ઈચ્છા એવી બિલકુલ નથી, કે વખાણ બધા જ કરે... પણ પ્રયત્ન એ જરુર છે, કે ખોટો છે એવુ કોઈ ના કહે...!

ढूँढ़ा उन्हें दिल में तो
लफ्ज़ो में मिले वो,
लिखा उन्हें कागज़ पर
तो अश्को में गिरे वो...

पीर लिखो तो मीरा जैसी
मिलन लिखो कुछ राधा सा,

दोनों ही हैं कुछ पूरे से
दोनों में ही वो आधा सा...

एक वक्त बदला, हर घडी दो दिल तुटे
सिर्फ दो पल बचे, एक हम एक तुम...





एक खत जला, यादो के दो ठिकाने जले
सिर्फ दो लफ्ज बचे, एक हम एक तुम...

और पढ़े

मैं हिन्दू, तु मुस्लिम
हिन्दू से मैं "ह" उठाऊ
तु मुस्लिम से "म"

फिर आ मिलकर हो जाए "हम"

माना की औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा पाया नहीं मैनें...

पर खुद गिरता-संभलता रहा
किसीको गिराया नहीं मैनें...

तमाम उलझनों के साथ रहते हैं,
कौन कहता है,हम अकेले रहते हैं...

मन ही बंदर
मन ही मदारी
नाच रहे है सब संसारी...

अर्जुन भीम युधिष्ठिर,
सारे समा गये इतिहास में...

पर

शकुनि वाले "पासे" अब भी है,
कुछ लोगो के पास में...

एक तमन्ना थी कि जिंदगी
रंग बिरंगी हो।।।

और दस्तूर देखिए जितने मिले गिरगिट ही मिले

हमारे एब तो उजागर है साहब...

फिक्र वो करे जिनके गुनाह पर्दे में है...

चलती हुई कहानियों के जवाब तो बहुत है मेरे पास...

लेकिन खत्म हुए किस्सों के लिए खामोशी ही बेहतर है...