हिंदी हास्य कथाएं कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

दो बाल्टी पानी - 30
द्वारा Sarvesh Saxena

सुनील के इस व्यवहार से बेताल बाबा नाराज होकर बोले “ अरे मूर्ख सुधर जा वर्ना गुजर जायेगा, हमसे विद्रोह ना कर, यही तो वो चुडैल चाहती है” | ...

बन गया बच्चे का करियर
द्वारा r k lal

बन गया बच्चे का करियर आर० के० लाल               हर मां-बाप की तमन्ना होती है कि उसकी संतान एक अच्छा नागरिक बन कर सुखी जीवन यापन करें। मैं ...

गृहस्थी के दल
द्वारा Archana Anupriya

         "गृहस्थी के दल""आजकल दल बनाने का फैशन जोरों पर है। राजनीति का मैदान हो या घर का आँगन-सभी इसमें शामिल हैं"- यही बात मैंने कल अपने घर में खाने ...

दो बाल्टी पानी - 29
द्वारा Sarvesh Saxena

धुयें का असर होते ही सुनील को बेहोशी सी आने लगी और उसका शरीर ढीला पडने लगा | “ बोल ......कौन है तू.......कौन है तू...और कहां से आई है ..बता ...

एहसास
द्वारा S Kumar

जिंदगी की राहों में चल चला हूँ ...जिंदगी की राह में मोहब्बत ही मोहब्बत है...किन्तु वो मोहब्बत में एक हसीन एहसास है...जिंदगी की मुश्किल राह है....वो राह में हवा ...

दो बाल्टी पानी - 28
द्वारा Sarvesh Saxena

“ बम बम भोले......बम बम भोले .....करता हूं विनाश शैतानों का....भूत चुडैल, प्रेत डायन....कोई नही टिकता मेरे आगे, कर दे सबका चंग़ा हाल....नाम है मेरा बाबा बेताल......” | गांव मे जब ...

लाल दंत मंजन - हास्य कहानी
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

बात उन दिनों की है, जब मास्क की तरह लाल दंत मंजन भी हर घर का एक अभिन्न हिस्सा हुआ करता था| टूथपेस्ट कोई भी आए, दंत मंजन तो ...

गोविंद दियो मिलाय
द्वारा Medha Jha

गोविंद दियो मिलाय गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाय। अब पाय तो गोविंद के ही लगना पड़ेगा ना, उसके बिना तो स्कूल ...

हास्य कहानी : पॉकेट रेडियो -छोटी उम्र की खुराफात का एक नमूना
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

  पिछले पंद्रह मिनट से हम तीन फिट की दीवार पर कान पकड़े खड़े थे और माता जी गुस्से से हाथ में हमारा ही प्लास्टिक का बैट लिए इंतजार ...

दो बाल्टी पानी - 27
द्वारा Sarvesh Saxena

उधर ठकुराइन अभी अपनी चोटी कटने के दुख से उबरी नही थीं कि पिंकी की चोटी कटने से और सदमे में आ गयीं, जब ये बात स्वीटी को पता ...

रील कट गई….
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

दूर कहीं जानी पहचानी धुन बज रही थी, लगा की सुनी सुनाई सी है, कान के पट थोड़े और खोले तो जान पड़ा कि अपने ही मोबाइल की रिंगटोन ...

लोक कथा लटूरी -दद्दा का भूत
द्वारा राजनारायण बोहरे

 राजनारायण बोहरेर- लोक कथा -लटूरी दद्दा का भूत बहुत पुरानी बात है, एक गांव में कोटवार के रूप में तैनात एक अत्यंत सीधे-सादे और बड़े भोले व्यक्ति लटूरी दद्दा ...

21 डेज टु क्विट अ हैबिट
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

21 डेज टु क्विट अ हैबिटनमस्ते! सिगरेट, शराब, पान-मसाला खाने वालों की ज़मात में अक्सर यह नसीहत आम सुनाई देती है कि, आप इक्कीस दिन किसी बुरी आदत से ...

दो बाल्टी पानी - 26
द्वारा Sarvesh Saxena

खुसफुस पुर गांव मे तूफान आने के कारण एक चीज तो अच्छी हो गयी थी जो थी, पानी की परेशानी, गांव वालों ने इतना तो पानी भर ही लिया ...

एक ज्योतिषीजी पर मुकदमा
द्वारा r k lal

एक ज्योतिषीजी पर मुकदमा आर० के० लाल               वकील साहब! मुझे एक मुकदमा दायर करवाना है, अंकुर ने अपने रिश्तेदार से कहा  जो हाईकोर्ट में एक  एडवोकेट हैं। ...

उफ्फ ये मुसीबतें - 4 - शादी में फू फ़ा
द्वारा Huriya siddiqui

 "अरे जंबो?!! तुम अभी तक तैयार नहीं हुई ? बारात बस आने वाली होगी।" एक अजनबी औरत ने मुझसे कहा "जी हुई तो थी, ये पोशाक तो नहीं पहनी थी ...

चटोरों की व्यथा
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

चटोरों की व्यथा नमस्कार! आज आपका ध्यान उन कुछ मुद्दों पर जो समाज़ ने नकार रखा है….न तो मीडिया में कवरेज मिलेगी न सोशल मीडिया में। घरों को पलायन ...

वर्क फ्रॉम होम
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

नमस्ते!! आज बात पुरुष प्रधान युग में गृहकार्य कुशलता के लिए तैयार होती नई खेप की | जी हाँ बात हमारे जैसे लाखों पुरुषों की जो इस करोना काल ...

दो बाल्टी पानी - 25
द्वारा Sarvesh Saxena

उधर सरला ने सुनील की चारपाई हिलाते हुए आवाज दी “ लल्ला...ओ लल्ला... उठ जा रे...बहुत सो लिया” | सुनील ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी | सरला ने फिर ...

भोला  के किस्से 
द्वारा राज बोहरे

बहुत पुरानी बात है। होशियारपुर नाम का एक गाँव था जिसमें भोला नाम का एक चतुर व्यक्ति रहता था। वह बड़ा बातूनी और हाजिर जवाब इंसान था। गाँव के लोगों ...

ऑनलाइन क्लास: महिला सशक्तिकरण का एक और उदाहरण
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

ऑनलाइन क्लास: महिला सशक्तिकरण का एक और उदाहरण करोना, कोविड-19, क्वारंटाइन, लॉक डाउन जैसे नए शब्दों को सुनते हुए आज 3 महीने हो गए और अब ऐसे लगते है ...

मेरा पति सबका है
द्वारा Swatigrover

अरे! भाभीजी  भैया  नहीं है,  क्या  घर  पर ? मोहन  दूधवाले  ने  कहा।  क्यों  क्या  काम  है ?  परिधि  ने  पूछा ।  जी  वो  आधार  कार्ड  बनवाना  है । ...

दो बाल्टी पानी - 24
द्वारा Sarvesh Saxena

रात आधी बीत चुकी थी आंधी पानी भी अब धीमा हो चला था, चारों ओर झींगुर की आवाज सुनाई दे रही थी, पूरा गांव अब नींद के आगोश में ...

शादी और लॉकडाउन
द्वारा Swapnil Srivastava Ishhoo

शादी और लॉकडाउन (पार्ट 1): परम की शादी हर नए जोड़े की तरह परम भी बहुत खुश था, आज उसकी शादी जो थी | कितनी सारी तैयारियां, कितने सारे ...

बेटे से हारा नहीं हूँ - एक व्यंग
द्वारा r k lal

बेटे से हारा नहीं हूँ- एक व्यंग आर0 के0 लाल                 देशी कहावत है कि “बाप सबसे जीत सकता है लेकिन अपने बेटे से ही हार जाता है”। ...

दो बाल्टी पानी - 23
द्वारा Sarvesh Saxena

गुप्ता जी ने पिंकी की ओर घूरकर देखा और बोले “ अरे पिंकिया का जरूरत थी ऐसी आंधी पानी में पानी भरने की वह भी अंधेरे में, अरे हमें ...

एक चूहे का जिहाद
द्वारा Atul Kumar Sharma ” Kumar ”

बुधवार के दिन हृदय पर एक बोझ आ गया । रिद्धि सिद्धि के दाता गौरी पुत्र के खासमखास का मर्डर मेरे हाथों हो गया। जो में नही चाहता था ...

जो घर फूंके अपना - 53 - चले हमारे साथ! - अंतिम भाग
द्वारा Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 53 ----------चले हमारे साथ! पर अगले ही क्षण आई असली मुसीबत ! उस पार की तो छोडिये, इस पार ही, यानी रेस्तरां के दरवाज़े से, ...

दो बाल्टी पानी - 22
द्वारा Sarvesh Saxena

गुप्ता जी और गुप्ताइन बड़े परेशान थे, कि पिंकी अब तक क्यूँ नहीं आई और मौसम उन्हें और डरा रहा था, गुप्ता जी आखिर पिंकी को ढूंढने घर से ...

जो घर फूंके अपना - 52 - चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच
द्वारा Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 52 चक्कर पर चक्कर, पेंच में पेंच इस बार लक्षण अच्छे थे. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में कोई फेर बदल नहीं हुआ. नियत दिन हमने पालम ...

जो घर फूंके अपना - 51 - फिर वही चक्कर
द्वारा Arunendra Nath Verma

जो घर फूंके अपना 51 फिर वही चक्कर इसके बाद दो एक महीने बिना कुछ असामान्य घटना के बीत गए. पिताजी ने बताया तो था कि मुझसे मिलने किसी ...

सत्ते मास्साब
द्वारा राजेश ओझा

सत्ते मास्साब जितने योग्य अध्यापक हैं उतने ही अच्छे विद्यार्थी भी थे..छात्र जीवन से प्रारंभ हुआ उनका प्रतिभा प्रदर्शन आज तक बिला नागा गतिमान है..आज भी कोई बात हो ...