अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 29 kajal jha द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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अधूरी किताब - सीजन 2 - एपिसोड 29

अधूरी किताब – सीजन 
एपिसोड 29: मौन कक्ष का द्वार
अरोही ने जैसे ही मौन कक्ष की ओर पहला कदम बढ़ाया, पूरे शून्य पुस्तकालय में गहरी खामोशी छा गई।
ऐसा लगा मानो समय ने भी अपनी साँस रोक ली हो।
उसके हर कदम के साथ फर्श पर सुनहरे अक्षर उभर रहे थे और अगले ही पल गायब हो जा रहे थे।
दूर खड़ा शब्दभक्षक उसे घूर रहा था।
उसकी हजारों बदलती हुई आँखें पहली बार बेचैन दिखाई दे रही थीं।
सत्यलेखक ने यह देखकर धीमे स्वर में कहा,
"उसे डर लग रहा है..."
अनन्या ने हैरानी से पूछा,
"शब्दभक्षक... डर सकता है?"
सत्यलेखक ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
"क्योंकि मौन ही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।"
अरोही उस काले दरवाज़े के सामने पहुँच गई।
दरवाज़ा किसी पत्थर का नहीं था।
वह पूरी तरह काले धुएँ से बना हुआ था।
उस पर बनी सफेद हथेली अचानक चमक उठी।
एक गंभीर आवाज़ गूँजी—
"अपना नाम बताओ।"
अरोही कुछ क्षण चुप रही।
फिर उसने गर्व से कहा—
"मेरा नाम..."
"अरोही है।"
दरवाज़ा काँप उठा।
उस पर बने हजारों धुँधले अक्षर मिटने लगे।
आवाज़ फिर गूँजी—
"अपनी सबसे प्रिय स्मृति छोड़ दो।"
अरोही की आँखों के सामने एक-एक कर यादें तैरने लगीं।
पहले लेखक के साथ बिताया बचपन।
पेड़ के नीचे बैठकर कहानी लिखना।
उसका वादा—
"मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा।"
अरोही की आँखें भर आईं।
उसने धीरे से कहा—
"अगर यही कीमत है..."
"तो मैं तैयार हूँ।"
उसने अपना हाथ दरवाज़े पर रख दिया।
जैसे ही उसका हाथ दरवाज़े से छुआ...
सुनहरी रोशनी उसके शरीर से निकलकर दरवाज़े में समाने लगी।
अरोही दर्द से चीख उठी।
उसके सामने की सारी यादें धीरे-धीरे धुँधली होने लगीं।
उसे पहला लेखक याद नहीं रहा।
फिर उसका बचपन।
फिर उसका अपना घर।
फिर उसकी मुस्कान।
अनन्या दौड़कर आगे बढ़ी।
"नहीं... अरोही!"
लेकिन सत्यलेखक ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"रुको!"
"अगर तुमने उसे रोका..."
"तो बलिदान अधूरा रह जाएगा।"
अनन्या की आँखों से आँसू बह निकले।
वह केवल अरोही को देख सकती थी।
कुछ ही क्षणों बाद...
दरवाज़े पर बनी सफेद हथेली पूरी तरह सुनहरी हो गई।
घर्रररर...
मौन कक्ष का विशाल द्वार धीरे-धीरे खुलने लगा।
लेकिन उसी क्षण...
अरोही ज़मीन पर गिर पड़ी।
उसकी आँखें खुली थीं।
वह जीवित थी।
लेकिन उसके चेहरे पर अजीब खालीपन था।
अनन्या उसके पास बैठ गई।
"अरोही..."
अरोही ने उसकी ओर देखा।
और मासूमियत से पूछा—
"आप..."
"कौन हैं?"
यह सुनकर अनन्या का दिल टूट गया।
अरोही सब कुछ भूल चुकी थी।
उधर शब्दभक्षक ज़ोर से गरजा।
"नहीं!"
"यह द्वार नहीं खुलना चाहिए था!"
वह पूरी शक्ति से मौन कक्ष की ओर दौड़ा।
जहाँ उसके कदम पड़ते, वहाँ किताबें राख बनती जा रही थीं।
पूरा शून्य पुस्तकालय टूटने लगा।
ऊपर की विशाल अलमारियाँ गिरने लगीं।
करोड़ों किताबें हवा में उड़ने लगीं।
सत्यलेखक चिल्लाया—
"जल्दी अंदर जाओ!"
"मैं इसे कुछ देर रोकूँगा!"
उसने अपने दोनों हाथ फैलाए।
नीली रोशनी की विशाल दीवार शब्दभक्षक के सामने खड़ी हो गई।
पहली कहानी भी उसके साथ आ गई।
उसकी सुनहरी शक्ति और सत्यलेखक की नीली शक्ति मिलकर एक विराट प्रकाश बन गई।
पहली बार...
शब्दभक्षक कुछ क्षणों के लिए रुक गया।
अनन्या ने आरव की ओर देखा।
"अरोही को संभालो।"
आरव ने बिना कुछ कहे उसे उठाया।
चारों मौन कक्ष के भीतर प्रवेश कर गए।
जैसे ही वे अंदर पहुँचे...
द्वार अपने-आप बंद हो गया।
भीतर का दृश्य देखकर सब स्तब्ध रह गए।
वह कोई कमरा नहीं था।
वह एक अनंत गोलाकार सभागार था।
चारों ओर सफेद दीवारें थीं।
लेकिन उन दीवारों पर एक भी शब्द नहीं लिखा था।
न कोई चित्र।
न कोई चिन्ह।
न कोई आवाज़।
इतनी गहरी खामोशी थी कि अपनी धड़कन भी साफ सुनाई दे रही थी।
सभागार के बीचोंबीच एक सफेद आसन रखा था।
उसके ऊपर...
एक चमकती हुई कलम हवा में तैर रही थी।
लेकिन वहाँ कोई किताब नहीं थी।
अनन्या ने आश्चर्य से पूछा—
"किताब कहाँ है?"
तभी वही गंभीर आवाज़ फिर गूँजी—
"यहाँ कोई किताब नहीं होती।"
"यहीं से सभी किताबें जन्म लेती हैं।"
सभी चौंककर इधर-उधर देखने लगे।
आवाज़ दिखाई नहीं दे रही थी।
फिर धीरे-धीरे सफेद प्रकाश एक आकृति में बदलने लगा।
वह न पुरुष था।
न स्त्री।
न वृद्ध।
न युवा।
उसका पूरा शरीर सफेद प्रकाश से बना था।
उसकी आँखों में अनंत शांति थी।
उसने अनन्या की ओर देखकर कहा—
"स्वागत है..."
"मूल लेखक।"
अनन्या हैरान रह गई।
"मैं... मूल लेखक?"
प्रकाशमय आकृति मुस्कुराई।
"नहीं..."
"तुम नहीं।"
"तुम्हारे भीतर जो शक्ति जाग चुकी है..."
"वह मूल लेखन की शक्ति है।"
उसी क्षण मौन कक्ष के बाहर से एक भयानक धमाका हुआ।
धड़ाआआम!
पूरा सभागार हिल उठा।
सत्यलेखक की आवाज़ बाहर से सुनाई दी—
"अनन्या!"
"जल्दी करो!"
"शब्दभक्षक दीवार तोड़ रहा है!"
प्रकाशमय आकृति गंभीर हो गई।
उसने तैरती हुई कलम अनन्या की ओर बढ़ाई।
और कहा—
"अगर यह कलम गलत हाथों में चली गई..."
"तो केवल अधूरी किताब नहीं..."
"बल्कि हर कहानी हमेशा के लिए मिट जाएगी।"
अनन्या ने काँपते हाथों से कलम की ओर हाथ बढ़ाया।
और उसी क्षण...
मौन कक्ष की पहली दीवार में एक लंबी दरार पड़ गई।