं ।।
-Panna

एक शिक्षक मार्गदर्शक होता है न कि ज्ञानदाता । अतः उसे स्वतंत्र विचारक होना चाहिए । भय , धर्म , जाति व आडम्बर की सीमाओं में कैद व्यक्ति एक बेहतर शिक्षक कभी नही हो सकता ।। -Panna (एक विद्यार्थी के विचार)
Happy teacher's day!

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उल्फ़त के शहंशाहों में मुझको शुमार होने दो ,
शुरूर-ए-इश्क़ है इसको अभी ख़ुमार होने दो ।
तड़प कर आ ही जाएगी हक़ीम-ए-दिल हूँ मैं ,
पहले पूरी तरह से उसको भी बीमार होने दो ।।
-Panna

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आँखों ने आँखों से बात कर ली , मोहब्बत की शुरुवात कर ली ।
कशूर किसका ? इल्ज़ाम दिल पे , अश्कों ने भी बरसात कर ली ।।
-Panna

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अगर इन्कार में उसके ज़रा भी बेरुख़ी होती , तो उसको बेवफ़ा कहना मुझे आसान हो जाता ।
हटा देती दिल-ए-दीवार से तस्वीर वह मेरी , तो मैं एक बार फिर उसके लिए अनजान हो जाता ।।
-Panna

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