पिछले अध्याय से हम यह समझते आ रहे है कि सनातन धर्म प्राचीन धर्मों में से एक है .. जिसका न आदि है न अंत वह सनातन है ... अब प्रश्न यह आता है कि यदि सनातन धर्म इतना ही प्राचीन है तो उसने (dinasour) डायनासोर का उल्लेख क्यो नहीं है ??
पहले तो हम तार्किक विचार देखे ... तो डायनासोर शब्द 1842 के बाद प्रचलन में आया। तो सनातन में प्रत्यक्ष रूप से डायनासोर शब्द नहीं मिल सकता ...
इसका मुख्य कारण यह है कि डायनासोर मानव सभ्यता के आने से लगभग 6.5 करोड़ साल पहले ही विलुप्त हो चुके थे, जबकि सनातन धर्म के मुख्य ग्रंथ (जैसे वेद और पुराण) मानवजाति के मार्गदर्शन के लिए ब्रह्मांड के नैतिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक पहलुओं पर केंद्रित हैं।सनातन में डायनासोर के प्रत्यक्ष उल्लेख न होने के कुछ प्रमुख कारण और दृष्टिकोण निम्नलिखित हैं:
•ग्रंथों का उद्देश्य (Purpose of Scriptures): सनातन धर्म का मुख्य लक्ष्य मनुष्य को मोक्ष और धर्म का मार्ग दिखाना है, न कि जीवों की जैविक या पुरातात्विक (paleontological) सूची बनाना।
•84 लाख योनियाँ: सनातन शास्त्रों में 'चौरासी लाख योनियों' (84 lakh species) का वर्णन है। विद्वानों का मानना है कि इस विशाल संख्या में डायनासोर जैसे विशालकाय जीव भी शामिल हो सकते हैं, जिनका वर्णन अलग-अलग नामों से किया गया हो।
•पौराणिक जीवों से तुलना: पुराणों और रामायण-महाभारत में कुछ विशाल जीवों का जिक्र मिलता है (जैसे विशालकाय जलीय जीव 'मकर' या 'तिमिगिल'), जिनकी तुलना अक्सर डायनासोर या उससे भी बड़े प्रागैतिहासिक जीवों से की जाती है।
•कलाकृतियों में प्रमाण (Artistic Evidence): Reddit और अन्य मंचों पर हुई चर्चाओं में कुछ लोग कंबोडिया के Angkor Wat Temple और भारत के कुछ शैलचित्रों (rock paintings) का उदाहरण देते हैं, जहाँ डायनासोर से मिलती-जुलती आकृतियाँ उकेरी गई हैं।
अब यदि हम फिर भी डायनासोर जैसे जीवों का उल्लेख देखना चाहते है.. तो शायद कुछ उदाहरण हम सब देख पाए ...
सनातन ग्रंथों (जैसे महाभारत और पुराणों) में कुछ ऐसे असाधारण, विशालकाय और प्रागैतिहासिक (prehistoric) जीवों का स्पष्ट वर्णन मिलता है, जिनकी शारीरिक बनावट और आकार की तुलना आधुनिक वैज्ञानिक डायनासोर या उसी काल के अन्य महाकाय जीवों से करते हैं।मुख्य ग्रंथों में वर्णित प्रमुख विशालकाय जीव निम्नलिखित हैं:
1. तिमिङ्गिल (Timingila) — पुराण और महाभारतश्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत में 'तिमिङ्गिल' नाम के एक अत्यंत विशाल समुद्री जीव का उल्लेख है।बनावट और आकार: संस्कृत में 'तिमि' का अर्थ व्हेल मछली होता है और 'गिल' का अर्थ निगलना। यह जीव इतना विशाल था कि पूरी की पूरी व्हेल मछली को एक बार में निगल जाता था।
तुलना: कुछ लोग इसकी तुलना प्रागैतिहासिक काल के विशाल समुद्री डायनासोर मेगालोडोन (Megalodon) या प्लीसियोसॉर (Plesiosaur) से करते हैं।
2. मकर (Makara) — महाभारत और कलाकृतियाँमकर सनातन संस्कृति का एक बहुत प्रसिद्ध पौराणिक जीव है, जिसे गंगा मैया और वरुण देव का वाहन माना गया है。बनावट: ग्रंथों में इसे एक उभयचर (जमीन और पानी दोनों में रहने वाला) जीव बताया गया है, जिसका मुख मगरमच्छ जैसा, पैर शेर या हाथी जैसे और पूंछ मछली जैसी होती थी।तुलना: इसकी शारीरिक संरचना प्राचीन काल के विशाल मगरमच्छ रूपी डायनासोर जैसे सरकोसुचस (Sarcosuchus) या क्रोनोसॉरस से काफी मिलती-जुलती है।
3. अहि / वृत्र (Ahi / Vritra) — ऋग्वेद और पुराणवेदों और पुराणों में 'अहि' या 'वृत्र' नाम के एक विशालकाय अजगर या ड्रैगन जैसे जीव का वर्णन है। बनावट: यह इतना विशाल था कि इसने अपनी कुंडली से नदियों के पानी को रोक दिया था। शास्त्रों में इसे पैरों वाला एक विशाल 'सरीसृप' (Reptile) माना गया है। तुलना: इसके विशाल आकार और सरीसृप प्रजाति होने के कारण इसकी तुलना थैलोटोसॉर या बड़े भूमिधारी डायनासोरों से की जाती है।
4. शरभ (Sharabha) — शिव पुराणशिव पुराण में भगवान शिव के एक अत्यंत शक्तिशाली अवतार 'शरभ' का वर्णन है, जो हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद भगवान नरसिंह के क्रोध को शांत करने के लिए प्रकट हुए थे। बनावट: यह जीव आठ पैरों वाला, शेर से भी बड़ा और उड़ने वाले विशाल पंखों से युक्त था।तुलना: इसे इतिहास का सबसे डरावना और शक्तिशाली प्रागैतिहासिक शिकारी माना जा सकता है।
5. गरुड़ (Garuda) — गरुड़ पुराण और महाभारतमहाभारत और पुराणों में गरुड़ को पक्षियों का राजा और भगवान विष्णु का वाहन बताया गया है। बनावट: गरुड़ इतने विशाल थे कि जब वे उड़ते थे तो उनके पंखों से सूर्य की रोशनी छिप जाती थी और वे अपनी चोंच में बड़े-बड़े हाथियों को उठा लेते थे। तुलना: कुछ आधुनिक व्याख्याओं में इसकी तुलना प्रागैतिहासिक काल के विशालकाय उड़ने वाले सरीसृपों जैसे क्वेटज़ालकोट्लस (Quetzalcoatlus) से की जा सकती है, जिसके पंखों का फैलाव किसी लड़ाकू विमान जितना बड़ा होता था।
निष्कर्ष:-
इस प्रकार, यद्यपि 'डायनासोर' एक आधुनिक अंग्रेजी शब्द है, लेकिन सनातन ग्रंथों में वर्णित महाकाय सरीसृप और जीवों की विशेषताएं बताती हैं कि प्राचीन ऋषियों को पृथ्वी पर रहने वाले इन विशालकाय जीवों का आभास था।