बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 16 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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बर्बाद इश्क प्यार खेल नहीं - एपिसोड 16

बर्बाद इश्क
एपिसोड 16 — जब असली तूफ़ान आया
मुंबई में कहते हैं कि जब एक मुसीबत जाती है तो दूसरी दरवाज़ा खटखटाती है।
ज़ाफ़र गया।
लेकिन इमरान आया।
और इमरान — इमरान ज़ाफ़र से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक था।
💥 इमरान — एक नया ख़ौफ़
रात के बारह बजे।
मुंबई के एक बड़े होटल में।
एक कमरे में बैठा था — इमरान।
पैंतालीस साल का। भारी जिस्म। आँखों में एक ठंडी क्रूरता।
सामने उसके पाँच आदमी थे।
"ज़ाफ़र पकड़ा गया।" इमरान ने कहा। आवाज़ धीमी थी। लेकिन उसमें एक ख़तरा था। "मेरा भाई — पुलिस के हाथ में है।"
कोई नहीं बोला।
"रणवीर मेहता।" इमरान ने नाम लिया। "उसने यह किया।"
"जी सरकार।"
इमरान ने गिलास उठाया। एक घूँट लिया।
"ज़ाफ़र कमज़ोर था। वह लड़कियों को उठाता था। माँ को इस्तेमाल करता था।" इमरान ने गिलास रखा। "मैं अलग हूँ।"
"क्या करेंगे सरकार?"
इमरान ने एक काग़ज़ निकाला।
उस पर तीन नाम थे।
नायरा। रिया। ईशानी।
"इन्हें हाथ नहीं लगाएंगे।" इमरान ने कहा।
आदमी हैरान हुए।
"तो?"
"सीधे उन तीनों पर वार करेंगे।" इमरान ने कहा। "रणवीर। आदित्य। दानिश।"
"कैसे सरकार?"
इमरान मुस्कुराया।
"पहले उनकी दुनिया बर्बाद करेंगे। कारोबार। नाम। सब।"
💥 रणवीर — नई सुबह नई मुसीबत
अगली सुबह।
रणवीर ऑफ़िस में था।
सलीम आया।
"भाई — ख़बर है।"
"क्या?"
"इमरान — ज़ाफ़र का बड़ा भाई — मुंबई में है।"
रणवीर ने सलीम को देखा।
"कब आया?"
"कल रात। सीधे होटल में रुका है।"
"कितने आदमी हैं उसके साथ?"
"भाई — पचास से ज़्यादा। और — इमरान अकेला नहीं है। उसके पीछे दिल्ली का एक बड़ा नाम है।"
"कौन?"
"राणा साहब।"
रणवीर का चेहरा गंभीर हो गया।
राणा — मुंबई और दिल्ली दोनों में जिसका नाम था। जिसने कभी हार नहीं मानी।
"विक्रम भाई को बताओ।"
"जी।"
"और आदित्य-दानिश को बुलाओ।"
आधे घंटे में चारों एक कमरे में थे।
विक्रम मेहता। रणवीर। आदित्य। दानिश।
सलीम ने पूरी जानकारी दी।
विक्रम चुप रहे।
फिर बोले — "राणा।"
"हाँ।"
"यह — यह पुरानी दुश्मनी है।" विक्रम ने कहा।
"आपकी?" रणवीर ने पूछा।
"हाँ।" विक्रम ने आँखें बंद कीं। "बीस साल पहले — राणा चाहता था मुंबई पर क़ब्ज़ा। मैंने रोका था। वह — वह भूला नहीं।"
"और अब इमरान के ज़रिए आया है।"
"हाँ।"
दानिश ने कहा — "तो यह सिर्फ़ ज़ाफ़र की बात नहीं थी।"
"नहीं।" विक्रम ने कहा। "यह राणा की चाल थी। शुरू से।"
कमरे में ख़ामोशी।
आदित्य ने कहा — "तो अब?"
विक्रम ने तीनों को देखा।
"अब — असली लड़ाई शुरू होती है।"
💔 आदित्य और रिया — एक ज़रूरी बात
उसी दिन दोपहर।
आदित्य रिया से मिला।
वह उसके घर के बाहर था।
रिया निकली।
"आज जल्दी?" उसने पूछा।
"हाँ। बात करनी है।"
दोनों पास के एक छोटे से पार्क में गए।
बैठे।
आदित्य ने एक पल सोचा।
"रिया — एक बात कहनी है।"
"कहो।"
"मेरी दुनिया — आगे और मुश्किल होने वाली है।"
रिया ने उसे देखा।
"कितनी मुश्किल?"
"बहुत।" आदित्य ने सीधे कहा। "एक नया दुश्मन आया है। और यह — यह पहले से ज़्यादा ख़तरनाक है।"
रिया चुप रही।
"मैं — मैं नहीं चाहता कि तुम इसमें आओ।"
"मैं पहले से इसमें हूँ।" रिया ने कहा।
"रिया—"
"आदित्य।" उसने उसे देखा। "जब तुम्हें चोट लगी थी — मैं आई थी। जब तुमने बताया कि काम साफ़ नहीं — मैं रुकी थी। अब यह नया क्या है?"
"यह — यह जानलेवा है।"
रिया की आँखों में एक पल डर आया।
लेकिन वह गई नहीं।
"आदित्य — मैंने कहा था — एक क़दम एक बार।"
"हाँ।"
"तो — अभी का क़दम यह है कि — मैं यहाँ हूँ।"
आदित्य ने उसे देखा।
"रिया — अगर कुछ हो गया तो?"
"तो देखेंगे।" रिया ने कहा। "लेकिन — डर से पहले ही हार मत मानो।"
आदित्य ने एक लंबी साँस ली।
"एक बात और है।"
"क्या?"
"जब तक यह सब चल रहा है — तुम्हें — सावधान रहना होगा।"
"ठीक है।"
"और — रिया।"
"हाँ।"
आदित्य ने उसकी आँखों में देखा।
"मुझे — तुम्हारी परवाह है। बहुत ज़्यादा। इसीलिए डर लगता है।"
रिया के गाल लाल हो गए।
उसने नज़र हटाई।
"यह — यह बाद में बताते।"
आदित्य ने हल्के से हँसते हुए कहा — "अभी बताना था।"
रिया ने उसे एक नज़र देखा।
और मुस्कुराई।
वह मुस्कान — जो आदित्य ने दिल में रख ली।
😏 दानिश और ईशानी — जब ईशानी ने देखा असली दुनिया
उसी शाम।
दानिश ईशानी से मिला।
वह कॉफ़ी शॉप में थे।
दानिश के चेहरे पर फ़िक्र थी।
ईशानी ने देखा।
"क्या हुआ?"
"कुछ नहीं।"
"फिर वही झूठ।"
दानिश ने एक पल देखा।
फिर बताया।
इमरान। राणा। नई मुसीबत।
ईशानी ने सुना।
चुप रही।
"डर गई?" दानिश ने पूछा।
"हाँ।" ईशानी ने सीधे कहा।
"मेरी वजह से?"
"हाँ।"
दानिश ने नज़र हटाई।
"ईशानी — अगर तुम—"
"दानिश।" उसने उसे रोका।
"हाँ।"
"मैं डरी हूँ। लेकिन — जाऊँगी नहीं।"
दानिश ने उसे देखा।
"क्यों?"
ईशानी ने एक पल सोचा।
"क्योंकि — जो इंसान मुझे यह एहसास दिला सके कि मैं काफ़ी हूँ — उसे छोड़ना — मेरे बस का नहीं।"
दानिश की आँखें भर आईं।
पहली बार किसी के सामने।
उसने जल्दी से नज़र हटाई।
ईशानी ने देखा।
उसने दानिश का हाथ थामा।
"लेकिन — एक शर्त है।"
"क्या?"
"सब कुछ बताओ। छुपाओ मत।"
"ठीक है।"
"वादा?"
"वादा।"
ईशानी ने उसका हाथ कसकर थामा।
और दानिश ने — पहली बार — किसी के सामने कमज़ोर होना स्वीकार किया।
💥 इमरान का पहला वार
रात के दस बजे।
रणवीर का फ़ोन बजा।
सलीम।
"भाई — इमरान ने पहला वार किया।"
"क्या?"
"भाई — हमारी तीन दुकानें — जो साफ़ कारोबार था — उन पर पुलिस का छापा पड़ा।"
रणवीर की आँखें तन गईं।
"राणा का हाथ है।"
"हाँ भाई। पुलिस में उसके आदमी हैं।"
"कितना नुकसान?"
"भाई — करोड़ों में। और — एक बात और।"
"क्या?"
"हमारे दो आदमी पकड़े गए हैं।"
रणवीर ने फ़ोन रखा।
आदित्य को बुलाया।
"इमरान ने पुलिस को हमारे ख़िलाफ़ किया।"
आदित्य का चेहरा गंभीर हो गया।
"राणा का काम है।"
"हाँ। वह ताक़त से नहीं — सिस्टम से लड़ रहा है।"
"तो हमें भी उसी से लड़ना होगा।"
"हाँ।" रणवीर ने कहा। "लेकिन पहले — नायरा। रिया। ईशानी। तीनों को safe जगह पर।"
"वह मानेंगी?"
रणवीर ने एक पल सोचा।
"मनाना होगा।"
रात को।
रणवीर नायरा के घर के बाहर था।
उसने दरवाज़ा खटखटाया।
नायरा ने खोला।
रात के ग्यारह बजे रणवीर को देखकर चौंकी।
"इतनी रात को?"
"हाँ। बात करनी है।"
नायरा ने रास्ता दिया।
अंदर आए।
माँ सो चुकी थीं।
दोनों बैठे।
रणवीर ने सब बताया।
इमरान। राणा। नई मुसीबत।
नायरा ने सुना।
"तो?"
"तो — कुछ दिन के लिए — तुम्हें और माँ को — किसी safe जगह जाना होगा।"
नायरा ने उसे देखा।
"यानी — भागना?"
"नहीं। सुरक्षित रहना।"
"फ़र्क़?"
"नायरा—"
"रणवीर।" उसने उसे देखा। "मैं कहीं नहीं जाऊँगी।"
"नायरा — यह ख़तरनाक है।"
"तुम ख़तरनाक हो। तुम्हारी दुनिया ख़तरनाक है।" नायरा ने सीधे कहा। "लेकिन मैंने जाना था तो पहले दिन जाती।"
"यह — यह पहले से अलग है।"
"कैसे?"
रणवीर ने उसकी आँखों में देखा।
"क्योंकि — पहले मुझे सिर्फ़ तुम्हारी परवाह थी। अब — अब मैं तुम्हें खोने से डरता हूँ।"
नायरा की साँस रुकी।
"रणवीर।"
"हाँ।"
"यह — यह बहुत बड़ी बात कही तुमने।"
"जानता हूँ।"
नायरा ने एक पल सोचा।
फिर कहा — "ठीक है। माँ को भेज देती हूँ। लेकिन मैं — मैं यहीं रहूँगी।"
"नायरा—"
"रणवीर — अगर मैं भाग गई — तो वह जीत जाएँगे। और तुम — तुम अकेले लड़ोगे।" उसने उसकी आँखों में देखा। "मैं — तुम्हें अकेला नहीं छोड़ूँगी।"
रणवीर ने उसे देखा।
लंबे समय तक।
फिर धीरे से कहा — "नायरा।"
"हाँ।"
"मुझे — तुमसे प्यार है।"
कमरे में ख़ामोशी।
नायरा की आँखें भर आईं।
वह मुस्कुराई।
वह मुस्कान — जो सिर्फ़ रणवीर के लिए थी।
"पागल।" उसने धीरे से कहा।
"हाँ।"
"मुझे भी।"
रणवीर ने उसका हाथ थामा।
और उस रात — मुंबई में — एक गैंगस्टर और एक बेकरी वाली लड़की के बीच — एक ऐसी बात हुई जो दोनों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई।
इमरान का पहला वार हुआ था।
लेकिन तीनों भाइयों के दिल में — तीनों लड़कियों की वजह से — एक नई ताक़त थी।
और राणा — वह अभी बहुत दूर था।
लेकिन आ रहा था।
बर्बाद इश्क — जारी है।
(एपिसोड 17 जल्द आएगा...) 🔥