Meri Zindagi mein aane ke liye Shukriya Tranquil Soul द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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Meri Zindagi mein aane ke liye Shukriya

ये कहानी है ऐसी लड़की की जो पहली नज़र में किसी से प्यार कर बैठती है, जिसके बाद उसकी ज़िंदगी में क्या बदलाव आता है, जानने के लिए देखते हैं आगे...

नूर सत्रह साल की एक लड़की, जिसने अभी-अभी अपनी बारहवीं की परीक्षा दी है और एंट्रेंस की तैयारी कर रही है।

अरमान शर्मा, इन्होंने भी बारहवीं की परीक्षा दी है।

कहानी आरंभ

पहाड़ों की ओर से आज बादलों की घटा छाई थी। मोर बार-बार गाकर बारिश का संकेत दे रहे थे। बादलों को देखकर खुश थे। एक सुंदर से घर में एक लड़की सूर्य नमस्कार कर रही थी। रसोई में एक-दो औरतें खाना बना रही थीं। दो आदमी थे जो कहीं जाने को तैयार हो रहे थे। दो लड़के, जिनमें एक की उम्र 21 साल और एक की उम्र सोलह साल थी, दोनों तैयार हो रहे थे।

ये थी नूर की फैमिली। दो रसोई में उसकी माँ और बड़ी माँ थीं, और दो लड़के उसके भाई थे, और वो सूर्य नमस्कार कर रही थी।

तभी उसके पापा बोलते हैं,
"नूर बच्चा, आपकी काउंसलिंग है आज, जल्दी करिए बच्चा, देर हो जाएगी।"

नूर — "जी पापा, बस मैं तैयार हूँ।"

स्वामिनी (नूर की बड़ी माँ) — "अरे ऐसे कैसे, पहले खाना और दही-शक्कर खाकर जाओ। जल्दी-जल्दी चलो और आप दोनों भी आइए। पहले खाना खाइए। सुबह जल्दी उठना नहीं है और फिर बिना खाए बाहर जाना है।"

सभी जन एक साथ खाना खाते हैं और फिर नूर, उसके पापा और बड़ा भाई काउंसलिंग के लिए चले जाते हैं।

वो वहाँ पहुँचते हैं तो एक साइड स्टूडेंट्स को बैठा दिया गया, एक साइड पेरेंट्स को। नूर बहुत ही ज्यादा नर्वस थी। ये उसका पहली बार था बिना किसी सपोर्ट के खुद से कुछ करना। भले उसके फैमिली मेंबर थे उसके पास, पर उसके लिए अनजान लोगों के बीच अकेले बैठना भी बड़ी बात थी।

नूर का चेहरा धीरे-धीरे गुलाबी और गुलाबी से लाल हो रहा था। वो बहुत घबरा रही थी। तभी उसे एक आवाज़ सुनाई देती है, एक लड़के की। पर वो आवाज़ में कुछ तो था। वो बहुत ही अट्रैक्टिव थी, प्यारी थी। वो घूमकर उसकी शक्ल भी नहीं देखती। वो लड़का उसके साथ बैठ जाता है। उन दोनों में ना मात्र का गैप था। नूर डर और शर्म से पसीने से भीग गई थी।

काउंसलिंग स्टार्ट हो जाती है। वो लड़का धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ बातें शुरू कर देता। कभी काउंसलर में कमियाँ निकाल रहा था तो कभी कुछ। काउंसलिंग खत्म होते ही नूर घर आ जाती है। उसके दिमाग में लड़का अभी भी घूम रहा था। उसने शक्ल नहीं देखी थी, बस उसे नाम याद था — अरमान।

नूर को लगता है कि वो उसे कभी नहीं देख पाएगी। ये शायद उनकी आखिरी ही मुलाकात थी क्योंकि उस लड़के ने यूनिवर्सिटी की दूसरी ब्रांच को चूज़ किया था।

थोड़े दिन बाद नूर का जन्मदिन आ जाता है। उसी दिन उन्हें एक फैमिली फंक्शन पर जाना था। वो अपनी फैमिली के साथ जाती है। साथ में उसके भाई-भाभी और उनकी छोटी सी बेटी भी थी।

चारों तरफ चहल-पहल थी। तभी नूर की भतीजी आइसक्रीम देखकर उधर भाग जाती है। वो उसे ढूँढ़ते हुए जाती है तो उसे वो नहीं मिलती। तभी उसे आवाज़ सुनाई देती है।

नूर — "ये आवाज़... ये आवाज़ तो उसी की है। वो यहाँ?"

नूर पीछे मुड़कर देखती है तो उसकी भतीजी पीहू अरमान की गोद में थी। अरमान उसे कुछ कह रहा था। वो पास गई तो सुनाई दिया—

अरमान — "क्या बच्चे, अकेले कहाँ घूम रहे हो आप? आपके मम्मी-पापा कहाँ हैं?"

तभी नूर जाकर बोलती है,
"पीहू, कम हियर।"

अरमान उसे देखता है। उसे देख अरमान की आँखों में चमक आई, जो उसने नूर से छुपा ली थी।

उन दोनों का आई कॉन्टैक्ट होता है और वो चली जाती है।

उस दिन के बाद उसे कभी नहीं दिखा। उसे उसकी एक बार देखी शक्ल भी याद भूल गई थी। याद थी तो बस उसकी आवाज़, उसका नाम, जो उसके ख्यालों से कभी नहीं निकली।

एक साल बाद नूर क्लास में बैठी थी। आज सेमेस्टर का पहला दिन था। क्लास अभी स्टार्ट नहीं हुई थी कि उसे पीछे से वही आवाज़ सुनाई देती है, जिसे सुन उसकी धड़कन तेजी से धड़कने लगती है। वो पीछे मुड़कर देखती है। चेहरा उसे याद ही नहीं था।

तभी प्रोफेसर की एंट्री होती है।

प्रोफेसर — "हेलो स्टूडेंट्स, हियर इज़ अ न्यू स्टूडेंट इन योर क्लास हू माइग्रेटेड फ्रॉम अनदर ब्रांच ऑफ यूनिवर्सिटी, मिस्टर अरमान अहलावत।"

अरमान ग्रीट करके बैठ जाता है।

ऐसे ही क्लास खत्म हो जाती है। अगले दिन नूर बैठी थी। उसके साथ उसकी फ्रेंड परी थी। अरमान उनके पीछे ही बैठा था।

अरमान ने नूर को बुलाया,
"एक्सक्यूज़ मी मिस..."

नूर — "नूर चौहान।"

अरमान — "ओ नूर, क्या आप मेरी हेल्प कर सकती हैं नोट्स में? और मैं परसों क्लास नहीं आया था तो..."

नूर — "जी जरूर। पर परसों क्लासेस तो लगी थीं, पर कुछ भी पढ़ाई नहीं हुई थी। सबकी इंट्रोडक्शन गई थी। वो आप ये मेरे नोट्स से देख लीजिए।"

अरमान — "थैंक यू।"

ऐसे ही धीरे-धीरे उनके नंबर शेयर हो गए, प्रैक्टिकल और नोट्स के बहाने।

एक दिन परी और नूर बात कर रहे थे।

नूर — "एक्चुअली हमारे घर में कोई गाली नहीं देता। मैं ऐसे माहौल में रही नहीं, तो मुझे गाली देने वालों से डर लगता है।"

ये बात सुनकर अरमान ने बिल्कुल ही गाली देनी बंद कर दी थी। ना ही नूर के आसपास किसी को गाली देने देता था।

ऐसे ही उनकी डिग्री पूरी हो गई। पर उन्होंने कभी भी इज़हार नहीं किया। नूर को जॉब मिल गई। अरमान ने अपने पापा का बिज़नेस संभाल लिया।

कभी-कभी उनकी बात हो जाती थी, बट अभी भी किसी ने कोई इज़हार नहीं किया था।

एक दिन नूर के लिए रिश्ता आया। उसके भाई ने पक्का करने से पहले नूर की सलाह मांगी। नूर इस बात से बहुत दुखी थी।

नूर — "हम रो क्यों रहे हैं? हमारा कौन सा उनसे कोई रिश्ता था। हमने कौन सा कभी इज़हार किया था। करती भी कैसे? उन्हें तो कोई और पसंद है।"

नूर को ऐसा लगता था क्योंकि अरमान ने एक बार कहा था उसे कोई पसंद है।

उसने रिश्ते के लिए हाँ कर दी। ना करने की वजह भी नहीं थी। उसका कोई रिश्ता नहीं था अरमान से।

लड़का अमेरिका में अपने बाप का बिज़नेस संभाल रहा था। वो शादी के दिन ही आने वाला था। उसकी भाभी ने उसे फोटो दिखाने की कोशिश की, पर उसने नहीं देखी।

धीरे-धीरे शादी का दिन आ गया। शादी हो रही थी। दूल्हा उसके साथ बैठा था कि तभी उसके भाई ने दूल्हे को बुलाया। वो कुछ बोला और वो आवाज़ सुनते ही नूर की धड़कनें बढ़ गईं।

उसने झट से मुँह घुमाकर दूल्हे का सेहरा उठाना चाहा कि उसकी भाभी ने रोक दिया—

"लाडो, ये क्या कर रही हो आप? दूल्हे का सेहरा नहीं उठा सकते, ना ही अपना घूँघट।"

नूर की धड़कनें बढ़ चुकी थीं।

"क्या ये अरमान है? नहीं, मैं ही इमैजिन कर रही हूँ।"

शादी होकर विदाई हो गई। वो इस वक्त अपनी सुहागरात के सेज पर बैठी थी।

उसका घूँघट हटाया तो सामने वही चेहरा था।

उसके मुँह से निकला — "अरमान!"

अरमान — "नूर, खाना तो अच्छे से खाया ना?"

नूर को कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो तो किसी और से प्यार करता था, तो ये शादी कैसे?

नूर — "आप तो किसी और से प्यार करते थे ना, तो ये शादी?"

अरमान — "किसने कहा मैं किसी और से प्यार करता था? मैंने तो हमेशा तुमसे प्यार किया। उस काउंसलिंग वाले दिन पहली नज़र से। किसी और के बारे में सोचना भी मुझे पाप लगता है।"

नूर — "क्या? और ये शादी?"

अरमान — "दरअसल मैं तो अपने जज़्बात कभी बता नहीं पाया। और डिग्री के बाद जब तुमने मुझसे कॉन्टैक्ट्स ही तोड़ दिए, तो मैंने भी मन समझा लिया था। पर फिर मॉम-डैड रिश्ते के लिए कहने लगे। उन्होंने फोटो दिखाई, मैंने तुम्हें देखा और हाँ कर दी।"

नूर — "आप मुझसे प्यार करते थे तो बताया क्यों नहीं?"

अरमान — "तुम बहुत ही इनोसेंट थी। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से तुम्हारा दिल टूटे। बस इसी डर से... पर तुम चिंता मत करो। अगर तुम्हें मुझसे प्यार नहीं भी है, तो भी कोई बात नहीं। हम वैसे ही रहेंगे जैसे थे। मैं तुम्हें कभी फोर्स नहीं करूँगा।"

नूर रोते हुए कहती है—

"शटअप अरमान उल्लूवाट! आई लव यू। और मैं नहीं बुलाने वाली आपको। अगर मेरी शादी किसी और से हो जाती तो? मुझे तो लग रहा था कि मैंने आपको हमेशा के लिए खो दिया।"

अरमान — "हे, इट्स अहलावत, नॉट उल्लूवाट। और अब आप नहीं कह सकती क्योंकि अब आप इस मिस्टर उल्लूवाट की मिसेज उल्लूवाट हैं।"

इसी के साथ वो उसके माथे को चूम लेता है। नूर की आँखों से आँसू बह जाते हैं।

ऐसे ही दो प्रेमियों का मिलन होता है।

जब हम किसी को सच्चे दिल से चाहते हैं, तो वो हमें जरूर मिलता है — या ज़िंदगी भर के लिए, या मौत के बाद।