गुफा मे चलते हुए अचानक से मधु का पैर एक पथर से टकरा जाता है, और एक दर्दनाक चीख के साथ जमीन पर जा गिरती है। उस पथर के उस जगह से खिसकते ही जादुई पानी का कलश रहस्यमयी रूप से निकल आता है।
मधु की चीख सुनकर मारकेश तांत्रिक तिलमिलाते हुए बोला, कौन है? जो मेरी गुफा मे मेरी इजाजत के बिना आया है. लगता है तुम्हे मरने की ज्यादा जल्दी है। मधु जल्दी से इस कलश को उठाओ, और यहाँ से चलो. राघव ने कहा।
मधु उस कलश को उठाती है और वे दोनों भागते-भागते उस गुफा से बाहर निकल जाते है। मारकेश उन्हें कलश ले जाते हुए देख लेता है और वह भी उन दोनों का पीछा करने लग जाता है।
राघव और मधु अचानक से रुक जाते है, "राघव अब क्या करे? आगे तो गहरी खाई और नीचे वो नीली झील, अगर हम यहाँ से कूदते समय चट्टानों से बच भी जाए, लेकिन नीली झील से कैसे जिन्दा बचेंगे" मधु ने डरते हुए कहा। इससे पहले की राघव कुछ सोच पाता, मारकेश तांत्रिक भी वहाँ पर पहुंच जाता है, और हस्ते हुए कहता है, अब कहाँ भागोगे!आगे तो नीली झील है जिसे तुम तैर कर तो पार नहीं कर सकते.
लाओ लडकी अब ये जादुई पानी का कलश चुप-चाप मुझे दे दो, राघव ने कहा, "कभी नहीं ये जादुई कलश हम कलिंगेश जिन्न और उसकी पत्नी के लिए लेकर जा रहे है" इसे हम नहीं देंगे, समझ आई बात!
मारकेश कहता है "कही तुम उस कलिंग प्रदेश के राजा कलिंगेश की बात तो नहीं कर रहे हो, जिसे मैंने अपने तंत्र से जिन्न बना दिया था। "हाँ, मै उसी राजा की बात कर रहा हूँ। राघव ने कह।
मारकेश बोला, तब तो तुम दोनों इस कलश को किसी भी कीमत पर नहीं लेकर जा सकते। मैंने सिर्फ उससे वो ग्रंथ और दिव्य अस्त्र मांगे थे पर उसने नहीं दिए, और इसीलिए, मैंने उसके पोते वीर को भी उठा लिया था।
"अब वीर कहा? तुमने क्या किया उसके साथ, कहीं तुमने से मार तो नहीं दिया" राघव ने गुस्से में कहा। ये सुनकर मारकेश हसने लग जाता है और कहा, "अगर मैंने तुम्हे बता भी दिया, फिर भी तुम कुछ नहीं कर सकते। वीर ऐसी जगह है, जहाँ तुम उसे चाहकर भी नहीं ढूंढ सकते।"
राघव ने कहा, बताओ तुम, वो हम देख लेगे वह हमें मिलता है या नहीं. मारकेश हस्ते हुए कहता है, अच्छा मज़ाक कर लेते हो लडके! तुम यहाँ से जिन्दा बचकर जाओगे, तभी तो उसे ढूंढ सकोगे।
चलो तुम दोनों की आखरी इच्छा यही है तो सुनो. वो इस समय लोखा नगर मे है. जोकि बहुत बडा नगर है. जहाँ हर तरफ जादुई शक्तियां है, वह नगर जितना सुंदर है उतना ही जादुई भी। मैंने वीर को उसी नगर के महा तांत्रिको को दे दिया है, जो मुझसे भी कई गुना ज्यादा शक्तिशाली है.
राघव ने हैरानी के साथ कहा, क्या महा तांत्रिक! मारकेश ने आगे कहा, हाँ और अब तुम दोनों को मरना होगा। मारकेश अपनी शक्तियों से मधु को बंदी बना लेता है. "छोड दो मेरी दोस्त को, नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा।" राघव ने चिल्लाते हुए कहा।
तभी राघव अपनी साधरण सी कांस्य की तलवार के साथ मारकेश पर हमला करने के लिए उसकी ओर दौड पडता है. मारकेश जादू से उसकी तलवार को तोड देता है, और हँसते हुए कहता, तुम्हारी तलवार तो बहुत कमजोर निकली लडके, तुम्हारे वार में ज़रा भी दम नहीं था, अब मैं दिखाता हूँ कि, वार करना किसे कहते है।
ये कहकर मारकेश राघव पर जादू कर देता है। जिसके कारण राघव उस पहाड से नीली झील मे गिरने लगता है। ये देखकर मधु की साँसे मानों थम सी गई हो। उसने चिल्लाते कहा, "राघव...." नहीं नहीं ये सच नहीं हो सकता। मारकेश ने कहा, तुम्हारा दोस्त तो, कुछ ही देर में उस नीली झील मे डूबकर मर जाएगा. अब तुम्हारी बारी है लड़की...."
राघव उस पहाड से गिरते हुए जोर चिल्लाया, "बाजीगर! कहाँ हो दोस्त? ज्ल्दी आओ मुझे तुम्हारी जरूरत है। डूबते हुए पत्थर की तरह राघव तेजी से नीली झील की ओर गिरे जा रहा था। राघव उस झील मे गिरने वाला होता ही था कि तभी बाजीगर विशालकाय बाज के रूप मे आता है,और उसे नीली झील मे गिरने से बचा लेता है।
"बाजीगर! मुझे जल्दी से दिव्य गिरी पहाड के ऊपर लेकर चलो! राघव ने कहा। बाजीगर कहता है, ठीक है दोस्त! कुछ ही देर मे बाजीगर उसे उस पहाड पर पहुंचा देता है.
राघव तुम जिन्दा हो! मधु के चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान आ जाती है। मधु एक तांत्रिक बंधन में बँधी हुई थी। तभी बाजीगर भी इंसानी रूप मे आ जाता है, राघव कहा, हाँ मुझे बाजीगर ने बचाया है. मारकेश कहता है, तो तुम बच गए लडके, अब तुम तीनो एक साथ मरोगे.
बाजीगर कहता है, दोस्त मै तुम्हारे साथ हूँ। तुम चिंता मत करो, मै अभी विशाल बाज का रूप बदलता हूँ और इसे सबक सिखाता हूँ. लेकिन उससे पहले ही मारकेश अपनी शक्ति से उन दोनों को भी तांत्रिक बंधन मे बाँध देता है.
राघव ने कहा, बाज़ीगर! तुम इस बंधन को तोड सकते हो क्या? बाजीगर ने निराशा के साथ कहा, नहीं दोस्त, मै... इस बंधन को नहीं तोड सकता। ये एक तांत्रिक बंधन है, जिसे सबसे शक्तिशाली जादू या तंत्र से ही तोडा जा सकता है। और इतनी शक्ति मेरे अंदर नहीं है।
मारकेश कहता है, मेरे तंत्र को तोड दो, तुम तीनो मे से किसी के पास इतनी शक्ति नहीं है. तुम तीनो मिलकर भी इस तांत्रिक बंधन को नहीं तोड सकते, समझे कमजोरों!
मारकेश तीनो पर एक बार फिर जादू कर देता है और पूरे पहाड पर भी अपनी शक्ति से एक जादुई सुरक्षा कवच बना देता है और हँसते हुए कहता है, "अब कुछ ही देर मे तुम तीनो को जलने की अनुभूति होंगी और धीरे जलकर मर जाओगे." जब मेरे तंत्र से वो कलिंगेश राजा नहीं बच सका तो, तुम तीनो कैसे बचोगे?
मधु को तभी जादुई तलवार का ख्याल आता है जो कलिंगेश ने राघव को दी थी, और कहती है, राघव उस तलवार को बुलाओ! अब सिर्फ वही तलवार ही हमें बचा सकती है। "एक second रुको! मधु कहीं तुम उस घमंडी तलवार की तो नहीं बात कर रही हो, जिसने मेरा हाथ भी जख्मी कर दिया था, राघव ने कहा।
मधु कहती है, हाँ राघव मैं उसी तलवार की बात कर रही हूँ, अब वहीं हमारी आखिर उम्मीद है।
राघव ने कहा, मधु तुम ये क्या कह रही हो? वो घमंडी तलवार क्या नाम था उसका, हाँ "महिमा" तुम्हे लगता है, वो मेरे बुलाने से आ जाएगी। मै कैसे बुलाऊ मुझे नहीं पता कि वह कैसे आएगी. मुझे तो कोई मंत्र भी नहीं आता उसे बुलाने का और आ भी गई तो मै उसे कैसे चलाऊंगा।
मारकेश कहता है, शायद तुम भूल गए हो कि मैंने इस पूरे पहाड पर भी अपनी शक्ति से कवच बनाया हुआ है, जिसे तोडना पहाड़ तोड़ने से भी कई गुना मुश्किल काम है।
मधु ने एक उम्मीद के साथ कहा, एक बार बुलाने की कोशिश तो करो। राघव कहता है, आजा मेरी तलवार! पर वह नहीं आती. तभी उन तीनो जलने की अनुभूति होने लगती है। मधु ने दर्द भरी आवाज़ में कहा, उसे दोस्त की तरह बुलाओ. जैसे की तुम्हे उसकी जरूरत है और इस समय वही तुम्हारी मदद कर सकती है, और कोई नहीं!
राघव ने फिर कहा, आजा मेरी तलवार, पर फिर भी वह नहीं आती. बाजीगर कहता है, अब हमें कोई नहीं बचा सकता. कुछ ही देर मे हम तीनो जलकर मर जाएंगे. राघव अपने दोस्तों की ओर देखता है जोकि बहुत दर्द मे थे, इस समय राघव अपने आपको बहुत बेबस महसूस कर रहा था। उसकी आँखें नम हो जाती है, और चिल्लाते हुए कहा, महिमा तलवार! तुम्हे आना ही होगा, मुझे नहीं तो मेरे दोस्तों को बचाने के लिए तुम्हे आना ही होगा. आगे क्या हुआ? क्या वह जादुई तलवार आएगी?
जानने के लिए पढ़ते रहिये...