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    मैं अपने भाई को क्यूँ मरना चाहता था..
    by devendra kushwaha
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    मैं पिछली सदी में उस साल में पैदा हुआ जब परिवार नियोजन बहुत प्रचिलित नही था और हम दो हमारे दो पर किसी को बहुत विश्वास भी नही था। ...

    हनीमून स्पेशल
    by Ajay Amitabh Suman
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    रमेश और महेश की मित्रता की मिसाल स्कूल में सारे लोग देते। पढ़ाई या खेल कूद हो, दोनों हमेशा साथ साथ रहते। गिल्ली डंडा हो, कबड्डी या कि पतंग ...

    अफसर का अभिनंदन - 8
    by Yashvant Kothari
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      साहित्य में वर्कशॉप –वाद   यशवन्त कोठारी   इन दिनों सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में वर्कशाप वाद चल रहा है। भक्तिकाल का भक्तिवाद रीतिकाल का शृंगारवाद, आधुनिककाल के प्रगतिवाद, ...

    आओ चमचागीरी सीखें - व्यंग
    by Deepak Bundela
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    कलम दरबारी की कलम से“आओ चमचागीरी सीखें”कसम है उन चम्चगीरों की जिन्होने पूरे देश के कर्मठ लोगों को अपना पालतू बना रखा है…बगैर चमचों के बड़ा आदमी इनके बगैर ...

    कहानी च्युइंग गम की
    by devendra kushwaha
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    कक्षा छह में मुझे पहली बार पॉकेट मनी यानी जेब खर्च मिलना शुरू हुआ। जेब खर्च के नाम पे 1996 में रोजाना एक रुपया बुरा नहीं था। मैं शायद ...

    अफसर का अभिनंदन - ७
    by Yashvant Kothari
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      रचनाकारों  के छाया –चित्र                           यशवंत कोठारी इधर मैं रचनाकारों के छाया चित्रों का अध्ययन कर रहा हूँ .वर्षों पहले धर्मयुग में किसी लेखक का फोटो छप जाता ...

    जनता को छलना कितना आसान है
    by Poornima Raj
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    एक बड़े से मैदान मे नेताजी भाषण दे रहे थे " भाइयों और बहनों यह आपकी सरकार इतनी सुस्त है कि उससे कोई काम नहीं होता , अपराधी खुले ...

    अफसर का अभिनन्दन - 6
    by Yashvant Kothari
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      दुनिया के मूर्खों एक हो जाओ       यशवन्त कोठारी   बासंती बयार बह रही है। दक्षिण से आने वाली हवा में  एक मस्ती का आलम है। फाल्गुन की ...

    रूम
    by Nimesh
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    सुबह के नौ बजे होंगे। छुट्टी का दिन था। फ़ोन की घंटी बजी। अंजान नंबर था। उठाया तो देखा उस तरफ कोई  सौहाद्र था। कोई खास जानता नहीं था ...

    लोल
    by Nimesh
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    एक बच्चा लोल लोल (LOL!!) बोलते हुए अचानक से ज़मीन पे गिर पड़ा। पिता पास हीं बैठे थे, चौंक उठे, अपने फ़ोन के स्क्रीन से नज़र उठा कर बच्चे ...

    अफसर का अभिनन्दन - 5
    by Yashvant Kothari
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    व्यंग्य-- चुनाव ऋतु –संहार   यशवंत कोठारी हे!प्राण प्यारी .सुनयने ,मोर पंखिनी ,कमल लोचनी,सुमध्यमे , सुमुखी कान  धर कर सुन और गुन ऐसा मौका  बार बार नहीं आता ,इस ...

    अफसर का अभिनन्दन - 4
    by Yashvant Kothari
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      चुनावी - अर्थशास्त्र                            यशवंत कोठारी   विश्व के सबसे महंगे चुनाव भारत में होने जा रहे हैं .सत्रहवीं लोक सभा के लिए ये चुनाव पैसों की बरसात ...

    पहला घूंट
    by S Kumar
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    फेसबुक पर हुई दोस्ती के काफी दिन messanger chat के बाद जब उस दोस्त ने मेरी मिलने की इच्छा पर जब अपना इजहार जताया तो मिलने पहुंचते ही जैसे ...

    अफसर का अभिनन्दन - 3
    by Yashvant Kothari
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      चुनाव में खड़ा स्मग्लर                                                 यश वन्त कोठारी                वे एक बहुत बड़े स्मगलर थे। समय चलता रहा। वे भी चलते रहे। अब वे समाज सेवा करने ...

    अफसर का अभिनन्दन -2
    by Yashvant Kothari
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    आज़ादी   की तलाश  में .....                                                       यशवंत कोठारी   आज़ादी की साल  गिरह पर  आप सबको बधाई, शुभ कामनाएं .इन सालों में क्या खोया क्या पाया , इस का लेखा ...