नाम- श्रीमती लता तेजेश्वर 'रेणुका', शिक्षा : ओड़िआ व अंग्रेजी, हिंदी, मातृभाषा: तेलुगु, पिता, माता का नाम: गो. शाम्भूमुर्ती आचारी, गो. लक्ष्मीबाई आचारी, पति का नाम – को. तेजेश्वररॉव, पुत्र, पुत्री के नाम - श्रावण एबं मेघा जन्म तिथी - 28.03.68, जन्म स्थान--- परलाखेमुंडी, ओडिशा, निवास स्थान - न्यू पनवेल, शौक्षिक-- योग्यता- डिग्री, विशेष कार्य: 2007 से लेखन में लिप्त, अनुवाद : अँग्रेजी और तेलुगु से हिंदी, ओड़िआ, हिंदी से ओड़िआ। लेखन की विधाएँ- कविता, गज़ल, शेरो-शायरी, यात्रा संस्मरण, लघू कथा, कहानी, उपन्यास, हाइकू, मुक्तक, किताबों की समीक्षा संकलन : 1.अंतराष्ट्रीय उपन्यास खट्टी मीठी रिश्ते में लेखन सहभागिता, 2. भारत की प्रतिभाशाली लेखिकाएँ में परिचय सहित दो कविताएँ, 3.अन्तरास्ट्रीय संकलन 'पोएटेस विथ वॉइसेस स्ट्रांग' में एक हिंदी कविता परिचय सहित, 4.'मुम्बई की हिंदी कवयित्रियाँ' में संक्षिप्त जीवन परिचय सहित कविता प्रकाशित 5. मेरे अपने संपादन में छपी काव्य संकलन 'सीप के मोती' में 5कविताएँ प्रकाशित, 6. अँग्रेजी के संकलन 'The strings of Love' में अंग्रेजी में एक कहानी प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकें और ई-बुक 1. मैं साक्षी यह धरती की (काव्य संग्रह)2009, 2 हवेली(उपन्यासिका)2014, 3.'The Waves of Life' (अंग्रेजी)2015, 4. चाँदनी रात में तुम (काव्य संग्रह)2016. 5.सैलाब (लघुउपन्यास,2018) 6.भावनाएँ महकती है (काव्य संग्रह, 2019) 7. उपन्यास 'लहराता चाँद' इसके अलावा कई लघु कथाएँ और कहनियाँ, और 2 काव्यसंग्रह प्रकाशन के लिए तैयार है। 6. अन्य: हिंदी के अलावा अंग्रेजी, ओड़िया एबं तेलुगु में *अनुवाद लेखन* एबं सृजन, चारों भाषाओं में मंचों पर मंचन, भारतीय बहुभाषी काव्यपाठ के मंच पर तेलुगु भाषा का प्रतिनिधत्व करते काव्यपाठ। वैश्विक हिंदी सम्मेलन में विविध भारतीय भाषा संस्कृति संगम की राष्ट्रीय अध्यक्षा के तहत ओड़िआ और तेलुगु भाषा के प्रतिनिधित्व, बिभिन्न संस्थाओं के करीब 60मंचों पर हिंदी में काव्य एबं लघुकथा पाठ, समय समय पर tv चैनल्स के काव्यगोष्टियों में भी काव्य प्रसारित। 7. प्रशारित: 1..यू ट्यूब - विसुअल पोएट्री, मॉम.. ऍम आई अलाइव, + 2. daily motions: That dark night and school days. डिजिटल वॉइस वर्ल्ड के द्वारा एबं मेरे खुदके यू ट्यूब चैनल पर भी कविताएँ प्रसारित, 8.अंतर्जाल पोर्टल पर : लिटरेचर इंडिया साइट, मातृभारती, प्रतिलिपि.कॉम, फणीश्वरनाथ रेणु साइट, इंस्टाग्राम, yourquote.com, ट्विटर, स्वर्ण विभा, माझी मेट्रो, poemhunters.com, news zamania.in, litagram, जनकृति अंतराष्ट्रीय पत्रिका, storymirror.com, fb and 4pages पॉर्टल पर अंग्रेजी, हिंदी, तेलुगु, एबं ओड़िया 4भाषाओं में रचनाएँ प्रकाशित, कई व्ट्सप ग्रुप में लेखन। 9. पत्र, पत्रिकाओं में प्रकाशित: 400 से ज्यादा रचनाएँ प्रतिष्ठित मॉगाजिनों, अखबारों, इ-मॉगाजिन, ब्लॉग्स एबं संकलनों में हिंदी, अँग्रेजी में प्रकाशित A) निम्न पत्रिकाओं में प्रकाशित: 30 से ज्यादा पत्रिकाएँ जैसे गर्भनाल, सहित्य सृजन, रिलायंस त्रै मासिक पत्रिका(जामनगर), सत्य दर्शन, साहित्य दर्शन, काव्य रंगोली, साहित्य समीर दस्तक, कवि मन, स्पंदन ( रिलायंस पत्रिका, पाताल गंगा, महाराष्ट्र से), मीडिया ट्रायल, दृष्टिपात, नई पीढ़ी, समाज कल्याण, राष्ट्र समर्पण, नेपथ्य, पुष्पगंधा, अभनव इमरोज़, वागर्थ, साहित्य समाचार, अदबी उड़ान राष्ट्रीय पत्रिका, संगिनी, कनाडा से प्रकाशित प्रयास, छत्तीसगढ़ के 11वीं विश्वहिंदी सम्मेलन के स्मारिका, अध्यापक मित्र और अन्य में भी कविताएँ प्रकाशित। B) अखबारों में प्रकाशित: लोकजंग, ट्रू मीडिया, नवभारत और नवभारत टाइम्स में रचनाएँ प्रकाशित ईC) आकशवाणी और राजस्थान रेडियो, डिजिटल वॉइस, AVIS में भी रचनाएं प्रसारित और काव्य पाठ। 10. संपादन: काव्य संकलन 'सीप के मोती' 11.प्रमुख सम्मान प्राप्त: 1.काव्यसंग्रह "में साक्षी यह धरती की" के लिए 'साहित्य गरिमा सम्मान', विश्वमैत्री मंच, 2. उपन्यास 'हवेली' के लिए 'समीर दस्तक राष्ट्रीय गौरव सम्मान', 3. अदबी उड़ान राष्ट्रीय हिंदी साहित्यकार सम्मान व पुरस्कार, 4. नारी गौरव सम्मान, (jmd प्रकाशन), 5.बहु भाषी लेखिका सम्मान, तेलुगु कला वेदिका, नवीमुम्बई, 6.हिंदी भाषा भूषण सम्मान, (साहित्य मंडल परिवार, नाथद्वारा) 7.हिंदी साहित्य भूषण सम्मान, काव्यरंगोली पत्रिका की ओर से, 8. शतक-वीर सम्मान, (समगस व्ट्सप ग्रुप के द्वारा) 9.महाराजा श्री कृष्णचन्द्र जैन सम्मान, (समग्र साहित्यिक सेवा के लिए सम्मानित,शिलांग), 10. 4थ सोशल मीडिया प्रतिभा सम्मान, 11. प्रतिभा सम्मान(मगसम मंच), 12.'अग्निशिखा गौरव रत्न सम्मान' प्रसस्ति पत्र, 13.रीडर्स चॉइस राइटर अवार्ड, मातृभारती.कॉम, 14. महादेवी वर्मा सम्मान, 12.ब्लॉग : https://latatejeswar.blogspot.in/?m=1 13.यात्राएँ और सामाजिक कार्य: राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय (भूटान, मॉरीशस) के सम्मेलनों में मंचन, 11वीं विश्वहिंदी सम्मेलन मॉरीशस में सहभागिता, विभिन्न मंचों पर मुख्य अतिथि के रूप में विशेष सम्मान, गुजरात महाराष्ट्र, चेन्नई, राजस्थान, मध्यप्रदेश आदि भोपाल में साहित्य सम्मेलनों में भागीदारी व कई राज्यों में साहित्य व अन्य कार्यों के लिये यात्राएँ। 14. अध्यक्षा- 'विविध भारतीय भाषा संस्कृति संगम', विभिन्न भारतीय भाषाओं के उत्थान के लिए कार्यरत।

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9 महीना पहले

#radical

दिव्यता
***********
सूरज का संसार है
धरती का उपवन,
जल वायु अग्नि दे रहे हिदायत
तेरा मेरा कुछ नहीं जग में
सब कुछ प्रकृति है जान।

समय तू है
उड़ान भी तेरा है
पंखी जब नीड छोड़ जाएगी
निश्चल हो जाएगा जग सारा।

संभल जा रे मानव
ना कुछ तेरा मेरा
जब तक जान है जी ले
कर्म, कर्तव्य, जीवन, रिश्ते
सब कुछ माया है
नित्य जो पूजे दिव्यता को
वही दिव्यता पावे।

©लता तेजेश्वर रेणुका

©लता तेजेश्वर रेणुका

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#Gandhigiri

सड़क पर घूमते एक लड़के को खिलौने बेचते हुए देखा। जिसका दाम 40रुपये था। मेरी बेटी मेघा के 30रुपये में पूछने पर उसने मना कर दिया। मैं पास खड़ी थी। तभी रास्तेके किनारे एक अँधा आदमी वैसे ही खिलौने लिए बेच रहा था। मेघा तुरन्त उसके पास गयी और पूछा,"अंकल ये कितने रुपये की है?" उसने कहा '50रुपये'। तब मेघाने मेरी ओर देखा। तुरन्त मुझसे 50रु लेकर उस अंधे के हाथ में दिया। अंधेने वहीं एक आदमी से निश्चित कर पैसे जेब में रखे। उस खिलौने लिए बेटीके चेहरे पर खुशी और संतृप्ति देख मैं आश्चर्यानंद में डूबी हुई थी।

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2 साल पहले

#kavyotsav -2
मेरी कलम

क्यों न जाने लगे ऐसा,
कोई करे मेरा इंतज़ार -
चातक जैसे निरिक्षण करती
बारिश की झंकार।
मेरी कलम ढूँढ़े मुझे,
पाँत करे बेकरार -
हाथ बढ़ाए पी लिया
जैसे अमृत का पनसाल।
झलक गई मेरे गले से
कुछ बूंदों का फनकार-
चांदनी रात में बहगया
कुछ शब्दों का चमत्कार।
अमृत जैसे शब्दों को
कलम से जब उतारा,
जैसे दिव्यास्त्र से छूटा
तीरों का फव्वारा।

मौलिक, लता तेजेश्वर रेणुका

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2 साल पहले

#kavyotsav -2
निर्झर

झर झर कंपमान है निर्झर तू,
द्रुतगामी मेघ से भी द्रुततर,
न कोई स्थान, काल, चराचर
न मानती कोई विघ्न, विलाप हलाहल।
ना पर्वत या कोई धरोहर
पुनः पुनः टकराती हुई पाषाण से,
असीम चुंबी प्रांत से निकल कर
न मानी कभी व्यथा, चिंतन, विराग
ऋषि, मुनि और गुणियों समान।
सकल चराचर की अमृत धरा है तू,
मराल मृदु दोर्लित मंदगामी तू कहीं,
शीतल जल प्रवाह कटितट को जब टकराए
बूँद बूँद जल राशि बिखरते
विचलित मन की प्यास बुझाए।
नारिंगना जैसी सर्पिल चाल, लचकाए, बलखाए-
नाट्य प्रावीण्य से भरपूर तब अंग
वन मध्ये नाचे हिरन जैसे
निर्झर झरती अविराम तू वैसे।
उग्र शिवजी के मस्तक से तू निकली
कभी प्रखर कभी सौजन्य भी
कभी प्रलय रौद्र और प्रचंड भी
कहीं शांत निम्नगा और प्रसन्न भी।

क्रोधित नागिन जैसी तू उछल कर
लांघती हुई सारी दीवार
तांडव करती उग्र शिव की तरह-
नित्य निठुर और निर्मम तू
निमेष मात्र, निकृंतन कर देती नगर नार।

कैसे वर्णन करे तेरी काया ?
तेरा अस्तित्व ही है जग का साया।
मौलिक, लता तेजेश्वर रेणुका

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2 साल पहले

#काव्योत्सव -2
आईना
*******
आईना हूँ मैं,
रोज सैकड़ों चेहरे आ खड़े हो जाते हैं
मेरे सामने कई सवाल लिए,
कुछ चेहरों में उदासी छाई होती है
कुछ चेहरों पर खुशी तो कुछ गम के साये
कोई पलकें ठपठपाते हैं
तो कोई गुर्राते नज़र आते हैं।
कोई असहनीय वेदना से सिहर उठता है
कोई गिरगिट की तरह रंग बदलता है
कोई मुस्कुराता है तो कोई प्यार से मुझे निहारता है
कोई चेहरे पे चेहरा लगाकर अपना असलियत छुपाता है
तो कोई संदिग्ध नजरों से देखता है
एक नन्ही-सी बच्ची कभी
आ खड़ी हो जाती है मेरे सामने
मासूमियत का आईना चेहरे पर लिए
जिन आँखों में छल-कपट अभी कोसों दूर है
सोचती हूँ क्या नसीब है मेरा
चेहरे तो बहुत दिखते हैं मगर इनमें से
कौन-सा चेहरा खुदमें उतारूं
या शून्य रह जाऊँ यूँ ही
लाखों में भी अकेले जब तक कि
टूट कर बिखर न जाऊँ मेरे नसीब की तरह।

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2 साल पहले

#kavyotsav -2
शहीद की वर्दी
मैं उस शहीद सैनिक के शरीर की वर्दी हूँ
जिस पर कई गोलियाँ छेद कर निकल गईं
रक्त सिक्त मेरे शरीर के पसीने में
बूंद-बूंद रक्त से मिल रही थी।
खून से भरी वर्दी की गंध दूर-दूर तक फैल रही थी
झाड़ियों में उसके प्राणहीन शरीर के टुकड़े
लटक रहे थे जो देख रहे थे उस सैनिक की
निस्तेज आँखों में करवट लेते कई सपने जिसमें थे
एक बेबस माँ का चेहरा
जो बेटे की बाट जोह रही थी, जिसकी सुर्ख आँखें
बेटे को एक नज़र देखने को तरस रही थीं
उन आँखों में था उसकी अविवाहित बहन की
शादी के सपने जिन्हें पूरा करने की जिम्मेदारियाँ थीं
उसकी आँखों में था सुनहरी शादी की जोड़े में
उसकी दुल्हन का चेहरा
जिसने डेढ़ साल पहले ही उसकी दरवाजे पर
लाल रंग की हथेली का छाप छोड़ा था।
उसकी नज़र देख रही थी तीन महीने की
मासूम बेटी की मुस्कान को
जिसे गोद में भरने को उसकी बाहें आतुर थीं।
सब से परे उन आँखों में लहरा रहा था
एक आज़ाद भारत की पताका
और वह गर्व से सैलूट दे खड़ा था सीने में गोली लिए
वो एक शरीर नहीं था
उसमें बसा था हँसता-खेलता पूरा एक देश,
जिसमें कई जिंदगियाँ जोड़ी थी
जो धरती पर मिट्टी का लेप लगाए
शान से सो रहा था।
लता तेजेश्वर 'रेणुका'

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2 साल पहले

#kavyotsav -2
शहीद की वर्दी
मैं उस शहीद सैनिक के शरीर की वर्दी हूँ
जिस पर कई गोलियाँ छेद कर निकल गईं
रक्त सिक्त मेरे शरीर के पसीने में
बूंद-बूंद रक्त से मिल रही थी।
खून से भरी वर्दी की गंध दूर-दूर तक फैल रही थी
झाड़ियों में उसके प्राणहीन शरीर के टुकड़े
लटक रहे थे जो देख रहे थे उस सैनिक की
निस्तेज आँखों में करवट लेते कई सपने जिसमें थे
एक बेबस माँ का चेहरा
जो बेटे की बाट जोह रही थी, जिसकी सुर्ख आँखें
बेटे को एक नज़र देखने को तरस रही थीं
उन आँखों में था उसकी अविवाहित बहन की
शादी के सपने जिन्हें पूरा करने की जिम्मेदारियाँ थीं
उसकी आँखों में था सुनहरी शादी की जोड़े में
उसकी दुल्हन का चेहरा
जिसने डेढ़ साल पहले ही उसकी दरवाजे पर
लाल रंग की हथेली का छाप छोड़ा था।
उसकी नज़र देख रही थी तीन महीने की
मासूम बेटी की मुस्कान को
जिसे गोद में भरने को उसकी बाहें आतुर थीं।
सब से परे उन आँखों में लहरा रहा था
एक आज़ाद भारत की पताका
और वह गर्व से सैलूट दे खड़ा था सीने में गोली लिए
वो एक शरीर नहीं था
उसमें बसा था हँसता-खेलता पूरा एक देश,
जिसमें कई जिंदगियाँ जोड़ी थी
जो धरती पर मिट्टी का लेप लगाए
शान से सो रहा था।
लता तेजेश्वर 'रेणुका'

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2 साल पहले

#LoveYouMummy
प्रिय माँ,
मैं ठीक हूँ। आप के घुटनों का दर्द कैसा है? आशा है भाई, दवाई समय पर देता होगा। माँ आपकी बहुत याद आती है। काममें फंसकर आपसे मिलने का अवसर नहीं मिलरहा। बहुत इच्छा होती है कि उड़कर आजाऊँ और आपके पैरों केपास बैठ गोद में सर रख सो जाऊँ। आपके हाथ से सिर पर तेल लगवाकर बहुत दिन हो गया है। आपके हाथ सिर पर रहती है तो पूरा ब्रह्मांड घूम आने की सुख मिलती है। माँ कुछ समय के लिए मेरे पास आजाओ ताकि मुझे आपकी सेवा का मौका मिले। आपके प्यारकी भूखी -आपकी बेटी लता।

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