दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 5 Piyu soul द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दरवाजा: काली हवेली का श्राप - 5

एपिसोड 5 — “जिसने श्राप दिया… वो तुम ही थी”

हवा… थम गई थी।पूरा हॉल…अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ था।अर्विका के सामने दो रास्ते खुले थे—

👉 एक… जहाँ पलक जिंदा खड़ी थी

👉 दूसरा… जहाँ अंधेरा था… और अंतउसके हाथ काँप रहे थे।दिल… बेकाबू।“चुन…

”वो आवाज़ फिर गूंजी,“या तो तू बचेगी…या ये दुनिया…”अर्विका की आँखों से आँसू बहने लगे।“मैं… ये कैसे decide करूँ…?”अचानक—पलक की आवाज़ आई—“अर्विका… मेरी तरफ आ…

”उसने उस रास्ते की तरफ देखा।पलक वहाँ खड़ी थी।जिंदा… मुस्कुराती हुई।“देख…”वो बोली,“सब ठीक हो जाएगा… बस इधर आ…”अर्विका एक कदम आगे बढ़ी।लेकिन तभी—“मत जा…”दूसरी तरफ से आवाज़ आई।वो…

अर्विका ही थी।उसकी परछाई।“ये illusion है…”उसने धीरे से कहा,“ये तुझे फँसा रही है…”अर्विका रुक गई।“तो… सच क्या है?”उसने कांपते हुए पूछा।परछाई मुस्कुराई—“सच… वो है जिसे तू याद नहीं करना चाहती…”अचानक—पूरी हवेली हिलने लगी।दीवारों से खून बहने लगा।और फिर—

🕳

अर्विका के सामने सब कुछ बदल गया।अब वो हवेली नहीं थी।एक गाँव…पुराना…डर से भरा हुआ।

लोग इकट्ठा थे।बीच में…वही लाल साड़ी वाली औरत।लेकिन इस बार…वो बंधी हुई थी।और उसके सामने…अर्विका।“ये… मैं हूँ…”उसकी सांस रुक गई।“हाँ…”परछाई बोली,“तेरा असली रूप…”अर्विका देख रही थी—वो खुद…गुस्से में थी।

“तूने सबको मार दिया…”उसने चिल्लाया,“तू शाप है!!”वो औरत रो रही थी—“मैंने कुछ नहीं किया…”“झूठ!!!”अर्विका ने मशाल उठाई,“तूने मेरे परिवार को मारा…

”अचानक—एक आदमी आगे आया।अद्विक।“रुको…”उसने कहा,“ये सच नहीं है…”“तू इसे बचाएगा?”अर्विका चिल्लाई,“ये चुड़ैल है!”अद्विक ने उसकी आँखों में देखा—“और अगर ये नहीं है…?”अर्विका एक पल के लिए रुकी।

लेकिन…भीड़ चिल्लाने लगी—“मारो!!! जला दो!!!”अर्विका का गुस्सा वापस आ गया।उसने मशाल फेंकी।आग फैल गई।वो औरत चीखने लगी—“तूने गलत किया…अब ये श्राप कभी खत्म नहीं होगा…”उसकी आँखें अर्विका में घुस गईं—“हर जन्म में…तू खुद को मारेगी…”

🕯 PRESENT

अर्विका घुटनों के बल गिर गई।“नहीं…”उसकी आवाज़ टूट गई,“मैंने… ये सब किया…”परछाई उसके पास आई—“तू ही वजह है…”“तो मैं… इसे खत्म कैसे करूँ?”अर्विका रो पड़ी।परछाई ने उसकी आँखों में देखा—

“तुझे वही करना होगा…जो तू हर बार करने से डरती है…”“क्या?”अचानक—दोनों रास्ते फिर सामने आ गए।इस बार…साफ दिख रहा था।

👉 पलक वाला रास्ता — illusion

👉 अंधेरा वाला रास्ता — सच“अगर तू पलक को चुनेगी…”परछाई बोली,“तो ये श्राप चलता रहेगा…”“और अगर…

”अर्विका कांपी,“मैं अंधेरा चुनूँ?”परछाई मुस्कुराई—“तो सब खत्म हो जाएगा…”“लेकिन मैं…?”“तू भी…”अर्विका की सांस रुक गई।“मतलब… मुझे मरना होगा…

”“हाँ…”अचानक—पीछे से पलक की चीख आई—“अर्विका!!! मुझे छोड़कर मत जा!!!”अर्विका ने पीछे देखा—पलक दर्द में थी।उसकी आँखें वापस normal हो रही थीं।“मैं वापस आ सकती हूँ…”पलक रोई,“बस मुझे बचा ले…”अर्विका टूट गई।“मैं तुझे नहीं खो सकती…”“तो आ…”पलक ने हाथ बढ़ाया।

अर्विका उसके करीब जाने लगी।लेकिन तभी—अद्विक की आवाज़ आई—“फिर वही गलती करेगी?

”अर्विका रुक गई।अद्विक सामने आया।लेकिन इस बार…उसकी आँखों में दर्द था।“मैंने भी वही किया था…”उसने धीरे से कहा,“मैंने उसे बचाने की कोशिश की…और सब खत्म हो गया…”“तो अब…?”अर्विका ने पूछा।अद्विक ने उसकी आँखों में देखा—“अब सही करना होगा…”

💀 अर्विका के सामने—

👉 पलक

👉 अंधेराउसकी सांसें तेज़।आँसू बह रहे थे।“माफ करना…

”उसने धीरे से कहा।और…वो मुड़ गई।अंधेरे की तरफ।पलक चीख उठी—“नहीं!!! अर्विका!!!”अर्विका ने आँखें बंद कीं…और कदम आगे बढ़ाया।जैसे ही वो अंधेरे में गई—पूरा संसार हिल गया।चीखें…रोशनी…टूटती दीवारें…और फिर—सन्नाटा।

💀 अंधेरे में…अर्विका अकेली खड़ी थी।फिर…

धीरे-धीरे एक रोशनी जली।उसके सामने…वही लाल साड़ी वाली औरत खड़ी थी।

लेकिन इस बार…वो मुस्कुरा रही थी।“तूने आखिरकार सही चुना…”अर्विका ने धीरे से पूछा—“अब… सब खत्म हो गया?”वो औरत धीरे-धीरे हँसी—

“नहीं…”उसकी आँखें काली हो गईं—“अब असली श्राप शुरू होगा…”


Hello buddies ☺️ Kaise ho ap sab aasha rakhti hu sab thik hoge or sabko Meri kahani pasand ai hogi please follow Kar let or ache review de ,jay shree Krishna 🙏

Take care be healthy and happy 


Piyu7soul ✍️❤️