महिमा: शक्तिशाली तलवार (सीजन 1) चैप्टर 12 Ashish Taak द्वारा थ्रिलर में हिंदी पीडीएफ

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महिमा: शक्तिशाली तलवार (सीजन 1) चैप्टर 12

राघव  अपनी कांस्य की तलवार को उठाता है, और वे दोनों उस जंगल मे अंदर की ओर चलने लगते है, थोड़ी ही दूर चलने के बाद उन दोनों को एक विशाल बाज दिखाई देता है जोकि दर्द मे चिल्ला रहा था. जिसके शरीर के घावो से खून बहता साफ़ दिखाई दे रहा था। मधु हमें सावधानी के साथ आगे बढ़ना होगा, राघव ने अपनी तलवार को मजबूती से पकड़ते हुए कहा। 

दूसरी ओर सौरव और लिली भी वहाँ उस शापित हवेली मे भूख से तडप रहे थे. "जिन्न जी तुम्हे जादू आता है.ना... सौरव ने बड़े ही विन्रमता से कहा। हाँ.. बिल्कुल और वैसे ये तो तुम्हे पता ही है फिर पूछ  रहे हो, कलिंगेश ने कहा। 

लिली कहती है, हम दोनों को बहुत ज़ोर से भूख लगी हुई है, क्या तुम अपने जादू से हमारे लिए कुछ खाने को ला सकते हो. "कही ऐसा ना हो कि हम राघव के आने से पहले ही भूख से मर जाए. सौरव ने मधु का साथ देते हुए कहा। 

"जब तुम्हारा दोस्त राघव हम दोनों को मुक्ति दिलाने के लिए खतरों से भरी काली पहाडी पर गया हुआ है, तो हम तुम दोनों को खाना तो खिला ही सकते है" कलिंगेश ने कहा। 
कलिंगेश जिन्न अपनी शक्ति से उन दोनों के लिए खाना ला देता है, और वे दोनों खाना खाने लग जाते है। 

काली पहाड़ी पर, मधु राघव से कहती है, तुम सही कह रहे हो और वैसे भी ये जंगल मायावी है, यहाँ कुछ भी हो सकता है. राघव और मधु को उसी रास्ते से होकर गुजरना था जहाँ पर वह विशाल बाज दर्द मे चिल्ला रहा था. वे धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ रहे थे। 

राघव और मधु उसके पास से गुजर रहे होते है कि तभी वह विशाल बाज कहता है, "रुको मेरी मदद करो! मुझे असहनीय दर्द हो रहा है. राघव बाज की तरफ देखता है जोकि गंभीर रूप से घायल था, जिसके घावो से खून रिसे जा रहा था, जिसके कारण वह उड भी नहीं पा रहा था।

राघव बाज की ओर कदम बढ़ता है कि तभी मधु राघव को रोकते हुए कहती है राघव रुक जाओ! उसके पास मत जाओ, ये जरूर उसकी चाल है। "कह तो तुम सही ही रही हो, लेकिन अगर वह सच मे घायल हुआ तो? मै किसी को ऐसे दर्द मे छोडकर आगे नहीं बढ सकता. राघव ने कहा, और विशाल बाज की ओर बढ़ने लगा।
मधु राघव को अच्छे से जानती थी कि एक बार उसने जो निर्णय बना लिया, वो उससे पीछे नहीं हटता था इसीलिए वह भी राघव के पीछे-पीछे चली जाती है।  क्या हुआ है तुम्हे? तुम ऐसे घायल कैसे हुए? और तुम बोल सकते हो? राघव ने पूछते हुए कहा। 
बाज ने कहा, हाँ मैं बोल सकता हूँ क्योंकि मैं कोई आम बाज नहीं हूँ। मेरा नाम बाजीगर है, और मै अपनी शक्तियों से इंसान का रूप भी ले सकता हूँ. और अपने शरीर को अपने अनुसार छोटा या बडा भी कर सकता हूँ।

"मैंने बोला था ना ये इसकी चाल है, अब यहाँ से जल्दी चलो! इससे पहले की ये हम पर हमला कर दे" मधु ने हड़बड़ी में कहा।  नहीं मै तुम्हारे ऊपर कोई हमला नहीं करुँगा. इस समय तो मै खुद खतरे मे हूँ. अगर मै ऐसे ही घायल रहा तो, मै बहुत जल्दी मर भी  जाऊंगा हूँ. बाज़ीगर ने कहा। 

लेकिन तुम घायल कैसे हो गए? राघव ने कहा। बाज़ीगर ने कहा, मेरी ये हालत सर्पिका ने की है. वह मुझे मारने वाली ही होती है कि तभी उसको कुछ इंसानों की गंध आ जाती है और वह मुझे ऐसी हालत मे ही छोड कर चली जाती है.

"जिन इंसानों की गंध सर्पिका को आई थी. वे हम दोनों ही थे. और अभी- अभी उसको घायल करके आ रहे है" राघव ने कहा। "लेकिन उसके पास तो जादुई शक्तियां थी, तुम उसे घायल कैसे कर सकते हो? बाजीगर ने हैरानी के साथ कहा। 

राघव ने बताया, "मेरा पास एक मायावी खंजर था जिसकी मदद से ही मैंने उसको घायल किया है" तुमने अच्छा किया! उसने इस जंगल मे सभी को चोट पहुंचा रखी थी, मैंने कभी सोचा नहीं था कि वह एक इंसान से हार जाएगी। बाज़ीगर ने कहा। राघव कहता है, ये सब बातें छोडो, तुम ठीक कैसे होंगे? इसका कोई उपाय तो होगा...

"उपाय तो है पर इस हालत मे, मैं वहाँ तक नहीं पहुंच सकता. बाज़ीगर ने निराशा से कहा। राघव कहता है,क्या है वह उपाय? क्या पता मै तुम्हारी कुछ मदद कर सकू? बाज़ीगर ने बताया, यहाँ से थोडी ही दूरी पर नीली झील है जिसके पानी को पीने से ही मेरा घाव भर सकते है और मै पहले की तरह खुले आसमान मे उड सकूंगा...

"उस नीली झील का पानी मै तुम्हारे लिए लेकर आऊंगा." राघव ने दृढ़ता से कहा। ये सुनकर बाजीगर के चेहरे पर आशा की एक किरण साफ़ दिखाई दे रही थी। राघव ने आगे कहा, मै अभी नीली झील के लिए निकलता हूँ.
मधु उसे रोकना चाहती थी पर उसे पता था कि राघव उसकी बिल्कुल नहीं सुनेगा और वो भी तब, जब किसी की जान पर बात आई हो, इसीलिए वह भी राघव के साथ चल देती है। थोडी देर मे ही वे नीली झील के पास पहुंच जाते है. राघव उस झील से पानी लेने के लिए जैसे ही झुकता है, वह एक झटके के साथ पीछे जाकर गिरता है.

तभी नीली झील से एक रहस्यमयी आवाज गूंजती है, ना समझ लडके पीछे हटो!तुम मेरा पानी नहीं ले जा सकते. राघव ने कहा, "मै तुम्हारा पानी किसी की जान बचाने के लिए ले जा रहा हूँ"।

झील से आवाज गूँजी... मै तुम्हे पानी ले जाने दूंगी पर तुम्हे मेरे तीन सवालों का जवाब देना होगा. अगर तुम मेरे सवालों का सही जवाब देते हो। तभी तुम पानी लेकर जा सकते हो! 

मधु ने कहा, अगर हम इसके सवालों का जवाब देने लगे तो काफी देर हो जाएगी. मधु झील के उस पार इशारा करती हुई आगे कहती है, वो देखो राघव दिव्य गिरी पहाड. हमें अब सिर्फ ये सोचना है कि बिना तैरे हुए इस झील को कैसे पार करे.

राघव ने कहा, "मै किसी का जीवन खतरे मे छोडकर अपने मकसद को पूरा नहीं कर सकता, ये तुम अच्छे से जानती हो, राघव ने झील की ओर देखते हुए कहा,तुम्हारे तीन सवाल क्या है? 

झील से गूँजी, तुम मेरे सवालों का जवाब देना चाहते हो तो ठीक है. मेरा पहला सवाल है ये...

"मै हमेशा तुम्हारे सामने हूँ, पर तुम मुझे देख नहीं सकते. मै क्या हूँ?"

ये सुनकर मधु कहती है, ऐसा कैसे हो सकता है, वह सामने हो और देख भी ना सके. ये तो तभी हो सकता है जब उस व्यक्ति की आंखे ही न हो.

राघव थोडी देर सोचता है और कहता है, भविष्य, ये हमेशा व्यक्ति के सामने होता है, पर कभी उसे दिखाई नहीं देता है

तभी नीली झील से आवाज आती है तुम्हारा पहले सवाल का जवाब सही है. आगे क्या हुआ? क्या राघव बचा सकेंगा बाजीगर की जान? अब आगे क्या होगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिये....