हिंदी हास्य कथाएं कहानियाँ मुफ्त में पढ़ेंंऔर PDF डाउनलोड करें

कस्बे का आई.सी.यू.
द्वारा Alok Mishra

कस्बे का आई.सी.यू.          ये एक छोटा सा कस्बा है । इस कस्बे में एक सरकारी अस्पताल भी है । जहॉं कुछ डॅ़ाक्टर केवल इसलिए आ जाया करते है ...

पंछी उवाच
द्वारा Alok Mishra

                  पंछी उवाच        ये जंगल बहुत ही अच्छा और सुंदर था । कल-कल करती नदियॉ , हरे-भरे पेड़ों से ...

चोलबे ना - 8 - गाली ही आशीर्वाद है
द्वारा Rajeev Upadhyay

मुझे भाषण देने की आदत जो है कि लोग देखा नहीं कि बस उड़ेलना शुरू कर देता हूँ। बस कुछ दोस्त मिल गये तो मैं लग गया झाड़ने। खैर ...

पुतला (व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

‘‘पुतला’’      मैं पुतला हूँ। यदि आप न समझें हो तो मैं वही पुतला हूँ, जो दशहरे में रावण के रूप में और होली में होलिका के रूप ...

गरीबी और गरीब ( व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

गरीबी और गरीब ( व्यंग्य )        गरीबी और मंहगाई दो बहनें आजादी के मेले में एक दूसरे का हाथ पकड़े भारत के पीछे-पीछे लग गई । ...

सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

          सत्य मोहे न सोहते ( व्यंग्य )         बचपन से एक ही पाठ पढ़ा है ‘‘सत्य बोलो’’ क्योंकि ‘‘सत्यमेव जयते।’’ सत्य की विजय को ...

चोलबे ना - 7 - फ्रैक्चर, प्लॉस्टर और चुनाव
द्वारा Rajeev Upadhyay

अभी मैं उहापोह की स्थिति में पेंडुलम की तरह डोल ही रहा था कि चच्चा हाँफते हुए कहीं चले जा रहे थे। देखकर लगा कि चिढ़े हुए हैं। जैसे ...

व्हीप......व्हीप......व्हीप.... (व्यंग्य)
द्वारा Alok Mishra

व्हीप......व्हीप......व्हीप....          ‘‘आज के समाचार यह है कि राम प्रसाद जो कि गधा पार्टी के नेता हैं, से सुअर पार्टी पर प्रहार करते हुये व्हीप.......व्हीप.......व्हीप कहा। ...

होली का दिन ( होली स्पेशल)
द्वारा RACHNA ROY

दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ जाकर तरह-तरह के रंग, पिचकारी, गुब्बारे सब कुछ खरीद कर ले आया।दीपू होली के पहले दिन ही पापा के साथ ...

यमराज का आगमन
द्वारा Alok Mishra

यमराज का आगमन    अचानक एक धमाकेदार खबर सुर्खियाॅ बन गई । बनती भी क्यों न , खबर ही ऐसी थी । खबर आई कि यमदूत आने वाले है ...

होली कब है ?
द्वारा Alok Mishra

होली कब है ?         रामलाल एक दिन बाजार में मिल गए । बाताे - बातों में वे बोले ''होली कब है ? हम सोचने लगे कि ...

उपवास कैसे रखें ....  (व्यंग्य)
द्वारा Alok Mishra

उपवास कैसे रखें ......    व्यंग्य          अब साहब आपके ये दिन आ गए कि कोई  मुझ जैसा अदना सा व्यक्ति आपको यह बताए कि उपवास ...

चोलबे ना - 6 - राम को आईएसआई मार्का
द्वारा Rajeev Upadhyay

इस बार के दशहरा में वो हुआ जो कभी भी नहीं हुआ था। जिसका सपना लोग सत्तर साल से देख रहे थे वो इस बार ‘पहली बार’ हो ही ...

दावत-अदावत (व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

 दावत-अदावत (व्यंग्य )          दावत शब्द सुनते ही लज़ीज पकवानों के की महक से मुंह में पानी आना स्वाभाविक ही है । शादी - ब्याह हो , ...

बिना मुद्दे की बकवास (व्यंग्य)
द्वारा Alok Mishra

बिना मुद्दे की बकवास      ( व्यंग्य)    नमस्ते ....आदाब....सत्तश्रीअकाल....आज फिर शाम के छः बज रहे है और मैं खवीश हाजिर हुँ बिना मुद्दे की बकवास के साथ । आप को ...

धंधा मारा जाएगा
द्वारा किशनलाल शर्मा

इक्कीसवीं सदी साइंस का जमाना।शिक्षा के प्रसार के साथ लोगो का ज्ञान बढ़ा है।लोग जागरूक हुए है और उनमें समझदारी आयी है।पहलेकी तरह लोग अज्ञानी और कूप मण्डूक नही ...

मेरी कीमत क्या है ? (व्यंग्य)
द्वारा Alok Mishra

मेरी कीमत क्या है ?      (व्यंग्य)        हम  ठहरे एक आम आदमी ........नहीं ... नहीं , जनता..... अरे......नहीं...... फिर राजनैतिक हो गया । खैर आप ...

How are you, Mr. Khiladi ?
द्वारा BRIJESH 'PREM' GOPINATH

देर रात शिफ्ट पूरी कर घर पहुंचा तो हालत देखकर भौंचक्का रह गया.ऐसा लगा मानो भूकंप आया हो.एक जूता बाथरूम के पास तो दूसरा किचन के दरवाज़े पर,अख़बार के ...

चोलबे ना - 5 - चुनावी चक्कलस का मंत्र
द्वारा Rajeev Upadhyay

सुबह सुबह की बात है (कहने का मन तो था कि कहूँ कि बहुत पहले की बात है मतलब बहुत पहले की परन्तु सच ये है कि आज शाम ...

पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा)
द्वारा Alok Mishra

पांडे जी की सायकिल (व्यंग्य कथा)      अब साहब आपका पूछना जायज ही होगा कि पांडे जी कौन ? आपने पूछ ही लिया है तो  हम बताएं देते ...

कलयुग में भगवान
द्वारा किशनलाल शर्मा

"नारायण नारायण---घोर कलयुग है"क्या हुआ नारद,"भगवान  विष्णु, नारद को देेेखते ही बोले,"  चितित नज़र आ   रहेे हो।कहाँ से आ रहे हो?"प्रभु भूलोक में गया था।पूरी पृथ्वी का भृमण करके ...

अंग्रेजी में बैठना कुत्ते का
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

मैं काफी मॉडर्न थे। इस लिए उनके पास एक कुत्ता था। वे उससे हिंदी नहीं बोलते थे ।अंग्रेजी में आदेश देते थे - कम , गो, यस, नो , ...

बुरा तो मानों .... होली है ( व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

बुरा तो मानों...... होली है ( व्यंग्य)    लो साहब होली आ गई । सब ओर नारा लगने लगा ‘ बुरा न मानो .... होली है ।  वैसे भी ...

काली पुतली 
द्वारा Alok Mishra

      काली पुतली  ये गाँव से विकसित होता छोटा सा कस्बा था । इस शहर में कुछ सड़कें ऐसी भी थी जिन पर रातों को लोग जाने से ...

चोलबे ना - 4 - रवीश भाई, कन्हैया और मेरा सपना
द्वारा Rajeev Upadhyay

कल अचानक ही रवीश भाई से मिलना हो गया।  कौन?  अरे भाई! वही अपने रवीश भाई जी! कमाल है अभी भी आप नहीं समझे! अरें भई रवीश कुमार के ...

लोटन का शौचालय ( व्यंग्य )
द्वारा Alok Mishra

लोटन का शौचालय            एक गाँव में एक बुजुर्ग रहते थे, नाम था लोटनलाल। पहले उनका भरा-पूरा परिवार था। फिर धीरे-धीरे सब साथ छोड़ते गए, ...

सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच
द्वारा r k lal

सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच  आर० के० लाल               पार्क में एक शाम बैठे कई बुजुर्ग समाजसेवा करने की बात पर ज़ोर दे रहे थे परंतु उनमे से दो ...

सब्जी बाजार
द्वारा Alok Mishra

सब्जी बाजार       हम सामाजिक रुप से बहुत ही  समृद्ध होते जा रहे है । अब हमारी सामाजिक समृद्धता चाय-पान के ठेलों ढाबों और सब्जी बाजारों में दिखार्इ देती ...

चोलबे ना - 3 - 370 का रीचार्ज
द्वारा Rajeev Upadhyay

टीवी खोला ही था कि एक धमाका हुआ। एक जबरदस्त धमाका। धमाका देखकर मेरे बालमन का मयूर नाच ही उठा। जवानी के बालमन का मयूर होता ही ऐसा है। ...

हमारे घर छापा
द्वारा Alok Mishra

     हमारे घर छापा     एक दिन अचानक ही मेरे मोहल्ले में हड़कम्प मच गई । पुलिस के एक बड़े से दस्ते का एक बड़ा सा फौज-फाटा ...

गड्ढा
द्वारा Alok Mishra

                गड्ढा     पहले चुनाव और अब कौन जीतेगा या कौन हारेगा के शोर में हम और आप लोकतंत्र की सड़क पर ...

अतिक्रमण -एक राष्ट्रीय खेल
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय

छोटी चिन्ता /वही चिन्ता अतिक्रमण : एक राष्ट्रीय खेल हमारे देश में खेलों की गौरवशाली परम्परा है। गौरव यह है कि और हमारे में खेलों में भी खेल खेला ...