हेलो दोस्तों, मैं आपकी कहानीकार काजल सोम। तो मैं आपको आज एक कहानी सुनाऊंगी शिवांगी की।
शिवांगी की शादी हुई, उसे पांच-छह साल की उम्र का बड़ा लड़का था। और फैमिली भी काफी अच्छी थी, तो घर वालों ने सोचा भाई लड़की खुश रहेगी। लेकिन वह पता चला कि वह आदमी ड्रिंक करता था। कोई प्रॉब्लम नहीं हुई, बच्चे भी थे और वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करता था आदमी। पर वह अपनी वाइफ की कभी इज्जत नहीं करता था। और यह चीज उसे खटकती थी और वह अपनी फैमिली को भी बताती तो फैमिली हमेशा उस लड़की में ही कमियां निकालती— 'तेरे में कुछ कमी है, तू ऐसी है, तू वैसी है।'
फिर वह बाहर रहने लगी अपने हस्बैंड के साथ और उसके तीन बच्चे थे— दो लड़कियां बड़ी और फिर एक छोटा लड़का लास्ट में। तो शिवांगी अपने कपड़े उतार रही थी छत पर से, तो हस्बैंड को पता चला कि शिवांगी ने किसी से बात की छत पर। तो वह उसे वहीं से छत पर से पीटता हुआ, नीचे बालों के हाथ से घसीटते हुए नीचे लाया और उसे खूब पीटा। जबकि उसमें शिवांगी की कोई गलती भी नहीं थी। और जब वह घर रहती थी तो उसके सास-ससुर और यह देवर-जेठ, यह भी बहुत परेशान करते थे उसे, जीने नहीं देते थे।
उसने फिर सोचा कि अब कब तक दब कर रहूंगी मैं ऐसे? कब तक मैं इनके अंदर जिऊंगी? वह उसने बाहर निकलना शुरू किया और जैसा कि आप जानते हैं कि अगर किसी लड़की को जितना दबाया जाएगा, वह उतनी ही खतरनाक लड़की बनती है। तो अभी उसने यह बात अपनी मम्मी-पापा को बताई, उन्होंने कुछ नहीं किया। उसने कंप्लेंट डाल दी पुलिस के खिलाफ। पुलिस ने एक्शन लिया और उसे छोड़ दिया, और यह सब चीज चलती रही और उसने अपना हक नहीं छोड़ा। उसने कहा कि मेरा हस्बैंड नहीं है यह। अरे अगर यह मेरा हस्बैंड होता तो यह मुझे इस तरीके से टॉर्चर नहीं किया करता।
फिर शिवांगी को एक फ्रेंड मिला उसकी बालकनी में। उससे अच्छे से बातें होती थी और अपना सब कुछ अच्छे से रहता था। वह एक फ्रेंडशिप का दायरा था और वैसे भी अगर कोई लड़का किसी लड़की की इज्जत करता है तो बातें करने में कोई दिक्कत नहीं। और उनकी फ्रेंडशिप काफी अच्छी रही और बॉन्ड भी। लेकिन जब वह फ्रेंड ऐसा था कि वह उसकी सपोर्ट में हमेशा लड़ता था और उसके जो हस्बैंड था, वह अपने बच्चों से भी काफी प्यार करता था, तो वह बच्चों के लिए कुछ भी करता था, लेकिन बच्चे भी डरे हुए थे उससे। और ऐसा था कि शिवांगी वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करती थी।
और उसका ना फ्रेंड एक बार एक्सपायर हो गया किसी कारण से और शिवांगी को काफी दुख हुआ और वह हमेशा उसी के स्टेटस लगाती और उसी के बारे में गाने लगाकर सर्च करती और मतलब थोड़ा सा उसके लिए दुखी महसूस होती। तो लोग-बागों ने क्या सोचा कि उसका अफेयर रहा होगा उससे और इसलिए उसे अपना हस्बैंड नहीं भाया। लेकिन सबसे दुख की बात यह थी कि उसकी इस प्रॉब्लम को उसकी फैमिली ने भी नहीं समझा। उन फैमिली वालों ने भी हाथ खड़े कर दिए जिन्होंने उसे इतना सालों तक पाला और बड़ा किया। और यह चीज कहीं न कहीं बहुत परेशान करती है।
और हमेशा यह नहीं होता कि हस्बैंड अपनी तानाशाही दिखाए कि वह हस्बैंड है तो वह अपना हक जमाए, नहीं, बल्कि दोनों का बराबर-बराबर का हक होता है। और अगर कोई फ्रेंड है तो वह है, और अगर कोई लड़का किसी लड़की की इज्जत करता है तो उस लड़की के लिए वह बहुत बड़ी बात होती है। और यही कहानी है, और शिवांगी चाहती तो डिवोर्स है अपने हस्बैंड से लेकिन वह अपनी फैमिली की वजह से नहीं ले पाती।"
और अंत में, मैं एक सवाल छोड़ना चाहती हूँ—क्या एक लड़की बिना हस्बैंड के नहीं जी सकती? क्या हमारा समाज इतना कमज़ोर है कि वह एक अकेली महिला को सम्मान से जीने नहीं दे सकता? हर बार यह क्यों जरूरी है कि एक लड़की की पहचान किसी पुरुष (हस्बैंड) के साथ ही हो?
पुरानी कहावतें आज भी हमें यही सिखाती हैं कि 'लड़की घर की शोभा है' और अगर शादी टूट गई, तो तुरंत दूसरी शादी करवा दो, जैसे वह उसके बिना अधूरी हो। लेकिन क्या कभी हमने सोचा कि उस लड़की की अपनी खुशी, उसका अपना वजूद और उसकी अपनी आज़ादी क्या है?
इतने बदलाव के बाद भी आज भी एक महिला की आज़ादी को 'समाज के नियमों' में ही क्यों तौला जाता है? शायद वक्त आ गया है कि हम इन पुरानी कहावतों से ऊपर उठकर, एक महिला को 'किसी की पत्नी' से पहले, एक 'इंसान' के तौर पर स्वीकार करें।"