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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 8
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (8) पुरुषोत्तम हमारे देश का आम -आदमी साठ वर्ष बाद सठियाने लगता है, तभी तो बेचारों को सरकारी आफिसों से रिटायर्ड कर दिया जाता ...

    खुद के सहारे बनो तुम
    by Ajay Amitabh Suman
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    (१)   मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम   मौजो से भिड़े  हो ,पतवारें बनो तुम,खुद हीं अब खुद के,सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है ,आसां बहुत ...

    प्रकृति नटी का उद्दीपन
    by Neerja Dewedy
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         प्रकृति नटी का उद्दीपन.        -------------------------------             १.  ऋतुराज नवरंग भर जाये. २.  किसलय वसना प्रकृति सुन्दरी. ३.  भागीरथी के तट पर सुप्रभात. ४.  भागीरथी के तट पर ...

    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 7
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (7) जेलों की सलाखों में..... जेलों की सलाखों में, अब वो दम कहाँ । खा- म - खा उलझ रहे, क्यों कोतवाल से । ...

    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 6
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (6) सबसे कठिन बुढ़ापा..... जीवन जीना कठिन कहें तो, सबसे कठिन बुढ़ापा । हाथ पैर कब लगें काँपनें, कब छा जाये कुहासा । मात-पिता, ...

    चंद पंक्तियॉं मातृभारती के लिए
    by Manjeet Singh Gauhar
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    ओ मेरे प्यारे भाग्य , तूने सच में मुझे बहुत कुछ दिया है । मेरी सभी परेशानियों और समस्याओ का हल भी तूने ही किया है ।।लेकिन अब आ गया ...

    बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है (अप्रैल २०१९)
    by महेश रौतेला
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    बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है(अप्रैल २०१९)१.थोड़ा बड़ा कर दो राजनीतिकि ठंडी ,बेहद ठंडी  रातों मेंकिसान उसे ताप सकें।जवान उसे जी सकेंबेरोजगार उसे पा सकें,शिक्षा उसे माप सके।ओ राजनीति ...

    क्या करूँ मैं व्यंग
    by Lakshmi Narayan Panna
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    विषय सूची1.क्या करूँ मैं व्यंग2.तोते ने किया जगरात(अवधी हास्य)3.आल आउट4.नक्शेबाजी(अवधी हास्य-व्यंग)5.राम राज्य6.नई दुल्हन(अवधी हास्य)7.शिव भोले 8.इन्शान परेशान है 10.ईशक़बाजी(अवधी हास्य)11.मोहब्बत की कश्ती(अवधी हास्य)12.गूगल जी ढूंढना13.चिल्लपों1

    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 5
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (5) कविता मेरे सॅंग ही रहना..... कविता मेरे सॅंग ही रहना, अंतिम साथ निभाना । जहाँ-जहाँ मैं जाऊॅं कविते, वहाँ - वहाँ तुम आना ...

    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 4
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (4) बरखा ने पाती लिखी, मेघों के नाम..... बरखा ने पाती लिखी, मेघों के नाम । जाने कब आओगे, मेरे घनश्याम ।। अॅंखियाँ निहारे ...

    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 3
    by Manoj kumar shukla
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    संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (3) मित्र मेरे मत रूलाओ..... मित्र मेरे मत रूलाओ, और रो सकता नहीं हूँ । आँख से अब और आँसू, मैं बहा सकता नहीं ...

    प्यार व्यार - हीर वे
    by Shubham Maheshwari
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    क्या हम कभी बिछुडे?  नही ना।  क्या दिल कभी टूटे नही ना।  जो साथ हो तेरा हो जाए ये जहान मेरा।  हीर वे, हीर वेे क्यों हुए जुदा वे।  ...

    घोर अंधकार
    by Apurva Raghuvansh
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    वक़्त से नाराज हूं वक्त से अनजान है, कुछ पता पता नहीं है, जानने की जिज्ञासा पाने की लालसा खोने को कुछ नहीं,  पाने को बहुत कुछ भटकता हूं दरबदर कहता किसी से कुछ भी नहीं सोचता हूं बहुत करने ...