Geeta Kamini Gupta द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Geeta

कहानी

गीता

गीता जिसकी ज़िंदगी सादगी और भोलेपन से भरी थी उसे समझने वालों की शायद कमी थी। गीता न ही इतनी होशियार थी और न ही दुनियादारी की इतनी समझ थी। उसके दिल में कोई खोट न था। वो जैसी खुद थी वैसा ही औरों को भी समझती थी। वह अपनी सीमित सी दुनिया में अपनी छोटी छोटी खुशियां समेटे जीए जा रही थी। घर से बाहर भी कम ही निकलती थी । अब दुनिया कितनी तेजी से बदल रही थी वह उन सब बातों से बेफिक्र थी। पढाई की शुरूआत से ही वह लड़कियों के स्कूल में पढ़ती थी और ट्यूशनस अगर जाती भी थी तो किसी लड़के से उसने कभी बात नहीं की थी। वो बहुत ही शर्मिली और डरपोक किस्म की लड़की थी । घर से सीधा स्कूल और कभी रिशतेदारों के घर जाना भी होता था तो मां के साथ जाकर उन्हीं के साथ वापिस भी आ जाती थी । अच्छी सहेलियां होने के बाद भी कभी अपने दिल की बात किसी से खुल कर नहीं कर पाती थी। बस हसना मुस्कुराना और मस्ती करना बेफिक्र रहना उसे अच्छा लगता था। गीता बहुत ही खुशमिजाज थी उसे किसी से कोई शिकायत नही थी। जो कुछ उसके पास था उसी में खुशियां ढूंढ कर हंसती और सबको हंसाती थी। पहले स्कूल फिर कालेज पर यूनिवर्सिटी तक पहुंचते पहुंचते उसकी सोच में स्वभाव में थोड़ा सा फर्क आ गया था। उसकी सहेली के बार बार समझाने पर कि लड़के भी अच्छे दोस्त होते हैं तुम क्यों इतना डरती हो किसी से बात ही नहीं करती। बस आँखें झुका कर निकल जाती हो। अब हम बड़े हो गए हैं छोटी सोच को छोड़कर अपना सोचने का दायरा बड़ा करो। पहले स्मिस्टिर में उसकी मुलाकात एक लड़के से हुई हालांकि वो कालेज की पढ़ाई के वक्त उसके साथ ट्यूशन पढ़ती थी पर अपने स्वभाव की वजह से न ही उसने कभी उस लड़के से बात की थी और न ही उसका नाम जानती थी। लेकिन अब वो लड़का विशाल उससे बात करने लगा और गीता भी समझती थी की अब हम इतने बड़े हो गए हैं की अपना भला बुरा समझ सकते हैं और छोटी सोच से ऊपर उठ चुके हैं। विशाल की बातों में जाने क्या कशिश थी कि गीता न चाहते हुए भी उसकी बातों पर भरोसा करती चली गई। गीता बात करने में थोड़ा हिचकिचाती थी पर विशाल उस पर अपना विशवास बड़ाता जा रहा था और उसको दुनिया को देखने का नज़रिया बदलना चाहता था । वो भी गीता से यह ही कहता था कि तुम्हें कोई भी आसानी से बेवकूफ बना सकता है थोड़ा होशियार बनो आजकल सीधे और सच्चे लोगों कि समय नहीं है । आहिस्ता आहिस्ता विशाल ने गीता की सहेली से उसका फोन न०. भी ले लिया और फोन पर भी बात करने लगा गीता को पहले तो अच्छा नहीं लगा और अजीब सा लगा कि जब हम साथ पढ़ते हैं तो बात करते हैं दोस्त की तरह तो फोन पर बात करने का क्या मतलब पर विशाल के पास बातें बनाने का लाजबाव हुनर था। और गीता अपनी सहेली की कही बातों को भी याद करके सोचती कि अब हम बड़े हो गए हैं इन बातों का कोई मतलब नहीं निकलना चाहिए सब दोस्त होते हैं। इसी दौरान गीता के लिए रिशते भी आना शुरू हो गए थे। एक जगह गीता की बात पक्की कर दी गई । गीता को वो लड़का इतना पसंद नहीं था । जो सपना जो ख्वाब उसने अपने होने वाले पति के लिए सोचा था वो तो कुछ और था मगर वो अपने घरवालों की बात न टाल सकी हालात से समझोता कर और शायद ऐसे ही होता है अपनी किस्मत मान गीता ने हाँ कर दी और गीता की सगाई हो गई । उस लड़के का नाम संजय था। उधर विशाल गीता को सिर्फ एक दोस्त नहीं पर कुछ और ही समझता था वह उससे प्यार करने लगा था गीता का भोलापन उसे अपनी ओर आकर्षित करने लगा था । गीता इस सब से अंजान थी वो सिर्फ उससे साथ पढ़ने वाला सहपाठी या एक दोस्त समझती थी जिससे पढ़ाई की बात करती थी या विशाल गर कोई बात पूछे या करे वहीं तक बात करती थी। विशाल को जब गीता की सगाई के बारे में पता चला तो वो परेशान हो गया था वो गीता को ऐसे नहीं जाने देना चाहता था अब उसके प्यार में एक ज़िद्द भी शामिल हो गई थी गीता को हासिल करने की गल्त ज़िद्द। विशाल अब गीता को बहकाने लगा था कि तुम जिस लड़के को जानती नहीं उससे तुम्हें शादी नही करनी चाहिए। वहीं दूसरी और उसने संजय यहां काम करता था यह अफवाह फैलाना शुरू कर दी कि गीता उससे बहुत प्यार करती है और उसके साथ भाग जाने को भी तैयार है । वो शादी तो ममी और पापा की मर्ज़ी से कर रही है पर प्यार विशाल से करती है । गीता इन सब बातों से भी अंजान संजय के साथ ज़िंदगी बिताने के ख्वाब देखने लगी थी। संजय भी फोन पर गीता से बात करने लगा था उसने गीता को एक दिन अपने अतीत से रूबरू कराया कि एक लड़की के साथ उसके संबन्ध थे और वह लड़की उससे अब भी बात करती है और आगे बात कर सकती है मैने उससे शादी नहीं करनी क्योंकि वो अच्छे घर की लड़की नहीं है । तुम्हें इस बात से कोई ऐतराज़ नहीं होना चाहिए । यह बात सुनकर गीता के तो होश उड़ गए थे उसने जैसे तैसे खुद को संभाला था और बिना कोई जबाव दिए फोन रख दिया था। गीता बहुत परेशान हो गई थी उसने यह बात किसी से नहीं कही पर वो बहुत डर गई थी और उदास हो गई थी अब संजय जैसा था उसी को अपनी किस्मत मान तकदीर से समझौता कर गई। पर अपने भविष्य को लेकर वो उत्साह और खुशी नहीं रह गई थी पर उसने संजय से कोई सवाल नहीं किया। वहीं विशाल की अफवाहें संजय तक भी पहुंच गई उसने गुस्से से गीता को फोन किया और विशाल के बारे में पूछा गीता ने सब सच बोल दिया कि वह मेरे साथ पढता है और एक दोस्त की तरह मुझसे बात करता है इससे ज्यादा कुछ नहीं पर संजय तो अपने दिमाग से सोच रहा था और उसे गीता गल्त नज़र आने लगी ।गीता ने उसे बहुत यकिन दिलाया कि मेरे मन में कुछ भी नहीं है विशाल को लेकर पर संजय अपनी घटिया सोच से ही गीता के बारे में सोचने लगा था और गीता और संजय की सगाई तोड़ दी गई थी। जब बात गीता के घरवालों की इजज्त की आई तो गीता ने संजय का राज़ सबको बताया कि संजय कैसा लड़का है उसे हक नहीं था गीता को गल्त कहने का जब गीता ने उसकी इतनी बड़ी बात सुनकर भी उसका राज़ अपने दिल में दफन कर उसे अपना लिया था और गीता की तो कोई गल्ती भी नहीं थी अगर विशाल गीता को प्यार करता था गल्त बातें कर रहा था उसे सच्चाई का पता लगाना चाहिए था और गीता की बातों पर तो विशवास करना चाहिए था। पर उसने तो गीता को उल्टी सीधी बातें कह दी थी। गीता का दिल टूट गया था विशाल ने गल्त अफवाहें फैलाकर उसका नाम तो खराब किया था साथ में उसके विशवास को भी तोड़ा था जो वह उस पर अच्छा दोस्त होने के नाते करती थी और संजय ने अपनी छोटी और घटिया सोच का परिचय दिया था कि जैसा इन्सान खुद होता है वैसा ही दूसरे के बारे में भी सोचता है गीता टूट चुकी थी उसे विशवास और दोस्त के नाम से भी नफरत हो गई थी। पर उसके घरवाले गीता को अच्छी तरह जानते थे उन्हें अपनी बेटी पर पूरा विशवास था । उन्हे पता था कि गीता सच बोलती है और बहुत भोली है चालाक नहीं है। उन्होने गीता को सारी बातों को भूल जाने को कहा। पर गीता के कोमल मन पर यह बातें बहुत गहरा असर कर चुकी थी और अब किसी पर विशवास करना उसके लिए बहुत मुशकिल था । पर जिसका मन साफ होता है उसके साथ भग्वान भी अच्छा ही करते हैं । थोड़ी परीक्षा ज़रूर हो सकती है पर अंत भला होता है । सच्चाई एक न एक दिन सामने आती हे । संजय अब जान चुका था कि विशाल ने सब झूठ कहा था गीता ऐसी नहीं थी पर अब काफी देर हो गई थी संजय की सच्चाई जानने के बाद अब गीता के ममी पापा को भी संजय से नफरत हो गई थी जो एक लड़की को पहले धोखा दे रहा था शादी न करके और अब गीता की बारी थी अच्छा हुआ जो हमारी गीता बच गई यही सोच कर गीता के ममी पापा खुश थे और गीता के लिए रिशता देखने वहीं गीता का रिशता एक बहुत ही अच्छे खानदान में तय हो गया था । लड़का गीता की तरह ही सच्चा और ईमानदार था जिसकी सोच भी अच्छी और नेक थी गीता की सगाई टूटने से उसका कोई लेना देना नहीं था उसे तो बस सीधी साधी और सच्ची गीता भा गई थी । गीता नहीं जानती थी कि उसको इतना अच्छा जीवनसाथी मिलने वाला है जो गीता की कद्र भी करता था और विशवास भी।।।

कामनी गुप्ता ***