Hey, I am reading on Matrubharti!

जख्म दिखते कम पर चुभते ज्यादा है

हेमांगी

गलतफहमी ओ का सिलसिला क्या खूब बढा
की हर सही कही बात भी गलत लगने लगी
हेमांगी

जरुरी नही की
अल्फाजे मुहब्बत लफ्जो में बयान हो
कभी कभी निगाहे पढनी भी
आना चाहिए जनाब
हेमांगी

प्यार ना दिल से होता है ,
ना दिमाग से होता है,
ये प्यार तो इत्तिफाक से होता है,
पर प्यार करके प्यार ही मिले,
ये इत्तिफाक किसी किसी के साथ होता है।
हेमांगी

और पढ़े

उम्र जेसे जेसे बढती है,
खूबसूरती और जवां होती है,
जूरीयां तो सिर्फ आंखो का वहेम है,
दिल में बसी सूरत को उम्र कहां छू ती है ।
हेमांगी

और पढ़े

नजर 'उनकी ' खंजर का काम करती है,
वो जब देखते है तो हम दिल को थाम लेते है,
ऐक ही बार में दिल के हो जाते है "टुकडे टुकडे"
दिल का हर टुकडा भी उन्ही का नाम लेता है ।
हेमांगी

और पढ़े

इश्क ऐसा करो की धड़कन में बस जाए,
सांस जब भी लो खूशबू उसीकी आऐ,
प्यार का नशा आंखो पर छा जाऐ,
बात कुछ भी ना हो पर होठो पे नाम उसी का आऐ।
हेमांगी

और पढ़े

कभी कभी बेवजह तुम वजह बन जाओ 'किसी ' के चहरे के "मुस्कान " की।
हेमांगी

इन्सान भी ना अजीब है
दूर रहे रिश्तो में अपनापन ढूंढता है
जो पास है उन्हीं से नजरे चुराता है
हेमांगी

छोडो भी, अब जाने दो!
पहले की "बात " में जो "बात " थी,
वो अबकी बार की "बात " मैंने वो "बात " कहां?
हेमांगी

और पढ़े