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आज एक नया ही नजारा देखा,
हमे खुश देख कईओ का चहेरा उतरते देखा

और क्या मांगु तुमसे

और क्या मांगु तुमसे,
अैसा लगता है सबकुछ पा लिया तुम्हे पाके,
अब और कुछ मांगने का मन हि नहि करता

तुममे वो हर रिश्ता पाया, जो मेने हमेशा मांगा था
तुम्हारे साथ वो हर खुशी मिली, जो मेने हमेशा चाही थी
तुम्हारे साथ वो हर पल जिया, जो मेने हमेशा जिना चाहा था
तुम्हारे साथ रह कर वो सबकुछ पाया, जो मेने हमेशा पाना चाहा था

और क्या कहु तुम्हारे बारे मे,
कहने के लिए लफ़्ञ कम पड रहे है

तुम्हारी हर बात पर प्यार आता है
तुम्हारा, मेरे लिए सबकुछ करना,
तुम्हारा, मेरे लिए इन्तजार करना,
तुम्हारा, मुजे मनाने के लिए उठक बेठक करना,
तुम्हारा, मेरे लिए आधी रात को आइस क्रीम लाना,
तुम्हारा, मेरी खुशी के लिऐ ना चाहते हुऐ भी शोपिंग के लिऐ आना,
तुम्हारा, मेरी हर छोटी बडी बातो को याद रखना

और क्या मांगु तुमसे,
आज तक जो भी पाया शायद उसके भी लायक नहि हु मे

तुम्हे पाने के लिऐ इस,
दुनिया, परिवार, यहा तक कि भगवान से भी लड गइ

आज जितने के बाद लगता है,
हार-जित का तो कोइ मतलब हि नहि,
बस प्यार ही प्यार है

और क्या मांगु तुमसे

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बस मे नहि



सोचा था तुम्हे हमेशा अपने पास रखू,

अपनी हाथो कि लकीरों मे बसा के रखू,

पर लकिरों मे बसी तकदीर कहा अपने बस मे होती हे



जैसे प्यार करना और उसे पाना हर बार हमारे बस मे नहि होता,

जैसे कहने को तो हम बहोत सी बाते सोचते हे पर कभीभी उन बातो पर हमारा बस नहि होता,

जैसे करने का तो हम सबकुछ सोचते हे पर सबकुछ करना हमारे बसमे नहि होता,



बस हमारे रिश्तेका भी कुछ ऐसा ही हे,

कहने को तो हम दोनो इसमे बंधे हे पर एक बंधन मे कभी नहि बंध सकते



शायद इस रिश्ते को बनाना और संजोना हमारे बसमे था,

पर इसे हमेशा के लिए बनाए रखना हमारे बस मे नहि

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