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    92 गर्लफ्रेंड्स भाग ८
    by Rajesh Maheshwari
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    उसकी कविता सुनकर और उसकी साहित्यिक अभिरूचि के लिए मैंने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे प्रोत्साहित किया। एक दिन हम लोग शहर के एक प्रसिद्ध रेस्टारेंट में बैठे थे। ...

    दहलीज़ के पार - 6
    by Dr kavita Tyagi
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    अपनी मौसी के साथ रहते हुए गरिमा को तीन महीने का समय बीत चुका था। उस दिन उसके पिता उससे मिलने के लिए वहाँ पर आये थे। वही पर ...

    शेनेल लौट आएगी - 2
    by Pradeep Shrivastava
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    ऐसे ही एक बार नार्थ इंडिया के एक शहर में ड्यूटी खत्म करके रुका। हालात ऐसे बने कि दो दिन रुकना पड़ा। वहीं एक कर्मचारी के साथ शाम को ...

    हिम स्पर्श - 75
    by Vrajesh Shashikant Dave
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    75 “जीत, हम अपने लक्ष्य के निकट ही हैं।“ वफ़ाई ने जीत की तरफ देखा। जीत ने कोई उत्तर नहीं दिया। वह थोड़ा आगे जाकर रुक गया। “जीत, सुनो ...

    अच्छाईयां – १९
    by Dr Vishnu Prajapati
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    भाग – १९ गुलाबो के घर से निकलते ही सूरज अनवर का चहेरा देख चूका था  |  ‘तो ये है अनवर....! और गुलाबो मुझे इनसे दूर रहने के लिए ...

    ख़्वाबगाह - 6
    by Suraj Prakash
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    मेरी शादी के एक बरस बाद की बात है। एक दिन सुबह सुबह ही विनय का मैसेज आया था - आज चार बजे कनॉट प्लेस में मिलो। उसके संदेश ...

    हवाओं से आगे - 15
    by Rajani Morwal
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    लिपि सेंट्रल पार्क के किनारे उगे घने मेपल ट्री के नीचे बिछी बेंच पर जाकर बैठ गई, नीचे पड़े सूखे पत्तों की चरमराहट से एक अजीब-सी ध्वनि उत्पन्न हुई ...

    92 गर्लफ्रेंड्स भाग ७
    by Rajesh Maheshwari
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    इसके बाद राकेश ने कहा कि अभी कुछ माह पहले ही मेरे पास रात में दस बजे के आसपास एक लडकी रमनदीप का फोन आया उसने कहा कि सर ...

    शेनेल लौट आएगी - 1
    by Pradeep Shrivastava
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    ऐमिलियो डोरा को मैं आज भी अपनी पत्नी ही मानता हूं। वह आज भी मेरे हृदय के इतने करीब है, मुझमें इतना समायी हुई है कि मैं उसकी महक ...

    नया सवेरा - (सवेरे का सूरज) - 3
    by Yashvant Kothari
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    छात्रावास में अभिमन्यु अपने कक्ष में बैठकर मेस सम्बन्धी जानकारी अपने सहयोगी से ले रहा था तभी विंग मानीटर लिम्बाराम ने प्रवेश किया और आदर के साथ खड़ा हो ...

    हिम स्पर्श - 74
    by Vrajesh Shashikant Dave
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    74 “जीत, कितना मनोहर है न यह द्रश्य? सूरज का इस तरह अस्त होना। चारों दिशाओं में हिम से आच्छादित पर्वत हो। नयनरमय घाटी हो। रंग बदलता सूरज हो।” ...

    दहलीज़ के पार - 5
    by Dr kavita Tyagi
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    जब गरिमा की चेतना लौटी, तब उसने स्वय को अस्पताल मे बिस्तर पर पाया। उस समय उसके चेहरे पर भयमिश्रित चिन्ता की रेखाएँ स्पष्ट दिखायी दे रही थी और ...

    नियति - 11
    by Seema Jain
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    शिखा आश्वस्त नहीं थी, वह रोहन के दिल को और टटोलना चाहती थी। लेकिन रोहन के होठ उसके गालों को चूमते हुए उसके कानों तक पहुंच रहे थे। उसकी ...

    आयम स्टिल वेटिंग फ़ॉर यू, शची - 14
    by Rashmi Ravija
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    शची के यहाँ से निकला.... निरुद्देश्य सा इधर उधर भटकता रहा थोड़ी, देर... कुछ लोगों से बातें की... मन में भले ही झंझावात चल रहें हों.. पर प्रोफेशनल ड्यूटी ...

    शकबू की गुस्ताखियां - 3
    by Pradeep Shrivastava
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    जैसे-जैसे हिंदुस्तान की आजादी करीब आती गई। जिन्ना का दो राष्ट्र का सिद्धांत जोर पकड़ता गया। जल्द ही यह तय हो गया कि विभाजन होकर रहेगा। अब शकबू के ...