Hey, I am reading on Matrubharti!

खुलती जुल्फों ने सिखाई मौसमों को शायरी,
झुकती आँखों ने बताया मैकशी क्या चीज़ है....

ताबीज बना के पहनू उसे, आयत की तरह मिल जाए कहीं.....

बीती बातें याद आती हैं, जब अकेला होता हूँ मैं.....

साथ देती परछाइयाँ,और मेहरबाँ हो रहे ग़म..

तू है दवा या दर्द है,पर है मेरा ये तय है