पढ़ने का शौक लेखन तक ले आया ।पहले कुछ लेख और कविताएं लिखीं लेकिन कल्पनाओं की उड़ान जल्दी ही कहानियों तक ले आई । दोस्तों ने प्रेरित किया और पहला कहानी संग्रह परछाइयों के उजाले आया जिसे बहुत प्रशंसा मिली । इसके बाद आया उपन्यास छूटी गलियाँ जो अब मातृभारती पर भी उपलब्ध है । एक अन्य कहानी संग्रह कछु अकथ कहानी की कुछ कहानियाँ भी आप मातृभारती पर पढ़ सकते हैं । शीघ्र ही एक साझा उपन्यास देह की दहलीज पर लेकर आ रही हूँ मातृभारती पर ।

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1 दिन पहले

ये सभ्य मानव समाज की कशमकश है कि देह की भाषा और अभिलाषा को अभिव्यक्त नहीं कर पाते। जबकि पेट की तरह देह की भी भूख होती है और उसके पूरे न होने पर मन के रिश्ते भी दरकने लगते हैं।
क्या होता है सुयोग और प्रिया के रिश्ते का क्या सुयोग प्रिया से दूरी के समाधान में शालिनी से नजदीकियां बढ़ाता है?
क्या सभ्यता के दायरे में ऐसे रिश्ते पनप सकते हैं? जानने के लिए पढ़ें उपन्यास देह की दहलीज पर

Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 7" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19885225/deh-ki-dahleez-par-7
#सभ्य

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1 दिन पहले

मुकुल की उपेक्षा से कामिनी समझ नहीं पा रही थी कि वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है ? उसने अपनी दोस्त नीलम से इसका जिक्र किया। कामिनी की परेशानी नीलम को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है। वहीँ अरोरा अंकल आंटी हैं जो इस उम्र में भी एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। रविवार के दिन राकेश सुबह से मूड में था और नीलम उससे बचने की कोशिश में। एक सितार के दो तार अलग अलग सुर में कब तक बंध सकते हैं। मुकुल अपनी अक्षमता पर खुद चिंतित है वह समझ नहीं पा रहा है कि उसके साथ ऐसा क्या हो रहा है ? कामिनी की सोसाइटी में रहने वाला सुयोग अपनी पत्नी प्रिया से दूर रहता है। ऑफिस से घर आनेके बाद अकेलापन उसे भर देता है। उसी सोसाइटी में रहने वाली शालिनी अपने प्रेमी अभय की मौत के बाद अकेले रहती है। वह अपने आप को पार्टी म्यूजिक से बहलाती है लेकिन अकेलापन उसे भी खाता है।
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2 दिन पहले

डेढ़ साल लगा उसे खुद को जैसे-तैसे संभालने में लेकिन अभय को दिया वादा पूरा नहीं कर पाई। अभय ने भी कहाँ अपना वादा निभाया था चला गया उसे छोड़कर। फिर वही क्यों निभाए अपना वादा। तब से इस शहर में अकेली है। मम्मी पापा शादी के लिए कह कह कर हार गए फिर बमुश्किल एक फ्लैट लेने के लिए उसे तैयार किया। 29 साल की हो गई है अब वह नौकरी में व्यस्त खूब खुश दिखाई देती है लेकिन कोई नहीं जानता रात के अंधेरे में दो अदृश्य बाहें उसे जकड़ लेती हैं। उसका शरीर उसमें कसमसाता है।
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3 दिन पहले

पार्क में अचानक सुनी गई बातों ने मिस्टर सहाय को बैचेन कर दिया और उन्होंने उनकी मदद करने का सोच लिया। क्या आसान है ऐसे बच्चे की मदद करना जिसके पिता उसे छोड़ कर जा चुके हैं और उसकी मम्मी ने उसे अब तक यह बात नहीं बताई है?
कैसे शुरू होता है मदद का सिलसिला और उस चक्रव्यूह में कैसे फंसते जाते हैं सहाय और नेहा? क्या आसान होता है उससे निकलना या वे और फंसते जाते हैं उसमें?
आखिर सहाय क्यों मदद करना चाहते हैं नेहा और राहुल की? क्या मकसद होता है उनका?
जानने के लिए पढ़ें उपन्यास छूटी गलियाँ

Kavita Verma लिखित उपन्यास "छूटी गलियाँ" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/novels/5199/chooti-galiya-by-kavita-verma

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3 दिन पहले

Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19884120/deh-ki-dahleez-par-1

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4 दिन पहले

कामिनी और मुकुल के बीच दूरी क्यों है क्यों है यह गफलत इस के पर्दाफाश की हो चुकी है शुरुआत।
जल्दी ही अन्य पात्रों के कशमकश आएंगे सामने।
पढते रहिये
Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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#शुरुआत

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4 दिन पहले

मुकुल क्यों रहता था कामिनी से दूर यह राज तो पाठकों पर खुल गया लेकिन क्या वह कामिनी को बता पाएगा?
क्या करेगी कामिनी जो इस समय जीवन की उमंगों से भरी हुई है जब जानेगी कि मुकुल अपनी शक्ति खो रहा है?
राकेश और नीलम के बीच क्या होगा? और क्या सुयोग प्रिया और शालिनी के बीच ट्राई एंगल बनने वाला है?
कुछ पात्रों की किताब के पन्ने खुले हैं तो कुछ फड़फड़ा रहे हैं पढे जाने के लिए।
जानने के लिए पढ़ें उपन्यास देह की दहलीज पर

Kavita Verma लिखित कहानी "देह की दहलीज पर - 11" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19886036/deh-ki-dahleez-par-11

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6 दिन पहले

मुकुल की उपेक्षा से कामिनी समझ नहीं पा रही थी कि वह ऐसा व्यवहार क्यों कर रहा है ? उसने अपनी दोस्त नीलम से इसका जिक्र किया। कामिनी की परेशानी नीलम को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है। वहीँ अरोरा अंकल आंटी हैं जो इस उम्र में भी एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। मुकुल अपनी अक्षमता पर खुद चिंतित है वह समझ नहीं पा रहा है कि उसके साथ ऐसा क्या हो रहा है ? कामिनी की सोसाइटी में रहने वाला सुयोग अपनी पत्नी प्रिया से दूर रहता है। ऑफिस से घर आनेके बाद अकेलापन उसे भर देता है। उसी सोसाइटी में रहने वाली शालिनी अपने प्रेमी अभय की मौत के बाद अकेले रहती है। वह अपने आप को पार्टी म्यूजिक से बहलाती है लेकिन अकेलापन उसे भी खाता है। वह अकेले उससे जूझती है। कामिनी का मुकुल को लेकर शक गहरा होता जाता है और उनके बीच का झगड़ा कमरे की सीमा पार कर घर के अन्य सदस्यों को भी हैरान कर देता है।
पढ़ें उपन्यास देह की दहलीज पर

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https://www.matrubharti.com/book/19884120/deh-ki-dahleez-par-1

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1 सप्ताह पहले

#देह_की_दहलीज_पर

क्यों और कैसे दिल के रिश्ते देह की दहलीज़ पर आकर दरकने लगते हैं? जानने के लिए आज शाम छः बजे मातृभारती पोर्टल पर पढ़िए उपन्यास की दसवीं कड़ी....!
इतने दिनों से जब्त भावनाएँ जब बाँध तोड़कर उमड़ी, तो उसमें अतृप्ति, आक्रोश, शक और अपनी उपेक्षा से उपजे तनाव के साथ उसके आँसू भी शामिल हो गए। उसे होश नहीं रहा कि कब उनका प्यार और आपसी समझ इन शब्दबाणों से घायल हो पीछे दुबक गए और गुस्से, क्षोभ और शर्म की आवाज़ें दरवाजे की सीमा से बाहर निकल गईं। कामिनी हतप्रभ थी, उसने खुद को इतना असहाय कभी महसूस नहीं किया था... पति के किसी और के साथ होने की कल्पना मात्र से वह बेचैन थी। शक जब तक मन में हो, खुद को व्यथित करता है, जब जाहिर हो जाता है, तो खुद का यकीन बनकर दूसरे को व्यथित करता है। अभी तो उसके मन में कहीं एक दुबकी सी आशा की डोर थी कि शायद यह उसका वहम हो, किन्तु आज के बाद क्या यह सिर्फ वहम रह पाएगा। यदि वाकई कोई और होगी तो अब मुकुल क्या करेंगे। यह प्रश्न भी उसे मथ रहा था। दूसरी तरफ मुकुल कामिनी के आरोप से बिंधे अपने दिल के टुकड़ों को समेटने की कोशिश कर रहा था। यह एकदम अप्रत्याशित था। तीर तरकश से निकल चुका था... कामिनी और मुकुल तो घायल हुए ही थे, एक शीशा दरक गया था... उनके विश्वास का, उनकी खुशी का और उसकी किरचें दूर तक छिटक कर तीन जोड़ी आँखों में उभरते प्रश्नों और चिंताओं को भी इस टूटन में शामिल कर चुकी थीं।
-डॉ वन्दना गुप्ता

-- Dr. Vandana Gupta

https://www.matrubharti.com/bites/111451978

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1 सप्ताह पहले

देह की बैचेनी ने कामिनी को निराश कर दिया वहीं राकेश के उफनते अरमानों ने नीलम को परेशान कर दिया है। उसे बार बार टालना उसमें गिल्ट पैदा कर रहा है वहीं मुकुल अपनी भावनाओं को व्यक्त ही नहीं कर पा रहा है। सुयोग और प्रिया दूर रहते रहते सामीप्य के अभाव से हताश हो रहे हैं वहीं शालिनी दोस्तों के साथ म्यूजिक मस्ती और पार्टी के बावजूद भी अकेली है। स्याह रातों का अकेलापन दूर करने का जो तरीका उसने अपनाया है क्या वह ठीक है?
पार्टी में मुकुल कामिनी की जोड़ी सबके आकर्षण का केंद्र है और सभी की तारीफें मुकुल के साथ डांस कामिनी की हसरतों को जगा रहे हैं क्या होता है उन हसरतों का? क्या दोनों के बीच वो नजदीकियां कायम हो पाती हैं?
तीस साल के युवा से लेकर पचास साला जोड़े तक के रिश्ते देह की दहलीज पर क्या रंग लेते हैं जानने के लिए पढ़ें उपन्यास
देह की दहलीज पर

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