M.sc(chemistry),B.Ed प्रिय दोस्तों, रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में पता नहीं ऐसा कौन सा केमिकल रिएक्शन हुआ कि मैं साहित्य का हो गया।अब साहित्य लिखता हूँ, साहित्य गाता हूँ और साहित्य जीता हूँ। तो दोस्तों, जिंदगी एक उपवन है और हम सब उसके फूल, खुद महकें और दूसरों को भी महकाएं।। धन्यवाद, राकेश सागर

जिन राहों में काटें हैं,
अब फूल खिलाने ही होंगे,
उन अंधियारी गलियों में,
अब दीप जलाने ही होंगे,
फेंको ईर्ष्या हवन कुण्ड में,
सब हैं एक समान,
प्रेम सरस् रस पी ले प्राणी,
ईश्वर का वरदान।।
-राकेश सागर

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नागफनी के कांटे जो घाटी में हैं मुरझायेंगे,
फिर से फूल खिलेंगे भौरे गीत प्रेम के गाएंगे,
सच होंगे आंखों के सपने,
होगा सुखद विहान,
प्रेम सरस् रस पी ले प्राणी,
ईश्वर का वरदान
-राकेश सागर

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तुम्हीं से प्यार करता हूँ...

हर घड़ी तुमको गाता हूँ

मेरी खुशियों की चादर भी,
तू उनको सौंप दे ईश्वर,
कफ़न हैं बांध के निकले,
वो माँ के मस्त दीवाने,
भला कैसे चुकाएंगे,
है उनका कर्ज जो हमपर,
बदौलत उनकी किलकारी है गूँजी द्वार दालाने।
-राकेश सागर

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जो कहते हो हमसे,
मुहब्बत नहीं है,
यहाँ बैठने की इजाजत नहीं है,
तो सुन लो कभी तुम इशारा करोगे,
इन आँखों से रस्ता निहारा करोगे।
-राकेश सागर

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