I am reading , writing on matrubharti .......

Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कहानी
7 दिन पहले
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कहानी
3 सप्ताह पहले

एक इलाके में एक भले आदमी का देहांत हो गया लोग अर्थी ले जाने को तैयार हुये और जब उठाकर श्मशान ले जाने लगे तो एक आदमी आगे आया और अर्थी का एक पाऊं पकड़ लिया। और बोला के मरने वाले से मेरे 15 लाख लेने है, पहले मुझे पैसे दो फिर उसको जाने दूंगा।
अब तमाम लोग खड़े तमाशा देख रहे है, बेटों ने कहा के मरने वाले ने हमें तो कोई ऐसी बात नही की के वह कर्जदार है, इसलिए हम नही दे सकतें मृतक के भाइयों ने कहा के जब बेटे जिम्मेदार नही तो हम क्यों दें।
अब सारे खड़े है और उसने अर्थी पकड़ी हुई है, जब काफ़ी देर गुज़र गई तो बात घर की औरतों तक भी पहुंच गई। मरने वाले कि एकलौती बेटी ने जब बात सुनी तो फौरन अपना सारा ज़ेवर उतारा और अपनी सारी नक़द रकम जमा करके उस आदमी के लिए भिजवा दी और कहा के भगवान के लिए ये रकम और ज़ेवर बेच के उसकी रकम रखो और मेरे पिताजी की अंतिम यात्रा को ना रोको।
मैं मरने से पहले सारा कर्ज़ अदा कर दूंगी। और बाकी रकम का जल्दी बंदोबस्त कर दूंगी। अब वह अर्थी पकड़ने वाला शख्स खड़ा हुआ और सारे लोगो से मुखातिब हो कर बोला: असल बात ये है मरने वाले से 15 लाख लेना नही बल्के उनके देना है और उनके किसी वारिस को में जानता नही था तो मैने ये खेल खेला , अब मुझे पता चल चुका है के उसकी वारिस एक बेटी है और उसका कोई बेटा या भाई नही है।

👌🏻👌🏻मत मारो तुम कोख में इसको
इसे सुंदर जग में आने दो,
छोड़ो तुम अपनी सोच ये छोटी

इक माँ को ख़ुशी मनाने दो,
बेटी के आने पर अब तुम
घी के दिये जलाओ,
आज ये संदेशा पूरे जग में फैलाओ
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय दिन है,
तो एक समय रात ।
एक समय बारिश है ,
तो एक समय अकाल ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय पुत्र है,
तो एक समय पिता ।
जहाँ एक समय कष्ट है,
तो एक समय आराम ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

जहाँ एक समय दोस्त है ,
तो एक समय दुश्मन ।
जहाँ एक समय अपने है,
तो एक समय पराये ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

गिन के मिले है दो पल,
क्या किसी से दुश्मनी ।
क्या किसी से शिकवा,
छोड़कर सारे अहंकार ।।

ऐसे जियो इस पल को ,
जो करे दूसरो का उपकार ।
ताकि याद रखे दुनिया ,
चले जाने के बाद ।।

समझो जिन्दगी की ये परिभाषा

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
4 सप्ताह पहले

#बढ़ना
इस दुनिया में जन्म लेने का मतलब है कि सुख और दुख दोनों से सामना होना ।

चाहे सुख हो या दुख ,
चाहे अपने या पराये साथ में हो या ना हो
जो भी है हमारे पास
उस में संतुस्ट रहकर
हमेशा अपने कर्तव्य पर आगे बढ़ते रहना चाहिए
इसी का नाम जिंदगी है

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी विचार
4 सप्ताह पहले

जीवन में सफलता के लिए
धीरज को परममित्र, अनुभव को सलाहकार, सावधानी को बड़ा भाई और आशा को अपना संरक्षक बना लीजिये।
सफलता जरूर मिलेगी।
जीवन सिर्फ वर्तमान में है, अतः वर्तमान को क्रियाशील रखें।

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

ज़रा सा सब्र मेरे मन
आने वाला है सुनहरा कल,
न जायेगी मेहनत व्यर्थ,
फिर से होगें कर्मरत ,
धुसीर होगें मग के कंटक,
ज़रा-------------मेरे मन।
प्रतीक्षा की शिद्द्त से,
पल-पल वह स्वर्णिम क्षण का
आगमन होने वाला है,
होगें दीप प्रज्वलित उजाले के,
ज़रा----------------मेरे मन।
राष्ट्र देदीप्यमान होगा जगत में,
लहराएगा परचम विश्व में,
खिल उठेगें उर सभी के,
स्मरण कर बेला भावी की,
कुसुमित हो उठता है तन,
आने वाला है सुनहरा कल,
ज़रा सा सब्र मेरे मन।

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया English विचार
4 सप्ताह पहले

Change your thought , and you change your destiny .

Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया English प्रेरक
4 सप्ताह पहले

The treasure house is within you . Look within for the answer to your heart's desire .

Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कहानी
1 महीना पहले

*एक याद*
कभी नेनुआ (तुरई)टाटी(छप्पर) पर चढ़ के रसोई के दो महीने का इंतज़ाम कर देता था। कभी खपरैल की छत पर चढ़ी लौकी महीना भर निकाल देती थी। कभी बैसाख में दाल और भतुआ(पेठा) से बनाई सूखी कोहड़ौरी (बड़ी) सावन-भादो की सब्जी का खर्चा निकाल देती थी‌।
वो दिन थे जब सब्जी पर खर्चा पता तक नहीं चलता था। देशी टमाटर और मूली जाड़े के सीजन में भौकाल के साथ आते थे लेकिन खिचड़ी आते-आते उनकी इज्जत घर-जमाई जैसी हो जाती थी। तब जीडीपी का अंकगणितीय करिश्मा नहीं था। ये सब्जियाँ सर्वसुलभ और हर रसोई का हिस्सा थीं। लोहे की कड़ाही में किसी के घर रसेदार सब्जी पके, तो गाँव के डीह बाबा(स्थानीय देवता) तक गमक जाती थी। संझा को रेडियो पर चौपाल और आकाशवाणी के सुलझे हुए समाचारों से दिन रुखसत लेता था। रातें बड़ी होती थीं। दुआर पर कोई पुरनिया (बुजुर्ग) आल्हा छेड़ देता था तो मानों कोई सिनेमा चल गया हो। किसान लोगों में कर्ज का फैशन नहीं था। फिर बच्चे बड़े होने लगे.. बच्चियाँ भी बड़ी होने लगीं। बच्चे सरकारी नौकरी पाते ही अंग्रेजी इत्र लगाने लगे। बच्चियों के पापा सरकारी नौकरी वाले दामाद में नारायण का रूप देखने लगे।
अब दीवाने किसान अपनी बेटियों के लिए खेत बेचने के लिए तैयार थे। बेटी गाँव से रुखसत हुई.. पापा का कान पेरने वाला रेडियो, साजन की टाटा स्काई वाली एलईडी के सामने फीका पड़ चुका था। अब आँगन में नेनुआ का बीया छीटकर मड़ई पर उसकी लताएँ चढ़ाने वाली बिटिया पिया के ढाई बीएचके की बालकनी के गमले में पौधे लगाने लगी, और सब्जियाँ मंहँगी हो गईं।
बहुत पुरानी यादें ताज़ा हो गयीं। सच में उस समय सब्जी पर कुछ भी खर्च नहीं हो पाता था। जिसके पास नहीं होता उसका भी काम चल जाता था। दही-मट्ठा का भरमार था। सबका काम चलता था। मटर, गन्ना, गुड़ सबके लिए इफरात रहता था। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि आपसी मनमुटाव रहते हुए भी अगाध प्रेम रहता था। आज हर आदमी एक दूसरे को शंका की निगाह से देख रहा है।

और पढ़े
Kalyan Singh बाइट्स पर पोस्ट किया गया English विचार
1 महीना पहले

" Goodwill is nothing more than probability that old customer will resort to the old place . "