नीली झील से फिर रहस्यमी आवाज गूँजी, "मेरा दूसरा सवाल है ये..."
"मेरे पास शहर है, पर घर नहीं. जंगल है पर पेड नहीं. पानी है, पर मछली नहीं. मै क्या हूँ?"
ये सुनकर राघव और मधु सोचने लग जाते हैं. कुछ देर बाद मधु कहती है, "इसका जवाब शायद मुझे पता है नक्शा!" "अरे हां! तुम सही बोल रही हो इसका जवाब नक्शा ही होगा." राघव ने कहा।
नीली झील से आवाज गूँजी, "तुम्हारा दूसरा सवाल भी सही है।" यह सुनकर दोनों के चेहरे पर एक बड़ी-सी मुस्कान आ जाती है। राघव झील की ओर इशारा करते हुए कहता है, तुम्हारा तीसरा सवाल क्या है?
नीली झील से आवाज गूँजी, मेरा तीसरा और आखरी सवाल है ये...
"जितना अधिक आप मुझे लेते हैं. उतना ही अधिक आप पीछे छोड जाते हैं. मैं क्या हूं?" यह सुनकर राघव और मधु सोचने लग जाते है.
"इसका जवाब है फुटप्रिंट्स मतलब हमारे पैरों के निशान जितना हम चलकर यहाँ तक आए है उतना ही हम पीछे छोड कर आए है." राघव ने कहा।
नीली झील से आवाज गूँजी, "तुम साहसी होने के साथ- साथ चतुर भी हो तुम्हारे तीसरे सवाल का जवाब भी बिल्कुल सही है तुम पानी ले जा सकते हो!"
यह सुनकर राघव और मधु खुश हो जाते हैं और झील से पानी लेकर उस विशाल बाज के पास जाने लगते हैं. जब राघव ओर मधु उस बाज के पास पहुंचते हैं तो, वह देखते हैं कि उसकी हालत पहले से भी और खराब हो गई थी.
राघव जल्दी से बाज़ीगर की ओर दौड़ता है और उस पानी को उसे पिला देता है. पानी पीने के कुछ देर बाद ही उसके घाव भरने लग जाते हैं और वह थोडी देर में ही पूरी तरह से ठीक हो जाता है. तभी अचानक से बाज़ीगर के चारो ओर एक सफ़ेद ऊर्जा घूमने लग जाती है, और वह अपने इंसानी रूप में बदल जाता है।
और कहता है, " तुम्हारा मेरी जान बचाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद अगर तुम नहीं होते तो शायद, मैं आज जिंदा नहीं बचता. "इसकी कोई जरूरत नहीं है यह तो मेरा कर्तव्य था"। राघव ने कहा।
राघव के दिमाग में अब सिर्फ़ ये चल रहा था कि उस दिव्य गिरी पहाड पर बिना उस नीली झील को तैरे हुए, वे दोनों कैसे जाएगे.?
बाजीगर ने कहा, क्या हुआ दोस्त तुम कुछ परेशान से लग रहे हो। " हाँ हम दोनों को नीली झील के उस पार दिव्य गिरी पहाड पर जाना है लेकिन उस झील को तैर कर पार नहीं कर सकते है, मैं बस यही सोच रहा था कि, उस झील को बिना तैरे उस पार हम दिव्य गिरी पहाड़ पर कैसे पहुँचेगे? राघव ने कहा।
बाजीगर कहता है, बस इतनी-सी बात, क्या तुम्हे उस पहाड पर जाने का कोई ओर रास्ता भी पता है। राघव ने उत्सुकता से पूछा।
बाजीगर कहता है, हाँ शायद! "तो तुम जल्दी से उस रास्ते का पता बता दो. ताकि हम उस पहाड पर पहुंच सके. राघव ने कहा।
बाजीगर कहता है, लेकिन तुम मेरे बिना उस रास्ते से नहीं जा सकते. "क्या मतलब तुम्हारे बिना नहीं जा सकते" मधु ने कहा। तभी बाजीगर एक विशालकाय बाज मे बदल जाता है और कहता है, "आप दोनों मेरे ऊपर बैठ जाओ! मै तुम दोनों को उस पहाड पर छोड आऊंगा।"
राघव और मधु बिना एक पल की देरी किए उसके ऊपर बैठ जाते है। बाजीगर उन दोनों को अपने ऊपर बैठाकर दिव्य गिरी पहाड की ओर उडान भर देता है.
जब वे दोनों उडते हुए नीली झील के ठीक ऊपर से गुजर रहे होते है, तभी राघव एक मुस्कान के साथ चिल्लाते हुए कहता है, "इस झील को तैर कर पार नहीं कर सकते, लेकिन हम तो उडकर जा रहे है।"
कुछ ही देर मे बाजीगर उन दोनों को दिव्य गिरी पहाड पर पहुंचा देता है. और वापिस इंसानी रूप धारण कर लेता है और कहता, ये लो दोस्त पहुंच गए तुम दिव्य गिरी पहाड पर. अब तो परेशान नहीं हो ना.
"तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद! आज तुम्हारे कारण ही हम इस पहाड पर पहुंच सके है. राघव ने कहा। बाजीगर कहता है, दोस्ती मे धन्यवाद की जरूरत नहीं होती है. और वैसे भी तुमने मुझे बचाने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं की...अगर तुम कभी मुसीबत मे हुए तो अपने इस दोस्त को जरूर याद कर लेना. तुम जब भी मुझे बुलाओगे मै आ जाऊगा.
जरूर! अगर मै कभी मुसीबत मे पडा तो मै तुम्हे जरूर याद करूँगा.राघव ने कहा।
बाजीगर कहता है, अच्छा तो दोस्त अब मै चलता हूँ. ये कहकर वह वापिस से बाज के रूप मे बदल जाता है और दिव्य गिरी पहाड से चला जाता है.
"चलो राघव अब हमें भी आगे बढना चाहिए. मधु ने कहा। राघव कहता है, हाँ चलो अब जल्द-से-जल्द जादुई पानी का कलश ढूंढते है, और यहाँ से चलते है। ये कहकर वे दोनों उस पहाड़ पर आगे बढ जाते है.
थोडी दूर जाने के बाद उन्हें एक बडी-सी गुफा दिखाई देती है. राघव ने कहा, शायद ये वही गुफा है जिसके बारे मे वो कलिंगेश जिन्न बता रहा था. मधु कहती है, हाँ लगती तो वही गुफा है.
"चलो अंदर जाकर देखते है, वह जादुई पानी का कलश कहाँ रखा हुआ है.राघव ने कहा, और साधरण -सी तलवार लिए हुए उस बडी- सी गुफा मे वे दोनों अंदर चले जाते है। गुफा के अंदर काफी अंधेरा था.
"यहाँ तो काफी अंधेरा है कुछ ठीक से दिख भी नहीं रहा है" मधु ने डरते हुए कहा। राघव कहता है, "हाँ. हमें सावधानी के साथ इस गुफा मे अंदर की ओर बढना होगा. कुछ दूर चलने के बाद राघव को एक रौशनी दिखाई देती है.
"मधु वहाँ से कुछ रौशनी आती हुई दिखाई दे रही है. हमें उस तरफ चलना चाहिए. राघव ने इशारा करते हुए कहा। मधु कहती है, हाँ चलो! ये बोलकर वे दोनों उस रौशनी के पीछे-पीछे चले जाते है. और वहाँ उन दोनों को एक तांत्रिक दिखाई देता है जो काली विद्या कर रहा था.
मधु ने कहा, जरूर ये वही मारकेश तांत्रिक है जिसके बारे मे वह कलिंगेश जिन्न बता रहा था. मतलब वे दोनों जिन्न सच बोल रहे थे, फिर तो वह जादुई पानी का कलश भी इसी गुफा मे कही रखा होगा, जिसके बारे मे वे दोनों जिन्न बोल रहे थे. क्या वह जादुई पानी का कलश राघव को मिल जाएगा? अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....