इतिहास के पन्नों से 25
नोट - ‘ वैसे तो इतिहास अनंत है ‘ इस शृंखला में इतिहास की कुछ घटनाओं के बारे में पहले प्रकाशित भागों में उल्लेख है, अब आगे पढ़ें -
1 . मैनहट्टन परियोजना ( The Manhattan Project ) - मैनहट्टन परियोजना अमेरिका की एक अत्यंत गुप्त परियोजना थी जिसका मुख्य कारण ‘ परमाणु बम ‘ बनाना . उस समय द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था . इस योजना का आरम्भ 1942 और अंत 1946 में हुआ था . कुछ लोगों के अनुसार इस योजना की नींव 1939 में ही पड़ी थी पर व्यावहारिक रूप से मैनहट्टन परियोजना का आरम्भ 1942 और अंत 1945 में ही होगया था जब अमेरिका ने अपने दोनों परमाणु बम क्रमशः हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराया था . इन बमों के गिरने से जान माल की अपार क्षति हुई थी और वैज्ञानिकों को उनके सामरिक परिणाम देखते हुए इसे अवश्य सफल माना होगा .
मैनहट्टन परियोजना से संबंधित वैज्ञानिक - मैनहट्टन परियोजना का कमान जनरल लेस्ली आर ग्रोव्स के हाथों में थी . जनरल लेस्ली को परमाणु बम के निर्माण के लिए एक टीम के गठन ( जिसमें वैज्ञानिक का चुनाव , अनुसंधान , उत्पादन , सुरक्षा आदि सभी पहलुओं ) और नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गयी थी . इस परियोजना के अंतिम उद्देश्य ( द्वितीय विश्व युद्ध के लिए परमाणु बम बनाना ) की बात चंद विश्वासपात्र लोगों को पता थी हालांकि इस परियोजना में हजारों लोग शामिल थे . इस परियोजना के मुख्य वैज्ञानिक जनरल रोबर्ट ओपेनहाइमर थे . मैनहट्टन परियोजना में अमेरिका के अतिरिक्त ब्रिटेन और कनाडा भी शामिल थे .
मैनहट्टन परियोजना गुप्त क्यों -
रणनीतिक बढ़त - द्वितीय विश्व युद्ध चरम सीमा पर था . जर्मन नाजी सेना भी मित्र राष्ट्रों ( अमेरिका , ब्रिटेन और सोवियत यूनियन ) की सेना पर भीषण आक्रमण कर रही थी . संयुक्त राज्य अमेरिका जल्द से जल्द परमाणु बम बना कर नाज़ी सेना को हरा कर युद्ध पर विजय प्राप्त करना चाहती थी . यदि दुश्मन राष्ट्रों ( जापान , जर्मनी और इटली ) की सेना को इस परियोजना की भनक मिल जाती तो वे भी ऐसा बम जल्दी से बनाने का प्रयास कर सकते थे . ऐसी स्थिति में युद्ध का परिणाम मित्र राष्ट्रों के हित में नहीं हो सकता था .
शत्रु देश की जासूसी का भय - मित्र राष्ट्रों को आशंका थी कि कहीं दुश्मन को मैनहट्टन परियोजना की भनक न लग जाए और वह इसे विफल करने या देर तक टालने के लिए कुछ न कुछ बाधा डाले .
जनता के बीच परमाणु बम के विनाश का भय - अगर जनता को इस परियोजना का पता चल जाता तब इस के विनाशकारी प्रभाव को देख कर अराजकता फैलने का डर था . परियोजना स्थलों को सुरक्षित घेरे में रखना और उन्हें चौबीस घंटे पहरे में रखना पड़ता था .
मैनहट्टन परियोजना को गुप्त रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना जरूरी था . इसके लिए ऐसे स्थलों का चुनाव किया गया जहाँ तक आम लोगों की पहुँच न हो और इस पर कठोर नियंत्रण हो सके .
प्रथम परमाणु बम गिराना - तीन दिनों के अंतराल में जापान के दो औद्योगिक शहरों पर परमाणु बम गिराए गए -
1 . पहला बम लिटिल बॉय
शहर का नाम - हिरोशिमा शहर पर
विमान का नाम - एनोला गे ( Enola Gay )
विमान का प्रकार - B - 29 बॉम्बर
पायलट का नाम - कर्नल पॉल टिबेट्स
समय - 6 अगस्त 1945 , समय प्रातः - 8.15 am
गौर करने की बात यह है कि पायलट टिबेट्स के निधन पर न कोई औपचारिक अंतिम संस्कार हुआ था और न ही कोई उनकी समाधि शिला थी . अपनी मृत्यु के कुछ पहले उन्होंने यही इच्छा व्यक्त की थी . उन्हें भय था कि पहली बार उनके परमाणु बम गिराने के बाद हुए विनाश को देख कर कहीं उनकी कब्र ऐसा स्थल न बन जाए जहाँ लोग आ कर विरोध प्रदर्शन किया करें . पॉल टिबेट्स का अंतिम संस्कार अमेरिकी सैन्य सम्मान के साथ एक प्राइवेट आयोजन था .
2 . दूसरा बम - फैट मैन
शहर का नाम - नागासाकी शहर पर
विमान का नाम - बॉकस्कार (Bockscar)
विमान का प्रकार - B - 29 बॉम्बर
पायलट का नाम - चार्ल्स स्वीनी
समय - 9 अगस्त 1945 , समय प्रातः -11. 02 am
मैनहट्टन परियोजना का महत्व -
यह कहना गलत नहीं होगा कि परमाणु बम गिराए जाने के बाद तुरंत शत्रु देश पराजय स्वीकार कर आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हुआ और WW2 जल्द ही समाप्त हो गया था .
परमाणु बम के अविश्वसनीय विनाशकारी और विभीषिका से दुनिया का प्रथम बार साक्षात्कार हुआ .
WW 2 में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने का अति विनाशकारी प्रभाव दुनिया ने पहली बार देखा . जहाँ एक तरफ परमाणु बम शक्ति प्रतीक था दूसरी तरफ इसका विनाशकारी परिणाम देखते हुए आज तक दोबारा किसी भी युद्ध में इसे इस्तेमाल नहीं किया गया है . यह मानवता के प्रति घोर अपराध है .
जिओ पॉलिटिकल ( geopolitical ) - प्रथम परमाणु बम के प्रभाव को देखते हुए अन्य देशों में भी परमाणु बम बनाने की होड़ लग गयी . माना जाता है कि अब तो यह नौ देशों के पास है और कम से कम आधा दर्जन अन्य देश इसे बनाने में सक्षम हैं .
विज्ञानं और उद्योग का संगम - WW 2 में परमाणु बम गिराए जाने के बाद वैज्ञानिकों ने परमाणु शक्ति को पहचाना . परमाणु को युद्ध के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में उपयोग में लाने की योजना का आरम्भ और विकास हुआ - न्यूक्लियर ऊर्जा से पावर प्लांट , न्यूक्लियर पनडुब्बी और स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रयोग में आया .
क्रमशः