કોણ કહે છે કે મારા લખેલ શબ્દો વ્યર્થ રહી ગયા, જયારે પણ મેં લખ્યું સૌ કોઈ ને પોતાના યાદ આવી ગયા..

अपने ख़ास तकिये को सरका,
मेरी बांह पर सर रख लिया उसने,

और मैं समझता था कि इज़हार के लिये लफ़्ज़ ज़रूरी हैं।

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इक रिश्ता बेनाम सा ...
चला थाम के हाथ ....!!
इक रिश्ता घुटता रहा ...
लेकर फेरे सात........!!!!

उसने कहा आप का परिचय ?

मैंने कहा #Posts पढ़ते रहिये, कहीं न कहीं हो जाएगा..

बस ...
एक ख्वाब
से चेहरे
को भूल जाना था.

इतना ..
हौसला पाने में
एक
उम्र गुजर गई...!!

"पायल" की खनक पे ही तो लुटा था 'दिल'....

क्या पता था कि 'कुचलना' उसका शौक है..!!

*​सी लिया लबों को ... इज़्ज़त का सवाल था,,,,,,,,​*

*​कुछ अपनी फिक्र थी...कुछ उनका ख़याल था....*

बेहद हसीं सा इक ख्वाब तैर रहा है आंखों में,

या रब मुक्कम्मल हो जाए आज ये मुलाकात उनसे...

*हमसे जलने वालों तुम भी क्या खूब करते हो...*


*महफिल तुम्हारी दोस्त तुम्हारे और बाते हमारी करते हो...!!!*

*उस हँसती हुई तस्वीर को आख़िर क्या मा'लूम..!!*
*कि यारो उसको देख कर कितना रोया जाता है..!!*
*

यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..

तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ