"પ્રેમ ભરી પ્રકૃતિ એ જ મારી વ્યક્તિત્વ ભરી આકૃતિ"

रंगों के भेद को जानने मे
कहि तू मन का मेल खो न दे..!
पूरे जहां की परवाह में
कहि खुद को गिरवे न रख दे..!
क्या था..क्या बन गया कि सोच में
क्या है वो भूल न जाए..!
समय के इस चक्र में गिन गिन एक क्षण को
कहि जीने को भूल न जाई।

-Hina modha.

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आशिकी महज़ एक बंदगी
और आशिक अपना खुदा!

-Hina modha.

इश्क का अजीब सा रंग,
न तेरे जैसा न मेरे..!
फिर भी रंगे एकदूजे को,
कुछ एक से अनोखे रंग में।

-Hina modha

कुछ रिस्तो का नमक ही दूरी है 
नही मिलना भी जरूरी है।

 -irshad kamil

तू है तो कुछ है
तू नही तो भी सब है।
पर तेरे साथ कुछ अलग ही है।। 

न जाने क्यों मेरे हर नज़्म तेरे साथ शुरू होते है और तेरे साथ ही खत्म। 
ख्वाबों खयालो में तू अचूक होता ही हैं...क्योकि मेरे ख्वाब ही तेरे साथ ओर तेरी वजह से तो आते है।

वो समंदर की लहरें, सूरज की किरण,ओस की पहेली बून्द,पहेली बारिश सब मे तुझको पाती हु। क्योंकि तू और में जुदा ही कब थे!

 बस तू है तो इश्क है..इश्क है तो में हु..और ये हमारे इश्क से छुपी हैं ...तेरी मेरी इश्किया..!

 -Hina

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