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#kavyostav -2. #प्रेरणादायक "धरती" "धरती"

कल बुलाया आज बुलाया,
धरती ने हम सब को बुलाया,

क्या किया है आज तुने,
पापी को दुर करने,
कल बुलाया आज बुलाया..........

क्या किया है आज तुने,
प्रदुषण को दुर करने,
कल बुलाया आज बुलाया.......

क्या किया है आज तुने,
अधर्म को दुर करने,

मांग रहा है हिसाब आज,
क्या किया है तुने आज,

संभल कर चलो आज,
पर्यावरण को शुद्ध करो आज,

सत्य को मुक्त करो आज,
श्रम का उद्यान करो आज,

नई बात शीखो आज,
विश्व का कल्याण करो आज,

कल बुलाया आज बुलाया,
धरती ने हम सबको बुलाया,.........

- कौशिक दवे

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#kavyostav -2. "सुख की तलाश में"

मिला मुझे बंगला गाड़ी,
लगा की मुझे सुख मिला,

यह पाने की भागदौड़ में,
न मुझे शुकुन मिला,

ना मिली चैन की नींद,
ना निकाला परिवार का टाईम,

मशीन शा बन गया मैं,
निकला मैं सुख की तलाश में,

आखिर एक बच्चे ने सीखाया,
आनन्द लो, आनन्द दो,

गौ ओ में देखा,पंखिओ में देखा,
मासुम बच्चों में देखा,

देने में जो आनंद है,
आनन्द का मजा लेते देखा,

खत्म न हुईं सुख की तलाश,
आज आनंद से जीना सीखा।

- कौशिक दवे

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આદર્શ નામ રાખી ખોટું કામ કરતો, કલયુગ ની માયા માં ફસતો, પૂનમ ના ચંદ્રે આ બધું જોતાં, રોજ રોજ અમાસ નો થાતો,. નારદ ની રાહ માં આજ નો વાલિયો, મરા મરા આજ થાતો, અમાસ ના અંધારા માં આજ નો માનવી, કોન્ટેક્ટ લેસ થઈ રહેતો. -- કવિ- કૌશિક દવે

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