ઈચ્છા એવી બિલકુલ નથી, કે વખાણ બધા જ કરે... પણ પ્રયત્ન એ જરુર છે, કે ખોટો છે એવુ કોઈ ના કહે...!

टूटता ही नहीं अब सितारा कोई,
तो कैसे कहे दे के मुराद क्या है...

पूछता ही नहीं अब सवाल कोई,
तो कैसे कहे दे के जवाब क्या है...

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किताब-ऐ-इश्क तुम बनो,

पन्नो पर मोहब्बत हम भर देंगे...

उम्र ने तलाशी ली,
तो जेब से लम्हे बारामत हुए...

कुछ गम के थे,
कुछ नम थे,कुछ टूटे...
बस कुछ ही सही सलामत मिले
"जो बचपन के थे"

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कल धूप से परेशां,
आज तकलीफ़ बारिश से...

शिकायतें बेशुमार है,
इंसान की आदत में...

शिकायतों को शब्द देना,
ये अपना अंदाज नहीं है...

आंखो से ज्यादा जो कह दे,
ऐसा कोई अल्फाज़ नहीं है...

खटखटाते रहिए दरवाज़ा एक दुसरे का...

मुलाकातें ना सही,
आहटे आती रहनी चाहिए...

भरी रहती है अंदर से,
कलम मुंह बंद रखती है...

मगर सब बोल देती है वो,
जब कागज़ को चखती है...

यह संसार एक "बंधन" है,
इसके अपने कुछ तंत्र है...

तो क्या हुआ गर बंधा हूँ मैं,
मेरे ख्याल तो "स्वतंत्र" है...

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कलम की नोक पे कहानी रखी है
मैंने इक ग़ज़ल तुम्हारे सानी रखी है
(सानी-equal)

तेरी इक तस्वीर है मेरी आँखों में
और बस यही इक निशानी रखी है

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सुखे फूल सी हैं हसरतें फिर भी क्यूँ
उम्मीद की शाख से टूटता नहीं हूँ...

ये वादों - कसमों को निभाना क्या है
मैं तो इक पल भी तुम्हें भूलता नहीं हूँ ...

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