बेशक बदनाम हूँ
ज़ाहिर है आशिक हूँ तो बेशक बदनाम हूँ l
कायनात के रीति रिवाजों से अनजान हूँ ll
बेपनाह बेइंतिहा इश्क़ से मालामाल रहता l
किसी हसीन कमसिन दिल का अरमान हूँ ll
शिद्दत से चाहत के साथ रूह से जुड़ी हुई l
ख़त्म न होने वाली मोहब्बत की पहचान हूँ ll
कायनात में अमन और मोहब्बत फैलाने को l
ईश्वर का भेजा हुआ प्यारा सा फरमान हूँ ll
किसी भी बात की कसर नहीं ईश ने छोड़ी l
अपने और अपनों के प्यार से धनवान हूँ ll
१६-६-२०२६
आस
आस का दीपक जलाये रखना l
दिल में श्रद्धा को बनाये रखना ll
कभी भी ले जाने को आएँगे तो l
हाथों में मेहंदी सजाये रखना ll
ताउम्र साथ निभाने का सखी l
दिया हुआ वादा निभाये रखना ll
जीने का असली मजा आएगा जब l
दूरियों को मन से मिटाये रखना ll
जन्मों जन्म की प्यास बुझाने को l
मोहब्बत का जाम पिलाये रखना ll
१७-६-२०२६
गोरैया
गोरैया आहिस्ता उड़ो कहीं अरमान छलक ना जाये ll
बादलोंने और पंखीओने ख़ुशीयों से मधुर गीत
गाये ll
उड़ान लम्बी और ऊंचाई पर कर के मज़ा आ
जाए l
आसमाँ में सफेद दूध जैसे बादलों के पहाड़ आये ll
हौसलों की उड़ान सबसे हसीन मंजर रहेगा
की l
कायनात के खूबसूरत ओ बहेतरीन नजारे
पाये ll
आशिकी मिजाज रखती है तो आज खुल्ले
से l
आसमाँ की वादियों को चीरते हुए मस्ती
मनाये ll
चार दिन जीने को आये है तो साथ मिलके
ही l
मोहब्बत और प्यार से छोटी जिंदगी को
सजाये ll
१८-६-२०२६
रंग
रंग नीली सी आँखों का भा गया हैं l
पहेली नजर में दिल पे छा गया हैं ll
तीर जैसे चुभ गया पहला ही वार l
ना मिटने वाला ज़ख्म लगा गया हैं ll
रंगबेरंगी दुनिया की जगमगा कर l
मोहब्बत की दुनिया सजा गया हैं ll
ये क्या जादू कर दिया आशिकी ने l
निगाहों से दिल में समा गया हैं ll
कातिल बेइन्तहा इश्क़ सीखा के l
दीवाना सा मजनू बना गया हैं ll
१९-६-२०२६
रूप
इन्सान हर लम्हा रूप बदलता रहता हैं l
बात से अपनी कभी भी पलटता रहता हैं ll
कभी शब्दों से तो कभी ख़ामोशी से वो l
औरों के सामने यूहीं मचलता रहता हैं ll
ना जाने कितने चहरे छिपे नकाब के पीछे l
बिना कुछ किए हुए छलकता रहता हैं ll
कभी शैतान तो कभी फ़रिश्ता बनता l
जूठी शान ओ अहम में चमकता रहता हैं ll
वक्त की नज़ाकत औ हालात की पहचान l
सदा दूसरों को ही परखता रहता हैं ll
जिंदगी के उतार चढ़ाव में ढलकर वो l
परिस्थियों के संग पनपता रहता हैं ll
कभी हँसता, कभी रोता अनजान ही l
वक्त के बहाव संग सरकता रहता हैं ll
२०-६-२०२६
अच्छा होगा
बात दिल की बता दी जाए तो अच्छा होगा l
दो घड़ी चैन ओ सुकून पाए तो अच्छा होगा ll
एसा नहीं की गम की दौलत से मालामाल है l
रोजबरोज खुशियों को लाए तो अच्छा होगा ll
नशीली वादियों में हाथों में हाथ डाल कर l
इश्किया से भरे गीत गाए तो अच्छा होगा ll
पकड़ लिया है दामन-ए-सब्र जीने के लिए l
सुबह सवेरे ताज़गी समाए तो अच्छा होगा ll
क्या पता साँसे कब तक साथ निभाएंगी तो l
हर दिन रात जश्न मनाए तो अच्छा होगा ll
२१-६-२०२६
मेरा गाँव भाता हैं
मेरा गाँव भाता हैं, मेरे पुरखों का स्वाभिमान
हैं l
मेरा जन्म स्थान, रूह में बसा मेरा अभिमान
हैं ll
कहानी औ किस्से का दौर,सभी हंसते करते मौज।
प्रेम जहां प्रीत, मनभावन रिवाज उसपे मान
हैं ll
दिवाली दीप, होली रंग, मनभावन सा सुन्दर फाग।
रमणीय सुन्दर मेरे गाँव में बसती मेरी जान
हैं ll
मेरे बचपन की स्कूल, वो स्टूल मिलता उत्तम ज्ञान ll
मेरे गाँव से मेरी जग में आन, बान ओ शान
हैं ll
दूर तक फैला खेत खलियान, नाव से करते नदिया पार।
मेरा गाँव से ही मुझे मिली असली पहचान
हैं ll
२२-६-२०२६
मानवता पशु पक्षी के लिए
मानवता पशु पक्षी के लिए रखनी चाहिए l
दाना पानी की व्यवस्था भी करनी चाहिए ll
कई पशु पक्षी तो असहाय दशा में होते हैं l
गर्मी के दिनों में पानी की कुंडी भरनी चाहिए ll
ईश्वर ने सभी जीवो के लिए खाना दिया है l
समग्र जीव सृष्टि अच्छी तरह पलनी चाहिए ll
कायनात के बाग बनियान खेत खलियान l
पक्षीओ की किलकारी से खिलनी चाहिए ll
दुनिया में जीने का समान अधिकार है l
ईश के सिवा किसीकी न चलनी चाहिए ll
२३-६-२०२६
तमाम जिस्म ही घायल था घाव ऐसा था l
डर ही गये है नजर में दिखाव ऐसा था ll
उसी जगह रुके जाकर कदम जहाँ जानम l
न भूल पाये कभी भी लगाव ऐसा था ll
हम हुस्न की वो अदा देखते रहे थे सखी l
खुदा भी आज परेशा झुकाव ऐसा था ll
घनी सी जुल्फोंकी छाँवोंमें दिल ठहर सा गया l
झुका न पाए नजर जब पडाव ऐसा था ll
पहेले हार गये बाजी खेल में दम ना l
हमे मज़ा न दिखा कुछ भी दाव ऐसा था ll
१६-६-२०२६
औरत एक साहस
औरत एक साहस और निगाहें उस की l
घायल कर देती तिरछी निगाहें उस की l
जब मौन व्रत ले लेती है वो सब कुछ तो l
ख़ामुशी बहुत सना देती बातें उस की ll
बस उसकी एक आँख ही काफी है सखी l
ममता का धोध बरसाती आँखें उस की ll
जान बस्ती है अपने अपनों के लिए l
बच्चों के वास्ते चलती साँसें उस की ll
औरत को ख़ुद भी पता नहीं चलता है l
कहां ढलती सुबह से शामें उस की ll
प्यार, करुणा और सद्भाव की देवी l
अपनों के दिल मे रहती यादें उस की ll
कभी भी आँधियों की बयार न छुए l
दुआ करते हैं रोज हो बहारें उस की ll
सुबह से लेकर काम में थक जाती है l
थकान के मारे न कटती रातें उस की ll
दूर रहकर नजदीकियां महसूस होती l
सब को थामे रखती बाहें उस की ll
२४-६-२०२६
औरत एक साहस
औरत एक साहस और उसका रवैया एक
तरफ l
उपर से कड़क बहार से नर्म ये जलवा एक
तरफ ll
नाजुक और कमसिन दिखनेवाली का हर
बार ही l
परिस्थित और संजोग अनुसार लहजा एक
तरफ ll
सब के साथ प्यार और ममता से बातें करने
वालीं l
प्रेम से पेशआने का ढंग अपनापन अपना एक
तरफ ll
सब के साथ मिलजुल के दोस्ती बरसाती खेलती l
घरवालों के और बच्चों को उसका शाना एक
तरफ ll
जरा सा प्यार दिखाते ही लूट जाने को रहती
तैयार l
नाजुक लम्हों में अपने अपनों को बोसा एक
तरफ ll
२४-६-२०२६
शाना कन्धा
बोसा चुंबन
अनगिनत मंज़िलें
अनगिनत मंज़िलें और उसकी जुस्तजू एक तरफ़ ll
जिन्दगी में सबकुछ पा लेने की आरज़ू एक
तरफ़ ll
लम्हों की मुलाकात का लुफ़्त कुछ और ही होता है l
हुस्न वालों से होती रहती है गुफ़्तगू एक
तरफ़ ll
आज बन्दा शायरी कहने के मुड़ में है
क्यूँकी l
हुस्न के दामन से फूलों की खुशबू एक
तरफ़ ll
फोन पे बातचीत होने से सुकून नहीं मिल
रहा तो l
ख्यालों में मिलन से अच्छा रूबरू एक
तरफ़ ll
एक अजीब चिंगारी की रोनक होती है
चारो ओर l
घर की रोशनी से देख चमक जुगनू एक
तरफ़ ll
२५-६-२०२६
बहन एक रिश्ता शब्दों से परे
बहन एक रिश्ता शब्दों से परे होता हैं l
जीवन में माँ की परछाई बहन होती हैं l
प्यार और सुख की छाया को बोती हैं ll
बहुत छोटी उम्र में बड़ी बन जाती और l
भाई बहन के लिए सुख चैन खोती हैं ll
अपने अपनों के साथ कँधा मिलाकर l
सब के साथ हसती और साथ रोती हैं ll
सुख दुःख में साथ देकर हौसला बनाए l
घर में सब को एक माला में पिरोती हैं ll
प्यारा सा रिश्ता है , पवित्र एहसास है l
बहन के जीने की अदा ही अनोखी हैं ll
माँ, बहन, दोस्त, टीचर, साथी बनके l
रोजबरोज की परिस्थिति संजोती हैं ll
मां की परछाई है , बाप का साया है l
माँ बाप के लिए खुद को भिगोती हैं ll
२६-६-२०२६
अनसुनी कहानी
अनसुनी कहानी को अनसुनी ही रहने दो l
उसके पीछे छीपा दर्द अनसुना सहने दो ll
मुँह ने तो मौन व्रत धारण कर ही लिया है l
निगाहों को जो कहना खुलकर कहने दो ll
किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है कहानी से l
ज़माने को दिखाने खुशी का चौला पहने दो ll
गम को अपना बनाने की आदत बन जाती है l
चुपचाप खामोशी की अगन में दहने दो ll
कोई किसीके लिए नहीं बदलता यारो तो l
जो जैसा है उसे वैसा ही अब ग्रहने दो ll
२७-६-२०२६
याद
यादों के सहारे में ख़ुद को लपेटा हैं l
तिनका तिनका जिंदगी को समेटा हैं ll
तस्वीर बनाई मिट्टी के ढेर पर ओ l
कभी कभी अकेलेपन को सहेजा हैं ll
बारिस की बौछार पर नाम लिखा l
इल्ज़ाम न लगा नाज़ुक कलेजा हैं ll
जिसके साथ आसान सफ़र रहे वहीं l
उसके होने से जीवन में उजाला हैं ll
मानो ना मानो यही सच्चाइ है सखी l
इश्क ने इब्तिदा की ओर धकेला हैं ll
२८-६-२०२६
पहली नजर
पहली नजर में दिल दिवाना हो गया l
जुल्फों की घनी सी छांव में खो गया ll
इब्तिदा-ए-इश्क़ में हुस्न के सजदे में l
सुहाने ख्वाबों को देखने को सो गया ll
जिन्दगी में रफ़्ता रफ़्ता दिवाना करके l
प्यार के नशीले रसीले पल बो गया ll
जिस घड़ी का हर पल राह ताकते रहे कि l
जादू तो देखो युगों का इंतजार धों गया ll
लुफ़्त उठा लो और जी भर के देख लो l
वापिस ना लौटेगा ये लम्हा जो गया ll
२९-६-२०२६
जादुगरी
जिंदगी किस्मत की जादुगरी का चलता कारवाँ हैं l
कायनात में सब का अलग ही अलग आसमाँ
हैं ll
जिस तरह जा रही है जिंदगी की तरफ जा
रहे l
तक़दीर की पोथी में ना जाने क्या क्या बयां
हैं ll
कहने को तो सभी जहाँ में अपने ही है तो
सखी l
जहां पर भी दिल लगा समझो वहां आस्तां
हैं ll
जितने भी पल हसी खुशी के मिले जी भर जी
लो l
सुनो तो कायनात में कहा कुछ भी जाविदां
हैं ll
मानना या ना मानना ये तो इन्सां पे निर्भर
है l
ये जो खूबसूरत जीवन दिया ईश का एहसान
हैं ll
ना-समझ होते है उसे समझाना ज़रूरी है l
समझाने को हाल ए दिल बतलाना ज़रूरी है ll
लाख छुपाना चाहता हो कहने की बात वो l
दिल की बात होठों से कहलाना ज़रूरी है ll
ताउम्र मोहब्बत को खेल समझते रहे कि l
निगाहों से निगाहों को टकराना ज़रूरी है ll
दीदार की प्यास के साथ जीते रहे है कि l
मुकम्मल चैन ओ सुकून पाना ज़रूरी है ll
बेबाक आँखों में तअ'ल्लुक़ रखने के लिए l
थोड़ा सा मुस्कराते हुए शर्माना ज़रूरी है ll
३०-६-२०२६