बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 9 July Writes द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

बारिश की वो पहली मुलाक़ात - पार्ट 9

सीधी टक्कर 

शाम का वक्त था सुनसान पार्किंग एरिया में बारिश की हल्की हल्की फुहार हो रही थी और रोहित वहां अकेला टहल रहा था । दुर से अपनी तरफ एक कार को आते देख कर वो एकदम से खड़ा हो जाता है।


दूर से एक काली SUV आकर उसके बिल्कुल पास आकर रुकती है। दरवाज़ा खुलता है और उस कार में से तेजस्वी बाहर उतरता है। साफ सूट पहने , गोगल्स लगाए और चेहरे पर ठंडी मुस्कान लिए वो धीरे धीरे रोहित के और करीब आता है।


तेजस्वी धीमे स्वर में ताने भरे अंदाज में रोहित से कहता है...!  “कैसे हो, पुराने दोस्त?”
रोहित दांत में दांत चढ़ा कर गुस्से से कहता है! "दोस्त मत कहो मुझे..…!" “ और, मेरे घरवालों से दूर रहो ,  वरना...?” तेजस्वी शैतानी हंसी हंसते हुए धीरे-धीरे उसके और करीब आ जाता है।


फिर शैतानी हंसी हंसते हुए कहता है “घरवाले? या तुम्हारी कमजोरी...?”
रोहित का गुस्सा जैसे और उभर आता है।


“वो और भी जोर आवाज में चिल्लाते हुए कहने लगा ---- "अगर हिम्मत है तो मुझसे बदला लो।”
तेजस्वी उसकी आँखों में देखते हुए कहने लगा --- “तुझे मार दूँ तो सारा खेल ही खत्म हो जाएगा..."
"मैं तो तुझे ज़िंदा रखूँगा…  ताकि तु हर दिन डरे और हर दिन मरे..!"


वो  थोड़ा पास  झुककर फुसफुसाता हुए कहने लगा --- "अच्छा किया  अपनी पत्नी को बहन के घर भेज कर...., रिया  वहां सुरक्षित है… अभी तक।”
रोहित का खून खौल उठता है। वो उसका कॉलर पकड़ लेता है और तभी  तेजस्वी के आदमी तुरंत बंदूक निकाल लेते हैं।


कुछ सेकंड के लिए खतरनाक सन्नाटा छा जाता है। तेजस्वी मुस्कुराते हुए रोहित का हाथ अपने काँलर से हटाते हुए कहने लगा ---
“अब गुस्सा छोड़ भी दो रोहित , मेरे दोस्त...! अभी तो तुम्हें बहुत कुछ झेलना बाकी है...! " "थोड़ा समझदारी से खेलना होगा अब तुम्हें।”
वो ठंडी मुस्कान के साथ कहने लगा।


थोड़ी ही देर बाद SUV वहां से चली जाती है।
रोहित बारिश में भीगता रह जाता है। उसी रात, आईशा के घर में रिया बेचैन हो कर यहां वहां टहलती  रहती है , तभी डोरबेल बजता है । दरवाज़ा खुलते ही रोहित अंदर आता है।


उसका चेहरा तनाव से भरा हुआ था।
रिया घबरा कर पुछने लगी, "क्या हुआ रोहित...? क्या तुम उससे मिले थे...?”  लेकिन रोहित चुप , कोई जवाब नहीं देता । आईशा फिर पुछने लगी... "क्या उसने तुम्हें कुछ कहा...?" लेकिन तभी भी रोहित ख़ामोश रहता है,


आईशा सब समझ जाती है कि “ये मामला सिर्फ धमकी का नहीं रहा।” रोहित पहली बार टूटता हुआ दिखाई देने लगता है। वो अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे को ढांप कर कहने लगा ---


“मैंने सोचा था कि मैं सब कुछ संभाल लूँगा…
पर लगता है कि वो  बिल्कुल पागल हो चुका है।”
आरिफ़ उसके कंधे पर हाथ रखकर गंभीर स्वर में कहता है ---
“अब ये लड़ाई तुम्हारे अकेले की नहीं है , हम सब तुम्हारे साथ हैं...।”


कमरे में कुछ पल के लिए सन्नाटा पसर जाती है, रोहित धीरे-धीरे खिड़की की तरफ जाता है और बाहर की ठंडी हवा को अपने चेहरे पर महसूस करते हुए बिते दिनों में खोने लगता है....
लेकिन बाहर कोई  छाया में खड़ा , कोई नया जाल बिछाए उसि पर निगाहें जमाएं देख रहा है।

क्या करने वाला है तेजस्वी? और कैसे बचे गा  रोहित उसके जाल से? जानने के लिए पढ़ते रहें -- (बारिश की वो पहली मुलाक़ात ☂️ एक प्रेम कहानी ❤️)