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    अब नहीं सहुंगी... - भाग 7
    by Sayra Khan
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    अनुज ने कहा अपने घर कॉल कर के बोल दो हम एक दिन ओर रुकने वाले है शैली ने कहा सिर हम अभी माफी मग लेते है फिर घर ...

    माँ, तुझपे लगा ये कलंक....
    by Dharnee Variya
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    घर में शादी का माहौल चल रहा था। पूरा घर सजा था। महेमनो और ढोल नगाड़े की आवाज़ से घर गूंज रहा था। चूल्हे की आग पे पक रहे ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 6
    by Sayra Khan
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    ये कहानी उन मजबुर लड़कियों की है , जो ऑफिस में काम करती है ! और किसी ना किसी मजबूरी की शिकार बनती है ! कुछ लड़कियां जॉब बचाने ...

    वो पहला पहला दिन
    by Sonia chetan kanoongo
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    वो पहला दिन कीर्ति का शादी के बाद, एक अजीब सी उलझन में सिकुड़ी बैठी अपने बेड पर, बार बार लोगो का आना जाना, उसे देखना, ऐसा महसूस हो ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 5
    by Sayra Khan
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    पिछले पार्ट में देखा.... शैली अपने काम में बिजी हो गई तभी उसे ऐसा लगा कि उसके कंधे पर किसी का हाथ था उसने मूड के देखा तो उसका बॉस ...

    सरोगेट मदर
    by Neelam Samnani
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    ये नई पीढ़ी, इस युग की बिल्कुल एक नई किस्म की फसल है । ये अपनी खुशी से सरोकार रखने वाले लोग हैं ये बाखूबी वाकिफ  हैं अपनी जरूरतें से ...

    ताईजी की रसोई
    by Anjali Joshi
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    निर्मला ताईजी की रसोई की महक तब भी पूरे मोहल्ले की रौनक थी और आज भी हैं। सब कुछ बदल गया निर्मला ताईजी की जिंदगी में लेकिन ये महक ...

    अब नहीं सहुंगि...भाग 4
    by Sayra Khan
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    अब नहीं सहुंगि...भाग 4तब सामने से आवाज उभरी! "आप कल सुबह 9 बजे बस स्टॉप पे मिलो! आपकी जॉब का इंतजाम हो गया है! शैली को अब कुछ राहत ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 3
    by Sayra Khan
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    शैली ने बताया !"पापा के ऑफिस से फोन आया था !पापा शारदा हॉस्पिटल में है ! हमें जल्दी वहां पहुचना है! बेटी की बात सुन कर उसके जैसे पैरो ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 2
    by Sayra Khan
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    शैली कि बातो से वो सहमत थी, लेकिन उसने यही कहा कि पापा की मर्ज़ी बिना तुझे जॉब नहीं करनी है , क्यू की मां-बाप हमारा अच्छा सोचते है, ...

    अब नहीं सहुंगी...भाग 1
    by Sayra Khan
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    हल्लो दोस्तों...मैं एक बार फिर से आप लोगो के सामने एक नई कहानी लेकर हाजिर हूं ! मुझे उम्मीद है ,आप सभी को मेरी ये कहानी भी पसंद आएगी! मेरी कहानी ...

    मेरी प्यारी बिटिया... सूर्याशीं
    by Sonu Samadhiya Rasik
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    रामकेश एक अनपढ़, रूढ़िवादी था वह तीन सदस्यीय परिवार का भरण पोषण मजदूरी से करता था।उसके कोई संतान नहीं थी, लेकिन वह और उसकी मां बेटी को संतान के ...

    नारी की विड़म्बना
    by Seema Kapoor
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    " कितनी बेचेन हैं,                       नारी प्रथा हमारी जहां कल तक "सीता" और "द्रोपदी" की भावनाओ का कत्ल हुआ छिन्न ...

    हमें देश को आगे ले जाना चाहिए ये हमारा कर्त्वय है हम ने जो किया वो मेने बताया अब आप भी करो ये काम -
    by Sawai Joshi Raj
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    ये बात उन दिनों की जब हम बच्चे थे हम तीन भाई है श्रवण कुमार जोशी  अर्जुनलाल शर्मा  जाजड़ा  और में जोशी राज हम तीनों एक अछे भाई और ...

    रीता का कसूर प्रथम भाग
    by Poornima Raj
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    म्हारी बनरी गुलाब का फूल , कि भँवरा बन्ना जी ।महारी बनरी चाँद का नूर ,कि चकोरा प्यारा बनरा जी ॥ एक घर में महिलाएं ढोल और हरमोनियम पर यह ...