एक ऐसा बन्धन Kamini Gupta द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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एक ऐसा बन्धन

Kamni Gupta

kamnigupta18@gmail.com

शादी एक ऐसा बन्धन है जो दो इन्सानों को नहीं अपितु दो परिवारों को भी आपस में जोड़ता है।

शादी की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि शादी किस तरह से हुई है “लव मैरिज” है या “अरेंज मैरिज” बल्कि इस बात पर ज्यादा करती है कि उस रिशते में जो दो इन्सान जुड़े हैं उनका आपस में तालमेल और उस रिशते के प्रति सामंजस्य कितना है। वो इस रिशते के प्रति कितने सजग और कितने जागरूग हैं ,क्योंकि रिशता कोई भी है समय समय पर उस रिशते को समझने की वक्त देने की और देखभाल की ज़रूरत होती है।

शादी किस तरह से होती है वो भी मुख्य तथ्य है। प्रेम विवाह को सही या गल्त ठहराना शायद यह नज़रिया शादी को लेकर सही नहीं है। पर कभी कभी घरवालों के विरोध के चलते या किसी एक परिवार का रिशते को स्वीकार न करना या सफल होने न देना दो इन्सानों की ज़िंदगी सदा के लिए बर्बाद करने के लिए काफी होता है। यदि दोन पक्ष राजी हों और प्रेम विवाह को स्वीकार कर लिया जाए पर फिर भी कितने ही ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं यहां न सिर्फ बाद में लड़ाई झगड़े पर बात आते आते तलाक तक भी पहुंच जाती है और फिर घरवालों का या किसी का इस बात को तूल देना भी शामिल होता है कि देख लो लव मैरिज करने का नतीजा। यह किसी तरह से सही नहीं है क्योंकि अरेंज मैरिज में भी अकसर ऐसा ही पाया जाता है क्योंकि लड़की लड़का एक दूसरे को इतनी अच्छी तरह से जानते नहीं होते और सिर्फ देखने भर से और थोड़ी सी बातचीत से जो निष्कर्ष निकाला जाता है उसी के बलभूते पर शादी कर दी जाती है बाद में चाहे बात बात पर तकरार हो या आपस में रिशते को संवारने को लेकर कोई दिलचस्पी न दिखे न ही कोई झुकने को तैयार हो तो रिशता कब तक निभाया जा सकता है। जो परिवार रिशते से आपस में जुड़ते हैं उन में भी कड़वाहट आ जाती है कभी कभी तो लड़ाई इतनी बड़ जाती है कि बात को तलाक के ज़रिए अदालती कार्यवाही को न करके खुद ही दुशमनी बना ली जाती है और बात इज़्जत को लेकर मरने मारने पर आकर खत्म होती है।

जाने क्यों भूल जाते हैं कि शादी तो एक पवित्र और अटूट बंधन है जो हमें एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करना और एक दूसरे के साथ मिलकर एक दूसरे के लिए जीना सिखाता है। छोटी छोटी नोंक झौंक तो ठीक है पर इस की आड़ में एक दूसरे के परिवार पर ऊंगली उठाना या बेवजह ताने बाने इस रिशते को नीरस और बोझिल कर देते हैं। रिशता चाहे प्रेम विवाह से जुड़ा हो या अरैंज मैरिज हो बस उसमे प्यार और मर्यादा होनी चाहिए जो इस रिशते को मोहक और सुन्दर बनाती है क्योंकि इस रिशते से सिर्फ दो इन्सान ही नहीं दो परिवार और कितने लोग जुड़ते है जो इस रिशते से कितनी अपेक्षाएं रखते हैं। एक और बात शादी को लेकर बहुत माइने रखती है वो यह कि शादी कोई खेल नह है जिसे अपने निजी स्वार्थ के लिए या अपनी खुशी के लिए किसी दूसरे पर जबरदस्ती थोपा जा सकता है और अरेंज मैरिज के नाम पर बिना लड़की या लड़के मर्ज़ी जाने बिना या एक के राज़ी होने पर दूसरे को जबरदस्ती इस रिशते के लिए दबाब बनाना और बातों बातों में ही रिशता जोड़कर यह समझना कि अब शादी हो गई है तो सब ठीक हो जाएगा यह कतई सही नहीं है यह दो इन्सानों की ज़िंदगी का सवाल होता है और उनके साथ जुड़े लोगों पर भी बहुत असर पड़ता है इसलिए इस रिशतों में जल्दबाज़ी या दबाब सही नहीं है ज़रूरत है तो आपसी रज़ा मन्दी की फिर चाहे प्रेम विवाह हो या अरैंज क्योंकि जब लड़की या लड़का इस रिशते को लेकर पूर्णतया खुश और रज़ामंद होंगे तभी अपनी ज़िंदगी का निर्वाह सही तरीके से और खुशी के साथ कर पांएगे। समझौते पर टिका हुआ रिशता बहुत दूर तक नहीं चलाया या निभाया जा सकता है ऐसा रिशता तो बस एक बोझ की तरह होता है जिसे शादी का नाम देकर खुद को धोखा दिया जाता है । इसलिए चाहे शादी “लव मैरिज “हो या अरेंज मैरिज” इसमें लड़की लड़के की खुशी और भलाई से बड़कर कुछ नहीं होना चाहिए क्योंकि जब वो दोनो ही इस रिशते में खुशी खुशी और प्यार से बंधेगे तो परिवार भी खुश रहेंगे और रिशता फलेगा फूलेगा । यह बात अलग है कि किसी भी रिशते को निभाने के लिए प्यार,त्याग, समर्पण की भावना उस रिशते में चार चांद लगा देती है कभी कभी छोटी छोटी बातों को तूल न देकर नज़र अंदाज़ करने से भी बहुत से झगड़ों को टालकर रिशते को अच्छे से निभाया जा सकता है क्योंकि रिशते निभाने बचाने के लिए कभी हमें झुकना भी पड़ता है और रिशते निभाने के लिए एक दूसरे की कमी को ढाल बनाकर लड़ने से अच्छा है उसकी अच्छाईयों को अपनाकर सराहा जाए क्योकि हर कोई हमारे नज़रिए से सही और पूर्ण नहीं हो सकता हर एक में कोई न कोई कमी होती है और हम उन कमियों को गिनाकर अगर सुधारने का अभियान अगर ज़रूरत से ज्यादा ही करेंगे तो रिशते में खटटास आना स्वभाविक है ऐसे परिस्थितयों से बचने के लिए बार बार उन्हें कुरेदना और बात को बड़ाना रिशतों को निभाने के लिए शायद सही नहीं है। लव मैरिज में भी प्यार को बरकरार रखने के लिए एक दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखना और उस रिशते की गरिमा को बनाए रखना ज़रूरी है। ऐसा दोनो को करना चाहिए क्योंकि पति पत्नि दोनों मिलकर ही परिवार चलाते हैं किसी एक का भी रिशते को लेकर लापरवाह या अपने गरूर में रहना कि दूसरा ही हर बार झुके सही नहीं है हर एक बात सीमा में ही बरदाशत की जाती है कभी न कमी दूसरे का संयम भी जबाव दे जाता है और रिशता टूटने के कगार पर आ जाता है । यही बात अरेंज मेरिज के लिए भी लागू होती है अगर हम अपनी और घरवालों की मर्ज़ी से भी रिशता जोडते हैं तो भी समय समय पर रिशते में प्यार र उस उस रिशते को सहेजने संवारने की ज़रूरत पड़ती है अपनी भावनाओं और पसंद के साथ साथ दूसरे की भावनाओं और पसंद का भी ख्याल रखना ज़रूरी होता है तभी रिशता दूर तक निभता है। जब पति पत्नि में आपस में तालमेल और अच्छा रिशता होगा तभी तो परिवार को भी वो खुशी दे पाएंगे और घर का माहौल सही रहेगा। शादी में जल्दबाज़ी इस रिशते की मिठास को कम कर देती है और परिवारों में कलह का रूप ले लेती है जो किसी के लिए भी सही नहीं है ऐसी परिस्थितयों से बचने के लिए रिशता जोड़ने से पहले लिया गया ज्यादा समय बाद में होने वाली परेशानियों से कहीं सही है। लव मैरिज या अरेंज मैरिज में उतपन्न होने वाली बाद की परेशानियों से बचने के लिए सोच विचार कर और समझदारी से लिया गया फैसला इस रिशते को मोहक और खूबसूरत बना सकता है।।।

कामनी गुप्ता ***