पिता- श्री हनुमान प्रसाद शिवहरे माता- श्रीमती गणेशी शिवहरे -शासकीय शिक्षक -लेखक/कवि/गीतकार (सहायक अध्यापक शा प्रा वि सुरतिपुरा चोरल महू इन्दौर मध्यप्रदेश) जन्म दिनांक- 17/07/1984 (इंदौर) शिक्षा- एम ए (संस्कृत) पुस्तक- 1) सात कहानियां 2) दिल ये पगला कहीं का ( कहानी संग्रह) 3) माॅमस् मैरिज-प्यार की उमंग ( उपन्यास /धारावाहिक) (पाण्डुलिपी) मंचीय कवि। आकाशवाणी इंदौर मध्यप्रदेश में दो बार काव्यपाठ। दूरदर्शन मध्यप्रदेश भोपाल के 'काव्यांजली' पर काव्यपाठ। 177 इंदिरा एकता नगर पुर्व रिंग रोड मुसाखेड़ी इंदौर मध्यप्रदेश पिनकोड- 452001 मोबाइल फोन नंबर 8770870151

Jitendra Shivhare verified कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
9 महीना पहले

सुहाग सेज

शादी के जोड़े में संवर कर
वह सुहाग सेज पर बैठी थी
चुपचाप और खोई-खोई
स्वप्न में साजन मुस्कुरा रहे थे
वह भी अधरों पर मुस्कान लिये
प्रतिक्षा में थी अपने प्रियतम की
फूलों की महक शरीर में ताज़गी
भर जाती
दिवारों से शरम आ रही थी उसे
तस्वीरें जैसे उसे ही देख रही हो
वो फुलदान उसका उपहाज उड़ाने लगा
वह गिलास भी था मेज़ पर रखा हुआ
जिसमें बादाम पिस्ता युक्त दुध था
वह सेज को हाथों से छुती
अनुभव का अनुमान करती
उसे मार गिराने की सभी व्यवस्था थी वहां
कुछ प्रयत्न तो उसे भी करने होंगे
समझनी होगी प्रिय की अभिलाषाएं
पुरी करनी होगी अपनी हर एक आस
उठकर उसने टीवी को कपड़े से ढक दिया
दिवार घड़ी को पलट दिया
उनका मिलन कोई न देखे
कोई न सुने प्रेमानंदित कर देने वाले शब्दों को
यही तो चाहती थी वह
बार-बार आईने में खुद को निहारती
उसका सौन्दर्य केवल साजन के लिए था
जो व्याकुल था उनकी बाहों में समां जाने को
दरवाजे पर आहट थी
पर सहम गयी वो
धड़कने तीव्र हो गयी
सांसे भागने को आतुर थी
जो जाना चाहती थी एक लम्बे सफ़र पर
आइना ढककर वह सेज पर पुनः बैठ गयी
प्रियतम का वो पहला स्पर्श
कैसे बखान करे?
उस अनोखे अहसास का
आत्मा से आत्मा के मिलन का
शरीर से शरीर के गठबंधन का
साजन की इच्छाएं अलग थी
मोबाइल की वीडियो ऑन थी
दुल्हन छिटकर दुर जा गिरी
उसकी न में दंभ था उसके स्वाभिमान का
वह वीरांगना की भांति तन कर खड़ी थी
लोहा लेने को एक दम तैयार
आंखों की ज्वाला भस्म करने को लालायित थी
चण्डी रूप का तेज वह सह न सका
उसका साफ इंकार था जानकर
प्रियतम ठिठक गये
जग हंसाई के भय ने हाथ जुड़वा दिये
क्षमाप्रार्थी था वह पैरों में गिरकर
पहली भूल ही अंतिम होगी
इसका वचन लिया लाडो ने
निजी पल कभी सार्वजनिक नहीं होंगे
इस बात का ख़याल दोनों को रखना होगा
सुहाग सेज का मूल्य कम न हो
दोनों का परस्पर प्रेम कम न हो
प्रेम का अनादर कदापि न हो
प्रेम की पुजा करे
प्रेम को सबकुछ जाने
और माने
क्योंकि सच्चा प्रेम ईश्वर की आराधना से
कम नहीं।


जितेन्द्र शिवहरे इंदौर मध्यप्रदेश

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