I am reading on Matrubharti!

कारीगर हूं ,
शब्दों की मिट्टी से महफ़िल सजाता हूँ,

किसी को बेकार, किसी को लाजवाब नज़र आता हूं l

अपने दिल की सादगी पे रहम आता है मुझे,

मुस्कुरा के बात जिसने की उसी का हो गया ।

ना राख उड़ती है
ना धुआँ उठता है,

कुछ रिश्ते यूँ चुपचाप जला करते हैं l

तिनका हूँ तो क्या हुआ
वजूद है मेरा,

उड़ उड़ के हवा का
रुख तो बताता हूँ !

चालान का डर सबको है,

चाल चलन का किसी को नहीं l

लिखने के शौख से लोगोने हम पर हजार सवाल उठाए,

देख लाख पूछने पर भी हमने तेरा नाम अबतक छुपाये रखा है।

पसंद उसे कीजिये जो हमारे में परिवर्तन लाये वरना प्रभावित तो मदारी भी कर लेते हैं l

Happy Teachers Day

बेवजह दीवार पर इल्जाम है बंटवारे का,

कई लोग एक कमरे में भी अलग रहते हैं l

मोहब्बत की बेबसी आज कुछ इस कदर देखी,

उसने तस्वीर तो जलाई, पर राख नहीं फेंकीl

मोहब्बत की बेबसी आज कुछ इस कदर देखी,

उसने तस्वीर तो जलाई,
पर राख नहीं फेंकी।