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Kedar manjare बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 साल पहले

#Kavyotsav


शोर- ए -बाझार में
खामोशी से गुजरे
कंधे पे लहरती
शबनम जो सवारे
शायद वो शायर था
जेब पर मेडलसा पेन
फिकी सी कमिज
स्याही से महकते
आदब और तमिज
शायद वो शायर था
फरोख्तों के भीड में
सासों करे गहरे
पुरानी किताबों के
पास जो ठहरे
शायद वो शायर था
बाझार की तलाशी कर
चाय की ठेले पें रुकें
होठों सें लगाय ग्लास
नजर भिझुक पर थमें
शायद वो शायर था
चाय को सौपे
भिझुक के हाथो में
पैसे दिये चाय कें
खुशी झलकी बातों में
शायद वो दर्द का खरीददार था

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Kedar manjare बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 साल पहले

#kavyostav

मंझर खुब है पर जहाँ अभी बाकी है
जुबाने है पर हम-ज़बाँ अभी बाकी है

कुछ ख्वाईशें मुद्दत सें सिकुड पडी है
शायद मुकर्रर आसमाँ अभी बाकी है

देखी सुनी है दुनिया भर की खुदाई
रूहानी हो ऐैसे निशाँ अभी बाकी है

ठहरी है फितरत जमी हुई बर्फ जैसे
पिघले जो ऐैसी रवाँ अभी बाकी है

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Kedar manjare बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
2 साल पहले

#kavyotsav

रह की किश्तों में उलझी हुई हस्ती है
धूप में बारीश ने की मौका परस्ती है

गिरा दे वो बुंदे भिगा दे जिस्मो जान
हिल जाऐ पुर्जे जो लगे मौत सस्ती है

मत भेजना इन जीवों के जाल में
उतरी है जो इन्सानियत की मस्ती है

इधर का हूँ ही नही ना है मेरा ठिकाना
कुनबा है अलग मेरा जुदा मेरी बस्ती है

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