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    टूटते सामाजिक रिश्ते
    by Rajesh Kumar
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    अगर इस सृष्टि की सबसे सुंदर रचना है तो वो है मनुष्य!मनुष्य का विवेकी होना, तथा आत्मज्ञान की ओर बढ़ना  ये कुछ गुण मनुष्य को बाकी जीवों से अलग ...

    सिक्षा - Update education system
    by sachin ahir
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    बात ये ऐसी है थोड़ी गहराई से समझना,पहले परिस्थतिया जुदी थी अब जुदी है।थोड़ा नजरिया तो बदलो की,आज  जो रट रहे हो वो कल की रदी है ।।पुराने फूलों ...

    कुचक्
    by Vk Sinha
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              ? कुचक्र ?  अजय श्रीवास्तव अपनी ही धुन के पक्के पर सरल स्वभाव के एक स्वाभिमानी इंसान थे। परिवार में दो बेटियां इंदू और ...

    मां बाप की सेवा - अपने कर्मों का फल
    by Surya Pratap Ball Ji
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    देहरादून नामक एक शहर की बस्ती में एक चंदा नामक व्यक्ति रहते थे  फुल्के दो लड़के थे एक का नाम उज्ज्वल था और दूसरे का नाम छविराम था कुछ ...

    नशा करना एक गलत आदत है - नो स्मोकिंग
    by Surya Pratap Ball Ji
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    एक बड़े से शहर के पास एक गांव था उस गांव के चार परिवार एक गली मे रहते थे चारों परिवार के मुखिया जागेश्वर भोलानाथ शंभू नाथ और कन्हैया ...

    एक कदम स्वच्छता की ओर
    by Surya Pratap Ball Ji
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    एक बड़े से शहर के पास थोड़ी दूर पर एक गांव बसता था उस गांव का नाम सुंदरनगर था उस गांव में लगभग दो हजार से ज्यादा आबादी वाले ...

    भारत : अतुल्य देश, अतुल्य इतिहास
    by Abhishek Sharma
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    भारत की शिक्षा प्रणाली हमे वो नही पढ़ाती जो पढ़ाना चाहिए। कुछ खास और अविश्वसनीय बातें। एक युद्ध जहाँ सिर्फ 40 सिक्खो ने 10 लाख मुगलो को नाकोचने चबाने पर ...

    भाषायी विविधत का उत्सव
    by kaushlendra prapanna
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    हर अकादमिक सत्र के लिए आर्थिक सहायकता राशि का प्रावधान होता ही है। इसी के तहत विभिन्न गोष्ठियों और सम्मेलनों का आयोजन विभाग करते हैं। उन्हीं मदों में भाषोत्सव ...

    हिन्दी शिक्षा और शिक्षण
    by kaushlendra prapanna
    • (7)
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    हिन्दी शिक्षा और शिक्षण की वर्तमान स्थिति को बिना समझे हम हिन्दी शिक्षा कैसी दे रहे है इसका इल्म नहीं होगा। हमें इस बात की भी तहकीकात करनी होगी ...

    भाषायी विस्थापन
    by kaushlendra prapanna
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    भाषायी विस्थापन के दौर में कौशलेंद्र प्रपन्न व्यक्ति के साथ भाषा भी विस्थापित होती है। व्यक्ति जीवन यापन के लिए या फिर बेहतर जिंदगी के लिए गांव,देहात,जेवार छोड़ कर शहरों, ...

    बस्ते का बोझ या समझ
    by kaushlendra prapanna
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    बस्ते का बोझ या समझ का बोझा कौशलेंद्र प्रपन्न बच्चों पर बस्ते के बोझ से ज्यादा समझ और पढ़ने का बोझा है। समझने से अर्थ लिखे हुए टेक्स्ट को पढ़कर समझना ...