इतिहास के पन्नों से 27
नोट - ‘ वैसे तो इतिहास अनंत है ‘ इस शृंखला में इतिहास की कुछ घटनाओं के बारे में पहले प्रकाशित भागों में उल्लेख है, अब आगे पढ़ें – जब दुर्घटनाग्रस्त विमान का मालवा 75 वर्ष के बाद मिला ….
11 अप्रैल 1952 शुक्रवार के दिन दोपहर 12 .11 बजे पैन अमेरिकन एयरलाइंस के एक विमान ने उड़ान भरी . इसे कैरिबियन सी में स्थित अमेरिकी क्षेत्र सैन जुआन, प्यूर्टो रिको से न्यूयॉर्क जाना था . विमान में 5 क्रू और 64 यात्री थे . टेक ऑफ के मात्र नौ मिनट बाद जब विमान ऊपर चढ़ाई पर था , विमान के दोनों इंजन फेल हो गए . पायलट के पास विमान को अटलांटिक सागर में उतारने के अलावा कोई विकल्प नहीं था .
विमान का पिछला हिस्सा टूटकर अलग हो गया और धड़ डूब गया . हालांकि फ़िलहाल इस दुर्घटना में सभी 69 यात्री और चालक दल के सदस्य बच गए थे लेकिन पानी में उतरने के बाद बचे कुछ ही मिनटों में अफरा-तफरी और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी . जैसे-जैसे विमान तेजी से डूबने लगा, यात्रियों को लाइफ जैकेट और राफ्ट ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और तब तक बहुत देर हो चुकी थी . विमान सागर के तल पर जा बैठा .विमान में सवार 69 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से केवल 17 ही जीवित बच सके थे .
शुरुआती खोजों में विमान के मलवे का पता नहीं लग सका था . नए सिरे से मलबे की खोज के लिए चलाए गए अभियान का नेतृत्व एयर/सी हेरिटेज फाउंडेशन ने डिस्कवरी चैनल के शो 'एक्सपीडिशन अननोन' और कई अन्य संगठनों के साथ साझेदारी में किया था .
पिछले महीने 2 जून को नयी तकनीक से लैस खोजकर्ताओं ने एक स्वायत्त सोनार ड्रोन का उपयोग करके डगलस डीसी-4 विमान के अवशेषों का पता लगाया, जिसने विमान के धड़ और पूंछ का पता लगाया था . दुर्घटना के 75 साल बाद विमान का मलवा मिलने पर खोजकर्ताओं को बहुत ख़ुशी मिली .
इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप एयरलाइन्स कंपनियों के सुरक्षा नियमों में व्यापक सुधार हुए जिसके चलते अब प्रत्येक वाणिज्यिक उड़ान पर अनिवार्य पूर्व-उड़ान सुरक्षा ब्रीफिंग शामिल है .
इतिहास की एक अन्य रोचक कथा
रोमन चैरिटी
“ रोमन चैरिटी “ एक प्रसिद्ध प्राचीन रोमन कहानी है . इस वृत्तांत को प्राचीन रोमन इतिहासकार वैलेरियस मैक्सिमस ने अपनी पुस्तक में दर्ज किया था . 16वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान यूरोपीय चित्रकारों और मूर्तिकारों (जैसे पीटर पॉल रुबेंस) के लिए एक लोकप्रिय विषय बन गई थी . चित्र देखने पर प्रथम दृष्टया अधिकांश लोगों को यह बहुत अश्लील लग सकता है और अधिकांश के मन में कई नकारात्मक विचार आ सकते हैं पर वास्तविकता जानने के बाद शायद अपनी आंखों में आंसू आने से न रोक पाएं .
यूरोप के एक देश में, एक बूढ़े व्यक्ति को वहां के राजा ने भूख से मरने की सजा सुनाई और उसे जेल में डाल दिया गया था . उस व्यक्ति का नाम साइमन था . उसकी बेटी , पैरो , ने तत्कालीन राजा से अनुरोध किया कि उसे अपने पिता से उनकी मृत्यु तक प्रतिदिन मिलने की अनुमति दी जाये जिसे राजा ने स्वीकार कर लिया .
पैरो को अनुमति तो मिल गई थी लेकिन जेल के अधिकारी प्रतिदिन उसकी जांच करते थे ताकि वह कोई भी खाने-पीने की वस्तु अपने साथ पिता के पास न ले जा सके .अपने पिता भूख से तड़पते देख उसे असहनीय दुःख होता था . एक बेटी होते हुए भी अपने पिता को उसने एक ममतामयी माँ की नज़रों से देखा . इसलिए, उन्हें जीवित रखने के लिए पैरो ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया .वह प्रतिदिन जेल अधिकारियों से छिपा कर पिता को स्तनपान कराया करती .
अनेक दिनों बाद भी साइमन को जीवित देखकर सुरक्षाकर्मियों को संदेह हुआ और वे पैरो पर कड़ी निगरानी रखने लगे .एक दिन जेल के अधिकारी ने पैरो को पिता को स्तनपान कराते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया . पैरो को भी गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा दर्ज किया गया . लेकिन उसकी ममतामयी ममता ने अधिकारियों का दिल जीत लिया और पैरो को क्षमादान तो मिला ही साथ में उसके पिता को भी रिहा कर दिया गया . इसलिए इस कथा को रोमन चैरिटी नाम मिला .
एक बेटी ने अपने पिता को स्वयं स्तनपान करा कर जीवनदान दिया . ऐसी महिला के जज्बा को कोटि कोटि सलाम .
क्रमशः