उसके गुस्से की सीमा अब मर्यादा लांघ चुकी थी। उसने झटके से उसका हाथ पकड़ा और उसे घसीटते हुए दरवाजे की ओर ले जाने लगा।
"हमारे जैसे बिगड़े हुए लोग क्या-क्या कर सकते हैं, अब यह दिखाने का वक्त आ गया है।"
वह उसे छोड़ने की मिन्नतें कर रही थी, लेकिन उस क्रूर राक्षस पर उसकी रोने की आवाजों का कोई असर नहीं हो रहा था। उलटे उसे चिढ़ हो रही थी।
उसने उसे बाहर के स्विमिंग पूल में जोर से धक्का दे दिया और ऊपर से कहा, "जब तक मैं न कहूँ, यहाँ से बाहर नहीं निकलना।"
स्विमिंग पूल का पानी बर्फीला था। ऐसा लग रहा था कि वह किसी भी क्षण दम तोड़ देगी। लेकिन क्या वह उसे ऐसे ही मरने देने वाला था? यह तो वक्त ही बताने वाला था।
उसे याद आया कि कल जो बाल्टी भर पानी उसके पास लाया गया था, वह शायद इसी पूल से था। वह पानी इतना ठंडा था कि सिर्फ एक बाल्टी पानी ने ही उसकी हालत बिगाड़ दी थी, और यहाँ तो पूरा का पूरा विशाल पूल था।
एक पल में उसके मन में कई विचार कौंध गए। यह पूल बॉडीगार्ड्स के लिए बना था, जहाँ उन्हें बर्फीले पानी में शरीर को देर तक डुबोकर रखने का अभ्यास करना पड़ता था। और अब उस पानी में बेचारी अनाया थी। पानी इतना ठंडा था कि उसके गिरते ही शायद उसकी हड्डियाँ जम गई होंगी।
उसे पहले से ही पानी से डर लगता था और अब वह गहरे पानी में थी। उसे सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था और हाथ-पैर मारते-मारते वह थक चुकी थी।
धक्का देने के बाद वह अपनी रूम में चला गया और वॉशरूम में शॉवर लेने लगा। उसे जल्दी निकलना था क्योंकि आज उसकी एक बहुत महत्वपूर्ण मीटिंग थी। शॉवर लेकर वह तैयार हुआ और आज की फाइल लेकर महत्वपूर्ण बिंदु नोट करने लगा। उसे समय बर्बाद करना बिल्कुल पसंद नहीं था, इसलिए काम के साथ-साथ वह नाश्ता भी रूम में ही करता था। आज भी उसने नौकर से कहकर ब्लैक कॉफी और सैंडविच ऊपर ही मंगवा लिया था।
वह काम में इतना व्यस्त हो गया कि उसने पूल में किसी को धक्का दिया है, यह बात पूरी तरह भूल गया।
इधर अनाया हर सेकंड अपनी जान बचाने के लिए तड़प रही थी। उस राक्षस को उसकी कोई परवाह नहीं थी। धीरे-धीरे उसकी सांसें धीमी होने लगीं और वह निर्जीव हो गई। उसका शरीर पानी पर तैरने लगा।
सभी बॉडीगार्ड्स हवस भरी नजरों से उसकी बॉडी को देखने लगे। उसके कपड़े ढीले थे और पानी में भीगने के कारण उसे अपनी सुध नहीं रही थी, कपड़े उसके शरीर से चिपक गए थे। सभी पूल के किनारे आकर कानाफूसी करने लगे, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उसे हाथ लगाए या बाहर निकाले। उन्होंने खुद अपने बॉस को उसे यहाँ घसीटकर लाते देखा था, और उनके आदेश के विरुद्ध जाना मतलब अपनी मौत को दावत देना था, जिसका जोखिम कोई नहीं लेना चाहता था।
उधर राजस को खाते समय जोर का ठसका लगा, जैसे उसकी जान ही निकलने वाली हो। तभी नौकर राम काका प्लेट लेने आया। अपने बॉस को खांसते देख उसने तुरंत पानी भरकर उनके हाथ में दिया। राजस ने पानी पीया तो थोड़ा बेहतर महसूस हुआ। राम काका प्लेट उठाकर वहां से जाने ही वाले थे कि उनकी नजर बाहर पड़ी और वे स्थिर हो गए।
"काका, कुछ कहना है क्या?"
काका थोड़े हिचकिचाते हुए बोले। वे बाकी लोगों से ज्यादा उससे बात करते थे क्योंकि वे उम्र में उससे बड़े थे। बॉडीगार्ड्स ने ही काका को खबर दी थी कि बॉस ने जिस लड़की को पानी में फेंका था, उसकी बॉडी ऊपर तैर रही है। काका उस वक्त किचन में थे, इसलिए उन्हें कुछ पता नहीं था।
वे बाहर गए और देखा कि सच में एक लड़की की बॉडी तैर रही है। उन्हें उसका चेहरा तो नहीं दिखा, लेकिन उसके लिए बुरा जरूर लगा।
"वह... वह... बॉडी... उसे कहाँ ठिकाने लगाना है? वहीं जहाँ हमेशा ले जाते हैं, या कहीं और?" काका ने हिचकिचाते हुए कहा, "क्योंकि लेडीज की यह हमारे पास पहली बॉडी है।"
"काका, किसकी बॉडी?" यह पूछते समय भी उसका ध्यान लैपटॉप पर ही था। "कौन सी लेडीज?"
वह पूरी तरह भूल चुका था कि रूम में आने से पहले वह क्या कारनामा कर आया था। रॉनी किसी काम से बाहर गया था।
तभी काका एक सांस में बोल पड़े, "मालिक, आपने थोड़ी देर पहले जिस लड़की को गार्ड्स वाले पूल में धक्का दिया था, उसकी बॉडी पानी पर तैर रही है। गार्ड्स ने बताया है कि उसकी मौत हो चुकी है। आपने सामने से कोई और ऑर्डर नहीं दिया, इसलिए वह बॉडी अभी भी पानी में ही है।"
इतना सुनते ही उसके होश उड़ गए। वह जोर से चिल्लाया, "ओह शीट!" और दौड़ते हुए नीचे की ओर भागा।
पता नहीं क्यों, उसे एक अजीब सी बेचैनी महसूस हो रही थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी अपनी जान जा रही हो। उसे पहली बार देखने पर जो चेहरा दिखा था, अब वही चेहरा उसकी आँखों में नाच रहा था।
उसकी चाल इतनी तेज थी कि वह बुलेट ट्रेन की रफ्तार से नीचे पहुँचा और पूल में छलांग लगा दी।
उसने उसे खींचकर किनारे पर लाया। वह पूरी तरह अकड़ गई थी और सांसें बंद थीं। उसने तुरंत उसे माउथ-टू-माउथ सांस देने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उसने उसके सीने पर दबाव डालकर धड़कन लौटाने की कोशिश की, पर वह भी नाकाम रहा।
"कॉल द डॉक्टर राइट नाउ!" वह चिल्लाया, तो राम काका ने डॉक्टर को फोन लगाया।
उसने उसे गोद में उठाया और अपने रूम में ले जाने लगा। जब उसने उसे उठाया, तो गार्ड्स की हवस भरी नजरें उसकी छाती पर घूमती दिखीं। राजस ने उन नजरों का पीछा किया और उसे सब समझ आ गया। उसने देखा कि अनाया का टॉप कंधे से खिसक गया था और उसका क्लीवेज दिख रहा था।
अब उसे होश आया कि कितनी देर से उसके गार्ड्स उसकी नजरों से उसका शोषण कर रहे थे। उसके दिमाग में पारा चढ़ गया और उसने आदेश दिया, "आउट... एवरी वन... राइट नाउ!" और उसकी आवाज सुनते ही सारे गार्ड्स एक सेकंड में गायब हो गए।
वह इतनी जल्दी उसे मौत देने वाला नहीं था। जैसा उसका मन करेगा, वैसा वह उसके साथ खेलेगा। जब तक उसे सच्चाई पता नहीं चलती, वह उसका खेल बनाए रखेगा। क्या सच में इस जानलेवा खेल में वह आखिरी तक टिक पाएगी? क्या उसका निर्वाह उसके सामने हो पाएगा? यह एक बड़ा सवाल वहां खड़ा हो गया था।
जब सच सामने आएगा, तो क्या वह उसे दिए गए जख्मों को भर पाएगा? भविष्य में यह एक पहेली ही बनी रहेगी।
उसने उसे उठाकर अपने बेड पर लिटाया और राम काका को डॉक्टर को जल्दी बुलाने को कहा। माया को भी ऊपर बुलाया गया। रॉनी और राम काका के अलावा उसके कमरे में किसी को आने की अनुमति नहीं थी। आज वहां अनाया की एंट्री हुई थी। यह एंट्री अस्थायी होगी या स्थायी, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।
माया ने उसके गीले कपड़े बदलकर उसे साथ लाया हुआ ड्रेस पहना दिया। तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आई और डॉक्टर अंदर आए।
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