डॉ. हंसा दीप टोरंटो, कैनेडा हिन्दी में पीएच.डी., यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत। पूर्व में यॉर्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो में हिन्दी कोर्स डायरेक्टर एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक।  दो उपन्यास “कुबेर”, व “बंद मुट्ठी”, कहानी संग्रह “चश्मे अपने-अपने”, उपन्यास बंद मुट्ठी गुजराती में अनूदित। अद्यतन कहानी संग्रह “प्रवास में आसपास”। साझा संकलन “बारह चर्चित कहानियाँ”। वागर्थ, यथावत, कथाबिम्ब, भाषा, कथा समवेत, परिंदे, लहक, दुनिया इन दिनों, कथाक्रम, समहुत, सुख़नवर, शीतलवाणी, दस्तक टाइम्स, गंभीर समाचार, उदय सर्वोदय, चाणक्य वार्ता, विभोम स्वर, समावर्तन, गर्भनाल, सेतु, कालजयी, ककसाड़, साहित्य अमृत, विश्वगाथा, चेतना, हस्ताक्षर, साहित्य कुंज, श्री सर्वोत्तम (मराठी), पर्ण (मराठी), सुबह सवेरे आदि प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में हाल ही में कहानियाँ प्रकाशित। hansadeep8@gmail.com 1512-17 Anndale Drive, North York, Toronto, ON-M2N2W7 Canada + 647 213 1817

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4 दिन पहले
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5 दिन पहले

बादलों के बरसने के बाद जब कोरा आकाश शांत और निर्मल हो ठहर जाता है, सूरज की एक पतली-सी किरण टूट-टूट कर रंगों में बिखरने लगती है। वह भी कुछ ऐसी तरंगों में बँट जाना चाहती ताकि कोई इन्द्र धनुष रच सके। - केसरिया बालम

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7 दिन पहले

पुरुष की कमजोरी स्त्री और स्त्री की कमजोरी उसका डर, दोनों मिलकर सदियों से अपराधों की कहानियाँ लिखे जा रहे हैं।

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3 सप्ताह पहले

कुर्सी अकेली नहीं होती, उसके चार पैर, दो हाथ, मजबूत पीठ और गद्देदार बैठक होती है। ये सारे कुर्सी के उर्जे-पुर्जे कई चमचों की कतार खड़ी करने में माहिर होते हैं।

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3 सप्ताह पहले

चारों छोरों से अपने घर को धूप-हवा से बचाने की कोशिश करती रही, ढँकती रही वह सब कुछ, एक चादर बन कर। - केसरिया बालम

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3 सप्ताह पहले

कल बीत चुका था। आज वही हुआ जो रोज़ होता था। कल तो ‘कल’ ही रहेगा ‘आज’ कैसे हो सकता है। - वह सुबह कुछ और थी

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3 सप्ताह पहले

धरती कोई भी हो आदमी को पैसा तो चाहिए ही। पैसा पास में हो तो हर जमीन अपनी भी लगती है, हरी भी लगती है। - केसरिया बालम

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4 सप्ताह पहले

बचपन की गलियाँ कभी नहीं छूटतीं, छोड़ने के बाद भी मन में चलती हैं, मुड़ती हैं और यादों की धूल उड़ा जाती हैं।

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4 सप्ताह पहले
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4 सप्ताह पहले

जब प्रवी मुझे क्वीन एलीज़ाबेथ कहते हैं तो सचमुच मैं खुद को वहाँ पाने लगती हूँ। रानी तो रोज की कहानी हो जाती है पर क्वीन के साथ जो एलिज़ाबेथ शब्द जुड़ जाता है तो बकिंघम पैलेस की शानो-शौकत मेरे चेहरे-मोहरे से झलकने लग जाती है। #मुझसे कह कर तो जाते

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