अगली सुबह…
शाम के करीब 5 बजे, दोनों Raymond Showroom में मिले।
काम्या ने बड़े ध्यान से ऋतिक के लिए कपड़े चुने—
शर्ट का रंग, ब्लेज़र की फिटिंग… हर छोटी चीज़ पर उसकी नजर थी।
"आज तुम सिर्फ अच्छे नहीं… परफेक्ट लगने चाहिए," उसने मुस्कुराते हुए कहा।
ऋतिक ने हल्के मज़ाक में जवाब दिया, "इतनी मेहनत तो किसी ने मेरी ज़िंदगी में नहीं की। वो भी रिजेक्ट होने के लिए।"
काम्या बस मुस्कुरा दी… लेकिन उसकी आँखों में हल्की घबराहट साफ़ थी।
वहाँ से दोनों सीधे The Oberoi पहुँच गए।
रात 9 बजे काम्या के पापा, दीदी और जीजू आने वाले थे—
उसके “बॉयफ्रेंड” से मिलने।
दोनों जानबूझकर एक घंटा पहले पहुँच गए थे।
होटल के शांत लाउंज में बैठकर काम्या बार-बार घड़ी देख रही थी।
"घबराओ मत," ऋतिक ने धीरे से कहा।
"तुम नहीं समझोगे… पापा बहुत सख्त हैं," काम्या ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया,
"तुम्हें जो भी पूछें… बस वही कहना जो हमने तय किया है।"
ऋतिक ने सिर हिलाया, "ठीक है… लेकिन एक बात याद रखना—"
"क्या?"
"अगर कहीं मैं गड़बड़ कर गया… तो संभालना तुम्हें ही पड़ेगा।"
काम्या पहली बार खुलकर हँस पड़ी—
तनाव के बीच वो हँसी जैसे थोड़ी राहत ले आई।
लेकिन अंदर ही अंदर…
दोनों जानते थे—
अगले कुछ मिनट उनकी ज़िंदगी बदल सकते हैं।
"तुम यहीं बैठो… आराम से… बिना घबराए। मैं अभी आई," काम्या ने धीमे से कहा और उठकर चली गई।
ऋतिक ने गहरी सांस ली और खुद को संभालने की कोशिश करते हुए मेन्यू कार्ड उठाकर देखने लगा।
तभी—
लॉबी में से गुजरते हुए वेदांत ओबेरॉय की नजर अचानक उस पर टिक गई।
वो चलते-चलते रुक गए।
कुछ पल तक वो ऋतिक को गौर से देखते रहे…
जैसे किसी चेहरे को पहचानने की कोशिश कर रहे हों।
अगले ही पल—
वो तेज़ कदमों से उसके पास आए… और बिना कुछ कहे जोर से उसे लात मार दी।
"साले! तू यहाँ क्या कर रहा है…?!" उनकी आवाज़ पूरे लाउंज में गूंज उठी।
ऋतिक कुर्सी से लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ा।
उसके हाथ से मेन्यू कार्ड दूर जा गिरा।
उसके चेहरे पर डर साफ़ झलक रहा था।
वेदांत ने उसका कॉलर पकड़कर उसे झटके से ऊपर खींचा,
वो कुछ और बोलते—
तभी—
"वेदांत भईया…!"
काम्या तेज़ी से दौड़ती हुई वहाँ आई।
"यह मेरे साथ है…"
वेदांत ठिठक गए। उनकी पकड़ थोड़ी ढीली पड़ गई।
"यह…? कैसे…? क्यों…?" उन्होंने हैरानी और गुस्से में पूछा।
काम्या ने एक पल के लिए ऋतिक की तरफ देखा… फिर बोली—
"जी भईया… ये… अभी मेरी मदद कर रहा है… मेरा बॉयफ्रेंड बनकर।"
"काम्या!" वेदांत की आवाज़ और सख्त हो गई,
"क्या नाटक है ये…? और ये लड़का… तुझे पता भी है ये कौन है?"
काम्या ने बिना झिझक कहा—
"जी भईया… आपके होटल का वेटर है।"
एक पल के लिए पूरा माहौल जम सा गया।
ऋतिक की नजरें झुक गईं…
और काम्या… पहली बार अपने ही शब्दों के बोझ को महसूस कर रही थी।
वेदांत की आँखों में अब सिर्फ गुस्सा नहीं था—
कुछ और भी था…
जैसे कोई राज, जो अब बाहर आने वाला था।
तभी वहाँ भागता हुआ मैनेजर आ गया।
"वेदांत सर… मैं आपको सब बताने ही वाला था—"
"क्या बताने वाले थे?" वेदांत ने उसे बीच में ही काट दिया,
"यही कि अब ओबेरॉयस के वेटर भी बॉयफ्रेंड बनने लगे हैं?"
उनकी नकली हँसी में तिरस्कार साफ झलक रहा था।
"नहीं भइया…" काम्या ने आगे बढ़कर कहा,
"इसे मैंने ऐसा करने को कहा है।"
वेदांत की नजरें तुरंत काम्या पर टिक गईं।
"एक बात बताओ, काम्या…" उनकी आवाज़ अब धीमी थी, लेकिन और ज्यादा खतरनाक,
"मेरे छोटे भाई शौर्य ओबेरॉय में क्या कमी है… जो तुम उससे मिलना भी नहीं चाहती?"
काम्या चुप रही।
"पूरा इंटरनेशनल बिज़नेस संभाल रहा है वो… ओबेरॉयस का नाम ऊँचा कर रहा है…"
वेदांत एक-एक शब्द पर जोर देते हुए बोले,
"और तुम…"
उन्होंने घृणा से ऋतिक की तरफ देखा—
"तुम इस… दो कौड़ी के वेटर के साथ घूम रही हो?"
ये शब्द जैसे हवा को चीरते हुए सीधे ऋतिक के आत्मसम्मान पर लगे।
ऋतिक ने सिर झुका लिया…
मुट्ठियाँ धीरे-धीरे भींच गईं।
काम्या ने ये देखा—
उसके चेहरे पर पहली बार गुस्सा उभरा।
"बस, भईया!" उसकी आवाज़ कांप रही थी, लेकिन मजबूत थी,
"इन्हें छोटा मत समझिए… ये मेरी मदद कर रहे हैं।"
"मदद?" वेदांत हँसे,
"या तुम खुद को बर्बाद करने की जिद पर उतरी हो?"
काम्या अब एक कदम आगे बढ़ी—
"किसके साथ रहना है… ये मेरा फैसला है।"
माहौल अब पूरी तरह गरम हो चुका था।
वेदांत की आँखें सिकुड़ गईं…
और ऋतिक—
अब तक चुप था,
...to be continued