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जिसकी सजा
सिर्फ तुम हो
मुझे ऐसा कोई
गुनाह करना है

मुझे नशा है
तुम्हें याद करने का
और ये नशा मैं
सरेआम करता हूँ

इस तरह अपनी
आँखों में
कैद किया हैं तुम्हें . .
कोई और नज़र भर
देखे भी
तो अच्छा नहीं लगता . .

बड़ा गजब किरदार है
मोहब्बत का ,
अधूरी हो सकती है
पर ख़त्म नहीं . .

ख़्वाहिशों की चादर को मैं फिर से ओढ़ना चाहता हूँ ,
मैं बचपन की भूतवाली कहनियों से फिर से डरना चाहता हूँ ।

कुछ रिश्तें
किराये के मकान जैसे
होते हैं
कितना भी सजा लो
कभी अपने नहीं लगते . !

मुस्कुराने की आदत
इतनी महंगी पड़ी मुझको
भूला दिया सबने
यह कहकर कि तुम तो
अकेले भी खुश रह लेते हो . !

देख के उसके हाथों में मेहंदी दिल मेरा भर आया था ,
उस दिन ना जानें कहाँ उसने नाम मेरा छुपाया था
ओढ़ के चुनरी घर से उस दिन निकल थी जब वो
इश्क़ के दरिया में ना जाने कहाँ से आग का तूफ़ान आया था ।

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स्त्री सुंदर है
इसलिए प्रेम हुआ तो वह
वासना हुई ,
स्त्री से प्रेम हुआ
फिर वह सुंदर हुई
तो वह यकीनन प्रेम हुआ . !

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. अपनी बाहों में तुझे हर रोज मैं पाना चाहता हूँ ,
. ऐसा इक ख़्वाब है जो हर रोज़ मैं देखना चाहता हूं ।