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Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
9 घंटा पहले

सो जाईए हुजूर कि अब रात हो गई,
जो बात होने वाली थी वो बात हो गई।

अब कहने सुनने के लिए कुछ भी नहीं रहा,
बस इतना काफी है कि मुलाकात हो गई।
-जमील उस्मान

-Falguni Shah

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Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी प्रेरक
2 सप्ताह पहले

ज़िंदगी की किसी भी मायूसी की घड़ी में ख़ामोश मत रहेना दोस्त
पर
तुम
चिखना
चिल्लाना
तूटकर रो देना
खुद से ही बतियातें रहना
नये पुराने दोस्तों-यारों को घेरना
आईने और दिवारों से बातें करना
बहार खूली हवामें घूमना-टहलते रहना
किसकी ज़िंदगी तुम्हारे सहारे है ये याद करना
किताब, संगीत, ध्यान, कलम, भक्ति का सहारा लेना

कुछ भी करना
बस
तुम
मरना नहीं...
खुद कुशी
करके
-Falguni Shah ©
#World Suicide Prevention Day




ज़िंदगी की किसी भी मायूसी की घड़ी में ख़ामोश मत रहेना दोस्त
पर
तुम
चिखना
चिल्लाना
तूटकर रो देना
खुद से ही बतियातें रहना
नये पुराने दोस्तों-यारों को घेरना
आईने और दिवारों से बातें करना
बहार खूली हवामें घूमना-टहलते रहना
किसकी ज़िंदगी तुम्हारे सहारे है ये याद करना
किताब, संगीत, ध्यान, कलम, भक्ति का सहारा लेना

कुछ भी करना
बस
तुम
मरना नहीं...
खुद कुशी
करके
-Falguni Shah ©
#World Suicide Prevention Day

-Falguni Shah

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Falguni Shah લિખિત વાર્તા "અગોચર ને નમનાંજલિ" માતૃભારતી પર ફ્રી માં વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19895080/agochar-ne-namnanjali

Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
3 सप्ताह पहले

पनपते हैं ज़हन में कुछ एहसास

ठीक वैसे ही जैसे
वो आसमान कितना बड़ा है ना
पर
मुझे तो उतना ही उसे निहारना है
जितना
मैं अपनी खिड़की से निहार पाऊं
या फिर
वो आसमान
बाहर से मुझे जितना निहारना चाहे
-Falguni Shah ©

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Falguni Shah લિખિત વાર્તા "કલ્લુ" માતૃભારતી પર ફ્રી માં વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19894461/kallu

Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी कविता
4 सप्ताह पहले

पहचान
तुम मिले
तो कई जन्म 
मेरी नब्ज़ में धड़के
तो मेरी साँसों ने तुम्हारी साँसों का घूँट पिया
तब मस्तक में कई काल पलट गए--

एक गुफा हुआ करती थी 
जहाँ मैं थी और एक योगी
योगी ने जब बाजुओं में लेकर 
मेरी साँसों को छुआ 
तब अल्लाह क़सम!
यही महक थी जो उसके होठों से आई थी--
यह कैसी माया कैसी लीला
कि शायद तुम ही कभी वह योगी थे
या वही योगी है--
जो तुम्हारी सूरत में मेरे पास आया है 
और वही मैं हूँ... और वही महक है...
- अमृता प्रीतम
-Falguni Shah ©

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Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया ગુજરાતી प्रेरक
4 सप्ताह पहले

નવા જીવનની છોળો આવી છે. જીવનનો ગંભીર ધ્વનિ કાને પડ્યો છે. એક અદૃશ્ય હાથની ઇશારત હું મ્હારી સામે જોઈ રહ્યો છું - અને જવાબ આપું છું કે... આવું છું, આવું છું.

આજ લખ્યા જ કરું. મારા જીવનની એક નાની સરખી લીટી સમજાવવા આજ ઊલટાવી પલટાવીને લખ્યા જ કરું. પણ સ્પષ્ટ કરી નહિ શકું. હું જુદા દેશની વાણી બોલું છું. તમે એ ન પણ સમજી શકો.

અંધારું થતું જાય છે. ગોધૂલિનો વખત થઈ ગયો. વગડામાંથી પશુઓ પાછાં આવે છે. એના કંઠની ટોકરીનો ગંભીર અવાજ કાને પડે છે. મંદીરમાં ઝાલર વાગવા લાગી. હું પણ એકાદ-બે માસમાં પાછો આવું છું. ધરાઈને આવું છું. જીવનની આ ગોધૂલિને સમયે, અંધકાર ને પ્રકાશની મારામારીને વખતે, મારો ગોવાળ મને બોલાવી રહ્યો છે. હું રસ્તો નહિ ભૂલું. એના સાદને હું ઓળખું છું.

લિ. હું આવું છું.
-ઝવેરચંદ મેઘાણી
-રાષ્ટ્રીય શાયર
શ્રી ઝવેરચંદ મેઘાણીને
જન્મદિન નિમિત્તે સમર્પિત 💐
-Falguni Shah ©

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Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 महीना पहले

अक्षरों का मेला लगा था
मुझे बस ढ़ाई अक्षर पसंद आ ग‌ए

'दोस्ती'
-Falguni Shah ©

ફાલ્ગુની શાહ © દ્વારા લિખિત હોરર વાર્તા
https://www.matrubharti.com/book/19893204/silo

Falguni Shah कोट्स पर पोस्ट किया गया हिंदी शायरी
1 महीना पहले

टप टप गिरती है
बरसातें
वो पत्ते रोते है
देख बहार में
जीने वालों के भी
ग़म होते है
-गुलज़ार

#गुलज़ार साहब को जन्मदिन पर समर्पित 🌷

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