Read My Story ... full of Fun and Humour "पहला घूँट" and please give your reviews

भरोसा सब पर कीजिए,
लेकिन *सावधानी* के साथ

क्योंकि..

कभी कभी *खुद के दांत* भी,
जीभ को काट लेते है!

पहली किरण सा छूना
ये चमकीली रौशनी सी खनखनाहट
और
नखरीली हवाओं के मदहोश पल

वो चाय की चुस्कियां....
साँसों में उतार
एक बार फिर तु
गुलाबी सुबह
संग तो गुजार.....

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ये बारिश का मौसम..
चाय का कप ....
और दिल मे तुम्हारा एहसास

इससे खूबसूरत तो शायद....
कुछ है ही नही मेरे पास

हे चाँद बेटे तू कुछ हिल डुल भी लिया कर
थोड़ा खुद से भी अपना काम किया कर
माना कि तू छोटा और लाडला है
पर तु नख़रे से तो ना जिया कर

अब मेरा नाती विक्रम तेरे घर के द्वार आया है
तूने भी मजे मजे में उसको गिराया है
ये तो शुक्र है तेरे भांजे का एंटीना नही टूटा
वरना तूने तो हुस्न के गुरुर में सोरमण्डली वंश का नाम ही डुबाया है

मत भूल तू आज भी मेरी रौशनी के खर्चे पर ऐश उड़ाता है
और यूँ ही करवा चौथ पे खुदा बन जाता है
तुझमे दाग के बावजूद भी तेरी ही जय जय होती है
फिर भी तू अपनी बड़ी बहन पृथ्वी के बच्चों को रुलाता है

मान जा और थोड़ा अपनी तोंद को हिला
घर आये विक्रम को खड़ा कर और खूब खिला पिला
पृथ्वी बेटी के ससुराल से आया है कोई
कम से कम उस बहन की इज्जत तो मिट्टी में ना मिला

माना के नायाब है तू
ये भी माना के लाज़वाब है तू
माना के मेरा बेटा मेहताब है तू
तो में भी तेरा बाप आफताब हु

अगर कहीं मैंने विक्रम को अपनी किरणों की पेंशन दे दी
और उस grand नाती प्रज्ञान Rover को पूरी अटेंशन दे दी
फिर वो विक्रम तेरी साउथ पोल सी कमर से सीधे तेरी छाती पर आएगा
और तो सारी उम्र तू चंदा मामा नही कंस मामा कहलायेगा

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सुनो,
कभी बारिश के वक्त आना
मुझे दूर तक तुम्हारा हाथ थामे चलना है
ढेर सारा वक्त लाना मेरे लिए
एक ही कुल्हड़ वाली चाय पिएंगे
यूँ ही कही बैठ कर
तुम बारिश पर अपनी कोई कविता सुनाना
मैं पागल सा सबकुछ भूल
घण्टो तुम्हे निहारुँगा।
यूंही

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मैं अक्सर खुश रहता हूँ अपनी आवारागर्दी की लत से

तुम इडियट कहके मुझ पर अपना गुबार जो निकालती हो

तुम्हारे देर तक जागने का सबब
और सुबह जल्दी उठने की पर्याय होता

काश मैं तुम्हारी चाहत न होकर
तुम्हारी गरमा गरम चाय होता ..✍️

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सुनो पिया
मेरी चाय क्यों नहीं बन जाते तुम
घुल जाओ रगो में मेरी,

पूरे के पूरे.....

मैं भी तुम्हे रोज़ कप भर,
तसल्ली से पियूंगीं

हर पल... हर पहर....
तुम्हे ही जियूंगीं

बस तुम ही तुम..

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आईने को देख,
चेहरा सोचता होगा...
पता नहीं क्या क्या दिखाता है.!!

और...चेहरे को देख,
आईना सोचता होगा...
पता नहीं क्या क्या छिपाता है.!!

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ख़्वाब" सी होती हैं..
कुछ "यादें"....

कुछ की "आँखों" में ही रहती
हैं...कुछ की "ज़िन्दगी" में