होटल का वेटर और उसकी प्रेम कहानी - 14 kalpita द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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होटल का वेटर और उसकी प्रेम कहानी - 14

(काम्या कपूर के पापा ने ऋतिक का इंटरव्यू लिया)
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माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था।
अब ये सिर्फ इंटरव्यू नहीं था—
दो सोचों की टक्कर थी।
काम्या पहली बार ऋतिक को ऐसे देख रही थी—
जैसे वो उसे पहचान ही नहीं पा रही हो।

पापा अब भी गंभीर बैठे थे…
टेबल पर हल्की खामोशी पसरी हुई थी।
तभी ऋतिक ने मेन्यू उठाया—
"अगर आप लोग allow करें… तो मैं ऑर्डर कर दूँ?"
पापा ने हल्के से सिर हिला दिया।
ऋतिक ने वेटर को बुलाया और बिना ज्यादा सोचे कहा—
"एक ग्रिल्ड फिश… कम मसाले में।
और ऑयल भी कम रखिएगा।
साथ में स्टीम्ड वेजिटेबल्स।"
वेटर ने नोट किया और चला गया।
काम्या उसे ध्यान से देख रही थी…

वो धीरे से उसकी तरफ झुकी—
"तुमने… ये सब क्यों ऑर्डर किया?"
ऋतिक ने सहजता से कहा—
"बस… लगा कि अंकल के लिए हल्का खाना ठीक रहेगा। क्योंकि उन्हें हाई बीपी है।"
काम्या के चेहरे पर हैरानी साफ थी।
"लेकिन… तुम्हें कैसे पता—मैने तो नहीं बताया।"
"काम्या डार्लिंग थोड़ा होमवर्क तो मैने भी किया है।"

ऋतिक ने कुछ पल चुप रहने के बाद धीरे से कहा—
"अंकल… अगर मैं आपको पसंद नहीं हूँ… तो आप साफ-साफ कह सकते हैं।
मुझे बुरा नहीं लगेगा।"
टेबल पर हल्की खामोशी छा गई।
काम्या ने चौंककर उसकी तरफ देखा।
पापा ने कुर्सी पर सीधा बैठते हुए कहा—
"मुझे तुम्हारे अच्छे या बुरे लगने से कोई फर्क नहीं पड़ता…
जो होगा… वो मेरी बेटी के लिए सही होगा।"
उनकी आवाज़ सख्त थी।
ऋतिक ने सिर हिलाया… जैसे बात समझ रहा हो।
फिर उसने एक पल रुककर कहा—
"अंकल… एक बात कहूँ?"
पापा की नजरें उस पर टिक गईं—
"कहो।"
"काम्या थोड़ी… जिद्दी हो गई है।"
उसने बहुत संभलकर शब्द चुने,
"शायद… क्योंकि उसकी माँ नहीं हैं।"
बस यही बात—
सीधे दिल पर लगी।
पापा का चेहरा सख्त हो गया।
"तो तुझे क्या लगता है?" उनकी आवाज़ अब भारी हो चुकी थी,
"मैं अपनी बेटी पर सख्ती नहीं करता?"
टेबल पर माहौल अचानक गरम हो गया।
दीदी और जीजू भी चुप हो गए।
काम्या घबराकर बोली—
"ऋतिक… बस करो—"
लेकिन इस बार ऋतिक पीछे नहीं हटा।
उसने बहुत शांत लेकिन ठोस आवाज़ में कहा—
"सख्ती करते हैं अंकल…
लेकिन… शायद उतनी नहीं… जितनी एक माँ करती।"
कुछ सेकंड—
कोई कुछ नहीं बोला।
पापा की आँखों में गुस्सा था…
लेकिन उसके पीछे एक चुभन भी थी—
जैसे किसी ने वो बात कह दी हो… जिसे वो खुद भी महसूस करते थे… पर मानना नहीं चाहते थे।
काम्या अब पूरी तरह असहज हो चुकी थी—
"आप हद पार कर रहे हैं…" उसने धीरे से कहा।
ऋतिक ने उसकी तरफ देखा—
"नहीं… मैं बस सच कह रहा हूँ।"

माहौल थोड़ा शांत हो चुका था…
लेकिन ऋतिक के मन में अभी भी बहुत कुछ चल रहा था।
उसने धीरे से दीदी और जीजू की तरफ देखा—
"दीदी… एक बात कहूँ?"
दीदी ने मुस्कुराकर कहा, "हाँ, बोलो… अभी तक तो अच्छा ही बोल रहे थे।"
ऋतिक ने हल्का सा सिर झुकाया… फिर सीधा होकर बोला—
"मैं… कुछ भी कर लूँ…
लेकिन… शादी के बाद… मैं ससुर के पैसों पर नहीं जी पाऊँगा।"
टेबल पर अचानक सन्नाटा छा गया।
दीदी की मुस्कान हल्की पड़ गई।
जीजू ने भौंहें सिकोड़ लीं—
"मतलब?" उन्होंने थोड़ा गंभीर होकर पूछा।
ऋतिक ने साफ शब्दों में कहा—
"मतलब… मैं काम्या को खुश रखने की पूरी कोशिश करूँगा…
लेकिन… उसके पापा के पैसे या नाम का सहारा लेकर नहीं।"
काम्या ने तुरंत उसकी तरफ देखा—
जैसे उसे अंदाजा था कि ये बात सबको चुभेगी।
"तो तुम हमे ताना मार रहे हो..मेरे पति ने पापा से पैसे ले कर बिज़नेस शुरू किया है।" दीदी थोड़ा गुस्से में बोली 
"मेरे कहने का यह मतलब नहीं था मैं तो सिर्फ एक बात कर रहा था" ऋतिक ने बोला सा मुंह बना कर कहा।
"चलो डिनर खत्म करते हैं।" काम्या ने बात बदलते हुए कहा।
माहौल में अब थोड़ा तनाव सा था पर एक दूसरे को वो सब ऐसे दिखा रहे थे जैसे सब कुछ नॉर्मल हो।
ऋतिक ने एक चम्मच भर कर चावल उठाए और काम्या को खिलाने लगा।
"kamya darling..have it"
काम्या ने हंसते हुए ऋतिक को गले लगा कर कहा ओवरएक्टिंग बंद करो।

डिनर खत्म हो चुका था।
टेबल पर रखी प्लेटें खाली थीं…
लेकिन माहौल अब भी भरा हुआ था—अनकही बातों से।
काम्या के पापा, दीदी और जीजू उठकर जा चुके थे।
अब वहाँ सिर्फ दो लोग बचे थे—
काम्या… और ऋतिक।
कुछ देर तक दोनों बिना कुछ बोले बैठे रहे।
होटल की हल्की रोशनी…
धीमी म्यूज़िक…
और उनके बीच पसरी खामोशी।
काम्या ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी—
"तुम्हें हर बात इतनी सीधी बोलनी ज़रूरी थी?"
उसकी आवाज़ में गुस्सा कम… उलझन ज्यादा थी।
...to be continued