दीपक बुंदेला लेखक, निर्माता-निर्देशक टीवी सीरियल लेखन और एसोसिएट डायरेक्टर (मिले सुर मेरा तुम्हारा, भक्ति सागर, गज़ल स्पेसल, फ़िल्मी चक्कर, चाणक्य, टीपू सुल्तान, जय हनुमान, विवाह, अजीब और भाभी ) वीडियो सांग डायरेक्शन (मेड इन इंडिया, ठंडा ठंडा पानी, तेरे बालों में मोती पिरो दू, एक लड़की प्यारी प्यारी लग भाग 200गानों का फिल्मांकन और नए लोगों को इंटरडूस किया ) फीचर फ़िल्म- इन क्रिएटिब डायरेक्टर (लाल दुपट्टा मल मल का, जीना तेरी गली में, सूर्य पुत्र शनि देव, माँ वैष्णों देवी, बेबफा सनम. वर्तमान में

ये मोहब्बत भी कितनी खुदगर्ज निकली
आज यहां से निकली
कल वहां से निकली

आंसू पी कर जो मुस्कुराये
वहीं ज़माने को जीत पाए... !

किसी के लिए तुम हो तो किसी के लिए खुदा हैं
मेरे लिए ना तुम हो और ना खुदा हैं

जिन्हे वक़्त की इज़्ज़त होती हैं
वो कभी भी वक्त को नहीं कोसते
ऐसे लोग कभी वक़्त को दोस्त बना लेते हैं, तो कभी दुश्मन
और ज्ञान देते हैं वक़्त इंसान को बदल देता हैं

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ज़िन्दगी बेताब हुई इश्क़ की फरमाइश में
यहां तो बेचैनियों का मज़मा पहले से ही लगा हैं

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मन तो बात करने का करता हैं..
पर डरता हूं कोई बेज़्ज़ती नहीं कर दें..

लम्हों की तितलियाँ
क्यों पकड़ में नहीं आतीं।
#लम्हे #collab #yqdidi #YourQuoteAndMine
Collaborating with YourQuote Didi

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