Raaz - Part 5 Aarushi Singh Rajput द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Raaz - Part 5

अवंतिका ने दरवाज़ा पूरा खोल दिया।

"अंदर आइए," उसने धीरे से कहा।

कमला बाई कुछ पल वहीं खड़ी रही, जैसे अंदर जाने से पहले किसी चीज़ को महसूस कर रही हो। फिर वह धीरे-धीरे कमरे में दाखिल हुई। उसके हर कदम में एक अजीब-सी भारीपन थी, जैसे उम्र सिर्फ शरीर पर नहीं, बल्कि आत्मा पर भी बोझ बनकर बैठ गई हो।

वह जाकर एकमात्र कुर्सी पर बैठ गई।

कमरा शांत था। बाहर कहीं मेहर की हल्की आवाज़ सुनाई दे रही थी, लेकिन इस कमरे में सब कुछ जैसे रुक गया था।
अवंतिका सामने बिस्तर के किनारे बैठ गई। दोनों के बीच कुछ देर चुप्पी रही।

फिर अवंतिका ने सीधे पूछा,

"श्यामला कौन है?"

कमला बाई ने अपने हाथों की तरफ देखा, फिर धीरे से बोली,
"पहले तू मुझे बता… काली कोठी में क्या देखा था?"
अवंतिका ने एक-एक करके सब बताया—दीवारों पर बनी मिटाई हुई तस्वीरें, साफ़ मेज़, नंगे पैरों के निशान, वह अजीब धुन और तीसरी मंज़िल की खिड़की वाली औरत।

कमला बाई पूरी बात ध्यान से सुनती रही, बीच में एक शब्द भी नहीं बोला।

जब अवंतिका चुप हुई, तो उसने गहरी साँस ली।
"वह धुन तुझे जानी-पहचानी लगी थी?"

"हाँ," अवंतिका ने कहा।

कमला बाई कुछ देर खिड़की की तरफ देखती रही, फिर बोली,

"चंदनगढ़ बहुत पुरानी जगह है… यहाँ कभी एक छोटा सा राज्य था। राजा विक्रम सिंह और रानी चंद्रावती।"

अवंतिका ने नोटबुक खोल ली।

"रानी चंद्रावती बहुत शक्तिशाली और बेहद संवेदनशील थी," कमला बाई ने आगे कहा। "वह अपने राज्य से, अपने लोगों से बहुत जुड़ी थी। लेकिन एक दिन राजा ने उसे धोखा दिया।"

अवंतिका ने नज़र उठाई।

"जब रानी को पता चला, तो उसने सवाल किया… लेकिन जवाब के बदले उसे पागल कह दिया गया। और उसे काली कोठी में बंद कर दिया गया।"

कमला बाई की आवाज़ धीमी हो गई।

"कहा गया—तू बीमार है। और उसे अकेले अंधेरे में छोड़ दिया गया।"

कमरे में सन्नाटा गहरा हो गया।

"सात साल वह वहीं रही," कमला बाई ने कहा।

अवंतिका कुछ नहीं बोली।

"और फिर?" उसने धीरे से पूछा।

"फिर उसने अंधेरे को अपना लिया," कमला बाई बोली। "जब इंसान के पास कुछ नहीं बचता, तो वह अंधेरे से ही रिश्ता बना लेता है। रानी चंद्रावती ने भी वही किया।"

"और श्यामला?"

कमला बाई ने उसे देखा।

"वह कोई इंसान नहीं है… न पूरी तरह कोई आत्मा। वह रानी के उसी दर्द से पैदा हुई थी। जैसे इंसान का सबसे गहरा डर और दर्द एक रूप ले ले।"

अवंतिका ने यह सुनकर कलम रोक दी।

"तो वह मुझे क्यों दिखती है?"

कमला बाई कुछ पल चुप रही, फिर बोली,

"क्योंकि उसका तुझसे कोई रिश्ता है। सिर्फ तुझसे।"
"कैसा रिश्ता?"

"यह मैं नहीं जानती," उसने ईमानदारी से कहा।

फिर वह उठने लगी, लेकिन रुक गई।

"तेरी बाईं आँख के पास जो तिल है… वह वही निशान है जो रानी चंद्रावती के चेहरे पर भी था।"

अवंतिका का हाथ अनजाने में अपनी आँख की तरफ चला गया।

"इसका मतलब क्या है?"

"मतलब मैं भी पूरी तरह नहीं जानती," कमला बाई ने कहा। "लेकिन इतना जरूर है कि जिस लड़की में यह निशान होता है, वह इस जगह से जुड़ी होती है। और जब वह आती है…

तो श्यामला जाग जाती है।"

यह सुनकर अवंतिका के अंदर एक ठंडक उतर गई।

"वह अभी जागी है?"

कमला बाई ने धीरे से सिर हिलाया।

"हाँ। और अब वह सिर्फ तुझे देखती है।"

कुछ पल रुककर उसने एक और सवाल किया,

"तेरी माँ ने कभी तुझे वह धुन गाई थी?"

अवंतिका चौंक गई।

"आपको मेरी माँ के बारे में कैसे पता?"

"गाई थी?" कमला बाई ने फिर पूछा।

अवंतिका की आँखों में पुरानी यादें तैर गईं।

"हाँ… वह लोरी जैसी गुनगुनाती थीं। वही धुन।"

कमला बाई का चेहरा गंभीर हो गया।

"तेरी माँ इसी जगह से थीं। चंदनगढ़ से।"

यह सुनकर अवंतिका जैसे जम गई।

"क्या…?"

"और जब तू पैदा हुई… तो वह यहाँ से चली गईं," कमला बाई ने कहा।

"क्यों?"

"क्योंकि वह डर गई थीं," उसने सीधा जवाब दिया। "उन्हें पता था कि यह निशान क्या मतलब रखता है।"

कमरे में भारी सन्नाटा फैल गया।

कुछ देर बाद कमला बाई ने दरवाज़े की तरफ देखा।
"अब मुझे जाना होगा।"

"लेकिन आप मुझे सब बता नहीं रही हैं…"

कमला बाई ने पीछे मुड़कर कहा,

"कुछ बातें खुद ढूँढनी पड़ती हैं। और कुछ बातें अगर बता दी जाएँ… तो वह चीज़ जाग जाती है।"

इतना कहकर वह चली गई।

अवंतिका काफी देर तक वहीं बैठी रही। उसके दिमाग में सवाल ही सवाल थे—माँ, धुन, तिल, श्यामला… सब कुछ उलझा हुआ था।

तभी दरवाज़ा खुला।

मेहर अंदर आई, हाथ में chips का packet था।

"क्या हो रहा है? तू घंटों से बंद है यहाँ," उसने हल्के मज़ाक में कहा।

लेकिन अवंतिका चुप रही।

"तू ठीक है?"

"हाँ," उसने कहा।

"झूठ," मेहर तुरंत बोली।